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Ukraine को लेकर Russia का रवैया बना अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय, क्या है इस विवाद में NATO की भूमिका

NATO: पुतिन ने यूक्रेन की सीमा के पास एक लाख से अधिक सैनिक तैनात किए हैं. उधर अमेरिका हजारों सैनिक तैनात करने के लिए तैयार है. उसने ब्रिटेन और नाटो सहयोगियों से भी सैनिक तैनात करने को कहा है.

Ukraine Conflict: यूक्रेन को लेकर रूस का उकसाने वाला रवैया अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है, जबकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हमले की किसी मंसूबे से इनकार किया है और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने युद्ध की बात से 28 जनवरी, 2022 को इनकार कर चुके हैं.

पुतिन ने यूक्रेन की सीमा के पास एक लाख से अधिक सैन्य बल तैनात किए हैं. उधर अमेरिका हजारों सैनिक तैनात करने के लिए तैयार है. उसने ब्रिटेन और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सहयोगियों से भी पूर्वी यूरोप में हजारों सैनिक तैनात करने को कहा है. पुतिन ने कहा है कि अगर नाटो यूक्रेन को गठबंधन में शामिल करने से मना कर देता है तो वह पीछे हट जाएगा, लेकिन उसकी यह मांग खारिज कर दी गई है.

नाटो क्या है?

नाटो 1949 में गठित हुआ एक सैन्य गठबंधन है. अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, ब्रिटेन और आठ अन्य यूरोपीय देशों ने मिलकर यह गठबंधन किया था. अब 30 देश इस संगठन के सदस्य हैं. यह गठबंधन संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर काम करता है. नाटो और संयुक्त राष्ट्र के बीच कुछ बातें साझा हैं. ये दोनों ही अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो सदस्य देशों को वित्तीय मदद देते हैं.

इन दोनों पर अमेरिका समेत पश्चिमी शक्तियों का राजनीतिक प्रभाव है, लेकिन दोनों संगठन एक जैसे नहीं है. नाटो का काम आवश्यकता पड़ने पर अपने सैन्य सहयोगियों की मदद से युद्ध लड़ना है, जबकि संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा, राजनीतिक वार्ता और अन्य साधनों के जरिए युद्ध से बचने का काम करता है.

यूक्रेन नाटो में शामिल क्यों होना चाहता है ?

यूक्रेन 1992 के बाद से नाटो का साझेदार है. नाटो ने 1997 में यूक्रेन-नाटो आयोग की स्थापना करके सुरक्षा चिंताओं पर चर्चा के लिए एक मंच मुहैया कराया है. इसके जरिए एक औपचारिक सदस्यता समझौते के बिना नाटो-यूक्रेन संबंध मजबूत हुए थे. नाटो का सदस्य बनाए जाने पर यूक्रेन के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सैन्य समर्थन बढ़ जाएगा, जो रूसी आक्रामकता को रोकने में मददगार हो सकता है.

नाटो गैर-सदस्य देशों को समर्थन देने संबंधी सीमाओं को लेकर स्पष्ट है. हालांकि उसने मानवीय आपात स्थितियों के दौरान अफगानिस्तान जैसे गैर-सदस्य देशों का समर्थन किया है, वह किसी गैर-सदस्य देश में सैनिकों को तैनात करने के लिए प्रतिबद्ध नहीं है.

नाटो की सदस्यता यूक्रेन को यूरोप की ओर अधिक मजबूती से खींचेगी. इससे यह संभावना बढ़ जाएगी कि यूक्रेन यूरोपीय संघ में शामिल हो सकता है, जो यूक्रेन के लिए एक और नीतिगत लक्ष्य है. इससे यूक्रेन को अमेरिका के साथ और घनिष्ठ संबंध बनाने में भी मदद मिलेगी. साथ ही यूक्रेन से रूस का प्रभाव कम करने में सहायता मिलेगी, लेकिन उसे नाटो की सदस्यता मिलने से क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है. रूस ने कहा है कि वह गठबंधन के विस्तार को सीधे खतरे के तौर पर लेगा.

तो क्या यूक्रेन को नाटो का सदस्य बनाया जा सकता है?

यूक्रेन नाटो की सदस्यता हासिल करने की ओर से आगे बढ़ रहा है, लेकिन उसका इसमें जल्द शामिल होना संभव नजर नहीं आ रहा. किसी देश को शामिल करने के लिए सभी नाटो सदस्यों को सर्वसम्मति से मंजूरी देनी होगी. सदस्यता पाने के इच्छुक देशों को एक सदस्यता कार्य योजना का पालन करना होता है.

इसके लिए देशों को अपनी सुरक्षा एवं राजनीतिक नीतियों की विस्तृत जानकारी देनी होती है. योजना को पूरा करने और प्रवेश प्राप्त करने में देश को 20 साल लग सकते हैं, जैसा कि नॉर्थ मैसेडोनिया के मामले में हुआ था. यूक्रेन ने सदस्यता कार्य योजना के लिए 2008 में आवेदन दिया था और यह प्रक्रिया पुतिन समर्थक एवं यूक्रेन के पूर्व राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच के कार्यकाल में 2010 में रोक दी गई थी.

रूस के साथ बढ़ते तनाव के बीच यूक्रेन ने नाटो में शामिल होने की योजना को फिर से नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया है. यदि यूक्रेन को नाटो की सदस्यता मिल जाती है, तो उसके और रूस के बीच संघर्ष का खतरा होने पर गठबंधन सदस्य रूस के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे.

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