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यूएस एयरफोर्स और नेवी ने ईरान में कहां-कहां बरपाया बारूदी कहर? तेहरान ने कुछ ऐसे दिया जवाब

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों की अमेरिकी बमबारी में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है जबकि 78 लोग घायल हुए हैं.

US Iran War: अभी-अभी दुनिया को राहत मिलने लगी थी. तेल और गैस की सप्लाई दोबारा पटरी पर लौट रही थी. अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के बाद उम्मीद जगी थी कि पश्चिम एशिया में शांति कायम रहेगी. लेकिन महज़ कुछ हफ्तों बाद हालात फिर से पलट गए. हॉर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर दुनिया की सबसे खतरनाक जंग का नया मैदान बन गया है. अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव दोबारा शुरू हो चुका है और इसके असर पूरी दुनिया पर दिखाई देने लगे हैं.

तनाव की शुरुआत हॉर्मुज स्ट्रेट में हुई. अमेरिकी दावे के मुताबिक, ओमान के तट के करीब से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर ईरानी बलों ने कार्रवाई की. अमेरिका का आरोप है कि जहाज ईरान द्वारा निर्धारित समुद्री मार्ग का पालन नहीं कर रहे थे, जिसके बाद उन पर फायरिंग की गई. वॉशिंगटन ने इसे हालिया समझौते का उल्लंघन माना और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुरंत सैन्य कार्रवाई की मंजूरी दे दी. इसके बाद अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने लगातार दो दिनों तक ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए.

आमने-सामने यूएस-ईरान

अमेरिकी सेना के मुताबिक, इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, कोस्टल सर्विलांस नेटवर्क, मिसाइल और ड्रोन डिपो, नौसैनिक क्षमताओं तथा कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरानी मीडिया ने भी बंदर अब्बास, सीरिक और बुशहर में जोरदार धमाकों और सिलसिलेवार एयरस्ट्राइक की पुष्टि की है. बंदर अब्बास के शाहिद हक्कानी बंदरगाह पर आग लग गई, जबकि सीरिक और बुशहर में भी कई सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले हुए.

सबसे ज्यादा चिंता बुशहर परमाणु ऊर्जा केंद्र के आसपास हुए हमलों को लेकर है. ईरानी मीडिया के अनुसार, बुशहर में स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों के पास धमाके हुए, हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि परमाणु संयंत्र को कोई नुकसान पहुंचा है या नहीं. इसके अलावा अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह, ईरानशहर सैन्य अड्डे और गोलेस्तान प्रांत के दो रेलवे पुलों को भी निशाना बनाया. इनमें से एक पुल चीन-ईरान रेल कॉरिडोर का हिस्सा बताया जा रहा है, जिसका इस्तेमाल रूस भी करता है.

ईरान का आरोप है कि अमेरिकी सेना ने मशहद जाने वाले मार्गों और पुलों पर भी हमले किए. उसी मशहद में दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जा रहा है. ईरानी सरकार का दावा है कि इन हमलों का मकसद अंतिम संस्कार के दौरान देश में अस्थिरता पैदा करना था.

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, पिछले दो दिनों की अमेरिकी बमबारी में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई है जबकि 78 लोग घायल हुए हैं. मंत्रालय का कहना है कि पांच प्रांतों में हुए इन हमलों के बाद घायलों का अलग-अलग अस्पतालों में इलाज चल रहा है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर हमलों के वीडियो साझा करते हुए इसे "ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई" बताया. ट्रंप का कहना है कि यदि ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर हमला करेगा तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. वहीं अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने भी चेतावनी दी कि अगर हॉर्मुज में अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना बनाया गया तो उसका अंजाम बेहद गंभीर होगा.

दूसरी ओर ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को समझौते का उल्लंघन बताया है. ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने कहा कि धमकियों और सैन्य दबाव से ईरान नहीं झुकेगा. उनके मुताबिक, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवस्था ईरान तय करेगा और अमेरिकी दबाव स्वीकार नहीं किया जाएगा.

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने भी जवाबी सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कुवैत, बहरीन, कतर और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया है. कुवैत में अरिफजान और अल-सालेम एयरबेस, बहरीन में जुफैर और शेख ईसा एयरबेस तथा कतर में अमेरिकी सैन्य अड्डों पर हमलों की खबरें सामने आई हैं.

इन हमलों के बाद कतर, बहरीन और कुवैत में हवाई अलर्ट जारी कर दिए गए. बहरीन के गृह मंत्रालय ने सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी, जबकि कुवैती सेना ने पुष्टि की कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को रोकने के लिए सक्रिय है. जॉर्डन के आसमान में भी मिसाइल गतिविधियों की खबरें आई हैं.

तेहरान का पलटवार का दावा

इसी बीच ईरान ने दावा किया है कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में घुसे एक दुश्मन ड्रोन को मार गिराया है. मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक ड्रोन को ईरानी वायु रक्षा प्रणाली ने इंटरसेप्ट कर नष्ट कर दिया. हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि वह ड्रोन किस देश का था.

अमेरिकी मीडिया ABC News की रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक अमेरिका के 30 MQ-9 रीपर ड्रोन नष्ट हो चुके हैं. प्रत्येक ड्रोन की अनुमानित कीमत करीब 3 करोड़ डॉलर बताई जाती है. हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.

इस पूरे घटनाक्रम ने दुनिया की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है. हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है. यदि यहां तनाव और बढ़ता है तो वैश्विक तेल और गैस की सप्लाई पर गंभीर असर पड़ सकता है. बाजारों में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है और ऊर्जा कीमतों में फिर से उछाल की आशंका जताई जा रही है.

विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य टकराव आगे बढ़ता है तो इससे सिर्फ पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया आर्थिक और रणनीतिक संकट में फंस सकती है. वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भूमिका पर भी नजरें टिकी हैं. माना जा रहा है कि यदि तनाव और बढ़ा तो इजरायल भी दोबारा ईरान और उसके सहयोगी संगठनों के खिलाफ सैन्य अभियान तेज कर सकता है.

फिलहाल हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं, हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से वैश्विक संघर्ष का केंद्र बन चुका है और पूरी दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि यह टकराव सीमित रहता है या एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेता है.

ये भी पढ़ें: मौत के बाद भी सुरक्षित नहीं खामेनेई! शव को ईराक से ईरान फाइटर जेट के घेरे में लाया गया

राजेश कुमार पत्रकारिता जगत में पिछले करीब 14 सालों से ज्यादा वक्त से अपना योगदान दे रहे हैं. राष्ट्रीय और सामाजिक मुद्दों से लेकर अपराध जगत तक, हर मुद्दे पर वह स्टोरी लिखते आए हैं. इसके साथ ही, किसी खबरों पर किस तरह अलग-अलग आइडियाज के साथ स्टोरी की जाए, इसके लिए वह अपने सहयोगियों का लगातार मार्गदर्शन करते रहे हैं. इनकी अंतर्राष्ट्रीय जगत की खबरों पर खास नज़र रहती है, जबकि भारत की राजनीति में ये गहरी रुचि रखते हैं. इन्हें क्रिकेट खेलना काफी पसंद और खाली वक्त में पसंद की फिल्में भी खूब देखते हैं. पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर ऑफ ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म किया है. राजनीति, चुनाव, अंतरराष्ट्रीय संबंधों और अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर राजेश कुमार लगातार लिखते आ रहे हैं.
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