ईरान में इस्लामिक शासन का खात्मा या फिर परमाणु ठिकानों पर कब्जा... तेहरान के खिलाफ क्या ट्रंप का प्लान?
US-Iran War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम ईरान के आतंकी शासन के संदर्भ में मध्य पूर्व में अपने सबसे बड़े सैन्य कोशिशों को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं.

पिछले तीन हफ्तों से जारी युद्ध के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान में मौजूद सभी परमाणु सामग्री को सुरक्षित करने या उसे वहां से निकालने के तरीकों और विकल्पों को लेकर बड़ा प्लान बना रहे हैं. इस चर्चा से अवगत कई लोगों ने कहा कि यह योजना ऐसे समय में बनाई जा रही है, जब तेहरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल के नेतृत्व वाला सैन्य अभियान एक अनिश्चित चरण में पहुंच चुका है.
हालांकि, अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस तरह के किसी भी ऑपरेशन का आदेश देते हैं तो उसका समय अभी तक साफ नहीं है. एक सूत्र के हवाले से सीबीएस न्यूज ने रिपोर्ट किया है कि ट्रंप ने इस संबंध में अभी तक कोई आखिरी फैसला नहीं लिया है.
खुफिया सैन्य इकाई को हो सकती है तैनाती
सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने बताया कि इस योजना का मुख्य बिंदु जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) की तैनाती हो सकती है, जो एक खुफिया और एलीट सैन्य इकाई है और जिसे अकसर अत्यंत संवेदनशील काउंटर-प्रोलिफरेशन मिशनों के लिए जिम्मेदारी दी जाती है.
व्हाइट हाउस की एक प्रवक्ता ने कहा कि इस तरह की तैयारियां करना पेंटागन का काम है, जबकि पेंटागन के एक प्रवक्ता ने इस लेकर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की.
राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर किया पोस्ट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि हम अपने मकसद को हासिल करने के बेहद करीब हैं, क्योंकि हम ईरान के आतंकी शासन के संदर्भ में मध्य पूर्व में अपने सबसे बड़े सैन्य कोशिशों को खत्म करने पर विचार कर रहे हैं.’
ईरान के साथ इजरायल-US का युद्ध लगातार बदल रहा स्वरूप
ईरान के परमाणु सामग्री को लेकर यह प्राइवेट चर्चा ऐसे समय पर हो रही है, जब यह संघर्ष लगातार अपना स्वरूप बदल रहा है. शुरुआत में इसका फोकस ईरान की पारंपरिक सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने पर था, जिसमें उसकी एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल सिस्टम और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े प्रमुख ढांचे शामिल थे.
अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए शुरुआती हमलों का उद्देश्य ईरान की क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई करने की क्षमता को कम करना था. हालांकि, हवाई हमलों के बावजूद ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के अमेरिकी सहयोगी देशों पर जवाबी हमले किए हैं और जहाजों को धमकी देकर ज्यादातर तेल आपूर्ति को भी रोक दिया है.
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