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क्या पाकिस्तान अफगानिस्तान के खिलाफ छेड़ सकता है युद्ध, टीटीपी के साथ बातचीत से इनकार, जानिए क्या कहा

Mumtaz Zahra Baloch Statement: उन्होंने अफगानिस्तान की धरती से इस्लामाबाद में अस्थिरता पैदा करने वाले आतंकवादी संगठनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने को कहा.

Pakistan Vs Afghanistan: पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की प्रवक्ता मुमताज जहरा बलूच ने गुरुवार को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के साथ बातचीत से इनकार कर दिया. उन्होंने अफगानिस्तान से उसकी धरती से इस्लामाबाद में "अस्थिरता" पैदा करने वाले आतंकवादी संगठनों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने को कहा.

बलूच ने यहां एक साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, 'पाकिस्तान को उम्मीद है कि अफगान अधिकारी आतंकवादी संगठनों और उनके नेतृत्व के खिलाफ उन अपराधों के लिए तत्काल कार्रवाई करेंगे, जो वे कर रहे थे और जिन आतंकवादी घटनाओं के लिए वे पाकिस्तान में जिम्मेदार थे."

बलूच ने कहा, "पाकिस्तान उन सभी आतंकवादी संगठनों से लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन्होंने देश और पाकिस्तान-चीन दोस्ती के प्रतीकों को निशाना बनाया था."

पाकिस्तान के विदेश कार्यालय का यह बयान अफगानिस्तान के अंतरिम आंतरिक सुरक्षा मंत्री मुहम्मद नबी ओमारी द्वारा पाकिस्तान सरकार से टीटीपी के साथ टेबल वार्ता करने के आह्वान के एक दिन बाद आया है.

अफगानिस्तान के खोस्त में एक इफ्तार सभा के दौरान नबी ओमारी ने कहा, "हम पाकिस्तान सरकार से पूछते हैं और उनके साथ लड़ रहे भाइयों (टीटीपी) को एक साथ आने और बात करने की सलाह देते हैं."

अफगान तालिबान पाकिस्तान से टीटीपी के साथ जुड़ने का आह्वान कर रहा है. उसने वार्ता को सुविधाजनक बनाने के लिए अपनी तत्परता जताई है, जैसा कि उसने पीटीआई के संस्थापक इमरान खान के कार्यकाल के दौरान किया था.

वर्षों पहले पाकिस्तान इस प्रस्ताव पर सहमत हुआ था और काबुल में टीटीपी नेतृत्व के साथ महीने भर की बातचीत की थी. नतीजतन, टीटीपी ने युद्धविराम की घोषणा की थी. इसके बाद पाकिस्तानी जेलों में बंद कई तालिबान कैदियों को रिहा किया गया और पाकिस्तान मूल के टीटीपी लड़ाकों को अपने परिवार के साथ घर लौटने की इजाजत दी गई थी.

हालांकि, पिछले समझौते से टीटीपी उग्रवादियों को बड़ी संख्या में देश के कुछ हिस्सों में फिर से बसने और खुद को फिर से संगठित करने में मदद मिली और वे पहले से अपने नियंत्रण वाले इलाकों पर फिर से कब्‍जा करने की दिशा में काम कर रहे थे.

वरिष्‍ठ विश्‍लेषक अदनान शौकत.ने कहा, "टीटीपी के साथ पिछला शांति समझौता एक बड़ी गलती थी. इस वजह से हजारों टीटीपी आतंकवादी देश में वापस आ गए और फिर से संगठित हुए. पाकिस्तान ने 400 से ज्‍यादा टीटीपी कैदियों को रिहा कर दिया था."

उन्‍होंने कहा, "पाकिस्तान को अब यह देखना चाहिए कि अफगानिस्तान में टीटीपी के लिए सुविधा और समर्थन क्यों है. यह उनकी सरकार है, जो इन टीटीपी आतंकवादियों का समर्थन करती है और पाकिस्तान में और उनके खिलाफ उनके कार्यों को बढ़ावा देती है. यही कारण है कि वे उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकते और यही कारण है कि वे इस्लामाबाद से उनके साथ टेबल वार्ता करने के लिए कहते रहते हैं."

लेकिन अफग़ानिस्तान पर पाकिस्तान की नीति स्पष्ट और कठोर नजर आती है. पाकिस्तान ने टीटीपी के साथ अब और बातचीत नहीं करने का फैसला किया है, इस तथ्य के बावजूद कि अफगान तालिबान ने इस बात से इनकार किया है कि टीटीपी संगठन और आतंकवादी पाकिस्तान के खिलाफ अफगान की धरती का उपयोग कर रहे हैं. इस बात पर जोर देते हुए कि इस्लामाबाद को अपने अंदर देखने और अपनी आंतरिक सुरक्षा समस्याओं का समाधान करने की जरूरत है; पाकिस्तान ने मार्च, 2024 में उत्तरी वजीरिस्तान में एक आत्मघाती बम विस्फोट में अपने सात सैनिकों की मौत के जवाब में खोस्त और पक्तिका में हवाई हमले किए हैं.

पिछले हफ्ते रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा था कि पाकिस्तान में आतंकवाद का स्रोत अफगानिस्तान में है. ख्वाजा आसिफ ने कहा था, "इस तथ्य के बावजूद कि अफगान तालिबान प्रशासन को आतंकवाद के ठिकानों के बारे में अच्छी तरह से पता है, आतंकवादी अपने क्षेत्र से पाकिस्तान के खिलाफ स्वतंत्र रूप से काम कर रहे थे. आतंकवाद के खतरे पर नजर रखने के लिए काबुल से मदद नहीं मिल रही है."

एसजीके/

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