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Exclusive: पहलगाम हमले से पहले लश्कर ने बदल दिए आतंकियों के ठिकाने, इस मोस्ट वांटेड को दी थी मुरीदके की कमान

ABP Exclusive: पहलगाम हमले से ठीक पहले हुआ बदलाव इसलिए भी शक के घेरे में है क्योंकि साल 2020 से 14 अप्रैल 2025 तक मुरीदके हेडक्वार्टर की कमान संभालने वाला अब्दुल रहमान कट्टर जिहादी प्रचारक था.

पहलगाम आतंकी हमले को तीन महीने बीत चुके हैं और सुरक्षाबल हमलावरों को खोज रहे हैं. इसी बीच आज यानि बुधवार (23 जुलाई, 2025) को एबीपी न्यूज़ के हाथ एक अहम Exclusive जानकारी लगी है कि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने हमले से ठीक एक हफ्ते पहले अपने आतंरिक ढांचे में बड़े स्तर पर बदलाव किए थे, जिसमें सबसे बड़ा फेरबदल 15 अप्रैल को हुआ था.  

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के मुरीदके में स्थित लश्कर के हेडक्वार्टर मरकज तैयबा, जिसपर भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान स्ट्राइक भी की थी और लाहौर स्थित लश्कर के ‘मरकज़ क़ुदसिया’ के प्रमुखों को अचानक आतंकी हाफिज सईद के आदेश पर बदल दिया गया. इसके साथ ही भारत के वांटेड आतंकी को मुरीदके हेडक्वार्टर की कमान दे दी गई थी. 15 अप्रैल को अचानक हुए इस बदलाव में मुरीदके स्थित मरकज़ तैयबा की कमान आतंकी अबू ज़ार को फिर से दी गई थी, जबकि साल 2020 से मुरीदके स्थित लश्कर के हेडक्वार्टर की कमान संभाल रहे लश्कर के कमांडर अब्दुल रहमान मुब्बाशिर को लाहौर के मरकज़ क़ुदसिया भेजा गया, जहां हाफ़िज़ सईद का बेटा आतंकी तल्हा सईद सक्रिय है.

कौन है वांटेड आतंकी अबू ज़ार ?
यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि आतंकी अबू ज़ार, जिसे लश्कर ने पहलगाम हमले के ठीक एक हफ़्ते पहले मुरीदके स्थित लश्कर के हेडक्वार्टर की कमान दी थी, वो साल 2006 से भारत में वांटेड है साथ ही 2006 के हैदराबाद ब्लास्ट और 2008 में मुंबई में हुए 26/11 हमले का भी आरोपी है. NIA की चार्जशीट के मुताबिक आतंकी अबू ज़ार बम धमाका करने वाले आतंकियों का आतंकी ज़की उर रहमान लखवी के साथ साझा हैंडलर था. 26/11 आतंकी हमले की जांच में सामने आया था कि इसी आतंकी अबू ज़ार ने ही कसाब सहित अन्य 10 आतंकियों को सिम कार्ड मुहैया करवाये थे. इतना ही नहीं साल 2008 तक आतंकी अबू ज़ार जम्मू कश्मीर में लश्कर ए तैयबा का प्रमुख भी था.

पहलगाम हमले से ठीक पहले हुआ ये बदलाव इसलिए भी शक के घेरे में है, क्योंकि साल 2020 से 14 अप्रैल 2025 तक लश्कर के मुरीदके स्थित हेडक्वार्टर की कमान संभालने वाला अब्दुल रहमान खुद पेशे से हथियारबंद आतंकी नहीं था, बल्कि एक कट्टर जिहादी प्रचारक था और उसका मुख्य काम युवाओं को जिहाद का पाठ पढ़ाकर ब्रेनवॉश करना था, लेकिन पहलगाम हमले से ठीक पहले लश्कर के मुरीदके स्थित हेडक्वार्टर की कमान अबू ज़ार को लश्कर ए तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद ने सौंपी जो ख़ुद वांटेड आतंकी है. 

उस्ताद उल मुजाहिद्दीन की मिली है उपाधि
इतना ही नहीं साल 2012 से 2019 तक अबू ज़ार लश्कर ए तैयबा के मुरीदके स्थित हेडक्वार्टर में उस्ताद उल मुजाहिद्दीन रह चुका है, जिसमें इसका काम लश्कर के नए भर्ती किए गए आतंकियों को हथियार चलाने और बम धमाके की ट्रेनिंग देना था. हालांकि साल 2019 में पुलवामा आतंकी हमला और बालाकोट स्ट्राइक के बाद जब पाकिस्तान में FATF की ग्रे लिस्ट से निकलने के लिए लश्कर ए तैयबा पर सख्ती की थी और इसके हेडक्वार्टर मरकज़ मुरीदके को सरकारी नियंत्रण में लिया था तब आतंकी अबू ज़ार को लश्कर ए तैयबा ने मुरीदके से हटाकर लाहौर की मरकज़ क़ुदसिया में शिफ्ट कर दिया था, जो ना सिर्फ़ हाफिज सईद का गढ़ है बल्कि हाफिज सईद का बेटा और आतंकी तल्हा सईद यहीं पर आये दिन आतंक और जिहाद की तकरीरें देता है. अबू ज़ार को लाहौर की मरकज़ क़ुदसिया शिफ्ट करके हाफिज सईद के परिवार की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी दे गई थी, क्योंकि उन दिनों लगातार लश्कर के टॉप कमांडर्स को “अज्ञात हमलावर” मार रहे थे.

ज़की उर रहमान लखवी का रोल निभा रहा है अबू ज़ार
सूत्रों के मुताबिक़ अबू ज़ार 6 सालों तक जम्मू कश्मीर में लश्कर ए तैयबा का ऑपरेशनल चीफ था और 2006 के हैदराबाद ब्लास्ट से लेकर 26/11 तक की प्लानिंग का महत्वपूर्ण हिस्सा था. ऐसे में लश्कर ए तैयबा द्वारा पहलगाम हमले से ठीक 1 हफ्ते पहले इसे लश्कर हेडक्वार्टर की कमान देना जांच का बड़ा विषय है, जिसमें महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं और उसे कश्मीर का चप्पा-चप्पा पता है. 

सूत्रों के मुताबिक, लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद और ज़की उर रहमान लखवी के अंडरग्राउंड होने के बाद संगठन की कमान अब धीरे-धीरे दूसरी पीढ़ी के आतंकी कमांडरों को सौंपी जा रही है. मौजूदा हालात में सैफुल्लाह कसूरी खुद हाफिज सईद की मंजूर के बाद हमलों की रणनीति तय कर रहा है, जबकि अबू ज़ार अब वही भूमिका निभा रहा है जो 17 साल पहले लखवी के पास थी यानी ऑपरेशनल कमांड और हेडक्वार्टर का प्रमुख. 

ऑपरेशन सिंदूर में बाल-बाल बचा अबू जार, बन गया नासूर
ऐसे में सूत्रों के मुताबिक संभावना है कि पहलगाम हमले से ठीक पहले मुरीदके स्थित लश्कर मुख्यालय में किया गया नेतृत्व परिवर्तन सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि उस हमले की पूर्व तैयारी का हिस्सा भी हो सकता है जिसकी गहन जांच की जरूरत है.  माना जा रहा है कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों ने साल 2016 से 2018 के बीच मुरीदके स्थित मरकज़ तैयबा में ट्रेनिंग भी ली थी और उस समय अबू ज़ार वहीं पर “उस्ताद उल मुजाहिद्दीन” के पद पर तैनात था और आतंकियों को हथियार चलाने, बम बनाने और आतंकी कार्रवाई की ट्रेनिंग दिया करता था.

भारतीय सेना ने 7 मई, 2025 को लश्कर ए तैयबा के मुरीदके स्थित हेडक्वार्टर पर भारतीय समयानुसार रात 12 बजकर 35 मिनट पर स्ट्राइक की थी, जिसमें अबू ज़ार बच गया था और इसके बाद लश्कर के हेडक्वार्टर का प्रमुख आतंकी अबू ज़ार दो बार सार्वजनिक रूप से सामने आ चुका है. पहली बार 9 मई को भारत की स्ट्राइक के 2 दिन बाद अबू ज़ार ध्वस्त मरकज़ तैयबा में जुमे की नमाज़ पढ़ाते दिखा था और फिर 7 जून को बकरीद के दिन आतंकी अबू ज़ार हथियार के साथ ध्वस्त मरकज़ तैयबा में अपने 2 बॉडीगार्ड के साथ निरीक्षण कर रहा था.

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शिवांक मिश्रा साल 2020 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं और इस वक्त एबीपी न्यूज़ में बतौर प्रिंसिपल कॉरेस्पॉन्डेंट कार्यरत हैं. उनकी विशेषज्ञता साइबर सुरक्षा, इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग और जनहित से जुड़े मामलों की गहन पड़ताल में है. कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों के शरण मॉड्यूल से लेकर भारत में दवा कंपनियों की अवैध वसूली जैसे विषयों पर कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं. क्रिकेट और फुटबॉल देखना और खेलना पसंद है.
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