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आज संभाली राष्ट्रपति की गद्दी, कभी मौत को गले लगाना चाहते थे जो बाइडेन | पढ़ें पूरी कहानी

जो बाइडेन की बायोग्राफी लिखने वाले इवान ओसनॉस के मुताबिक हाईस्कूल पास करते ही बाइडेन ने अपनी जिंदगी की दिशा तय कर ली थी. पहली बार जब उन्होंने राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को शपथ लेते देखा तभी सोच लिया कि उन्हें सियासत में जाना है.

वाशिंगटन: जो बाइडेन अमेरिका के 46वें राष्ट्रपति बने. उनकी जिंदगी संघर्षों की खुली किताब है. उन्होंने अपने जीवन में ऐसे उतार-चढाव देखे जिनके सामने मजबूत से मजबूत व्यक्ति भी घुटने टेक देता है लेकिन जो बाइडेन अलग हैं. उन्होंने सपने देखे भी और उसे पूरा भी किया. इस सफर में कई अपने बाइडेन का साथ छोड़ गए. कभी डिप्रेशन ने घेरा तो कभी सुसाइड करने का ख्याल आया. लेकिन हर मुश्किलों से पार पाकर उन्होंने कामयाबी का रास्ता तैयार किया.

बाइडेन को शुरु से ही पता था कि उन्हें क्या हासिल करना है. बाइडेन की बायोग्राफी लिखने वाले इवान ओसनॉस के मुताबिक हाईस्कूल पास करते ही बाइडेन ने अपनी जिंदगी की दिशा तय कर ली थी. ओसनॉस के मुताबिक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी को शपथ लेता देखकर बाइडेन ने सियासत में जाना तय कर लिया था. उन्होंने स्कूल की लाइब्रेरी में जाकर ये जानने की कोशिश की कि सीनेट में जाने के लिए किस तरह की ट्रेनिंग और बैकग्राउंड की जरुरत होती है. फिर कुछ साल बाद वो मौका भी आ गया जब उन्होंने अपना ये सपना पूरा कर लिया वो भी डेलावेयर की राजनीति के दिग्गज को हराकर.

1972 में महज 30 साल की उम्र में बाइडेन सीनेटर बने थे. सबसे कम उम्र में सीनेटर बनने वाले वे पांचवे शख्स थे. बाइडेन की जिंदगी की ये सबसे बड़ी खुशी थी लेकिन खुशियों का वो एहसास शोक के बादल से ढंक गया जब क्रिसमस के लिए जाते हुए सड़क दुर्घटना में उनकी पत्नी नीलिया और बेटी ऩाओमी की मौत हो गई और दोनों बेटे बीउ और हंटर बुरी तरह घायल हो गए.

इस हादसे ने बाइडेन को बुरी तरह तोड़ दिया. तब बाइडेन के जेहन में पहली और आखिरी बार आत्महत्या करने का खयाल आया लेकिन बुरे खयाल को उन्होंने निकाल फेंका. बाइडेन ने अपने बेटों के अस्पताल के कमरे से सीनेटर की शपथ ली. पांच सालों तक बाइडेन ने वैलेरी की मदद से अपने बेटों की देखभाल की. अपने बच्चों से मिलने के लिए बाइडेन रोज विलमिंगटन और वॉशिंगटन डीसी के बीच एमट्रैक ट्रेन से सफर करते थे. वो वाशिंगटन डीसी से 150 किलोमीटर दूर अपने दोनों बेटों को गुडनाइट किस देने के लिए पहुंच जाते थे. ग़मों ने उनका दूसरा इम्तिहान 1988 में लिया जब दो दो बार वो बुरी तरह बीमार पड़े और एक बार तो उनके चेहरे पर लकवे का असर भी हो गया.

बाइडेन की सियासी करियर भी आसान नहीं रहा है. बाइडेन अमेरिका के राष्ट्रपति बनने की रेस में कई बार शामिल हुए लेकिन उनकी किस्मत ने हर बार उनके साथ धोखा किया. साल 1988 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रचार शुरु किया लेकिन उन पर साहित्य चोरी का आरोप लग गया और उनकी उम्मीदवारी खारिज हो गई.

सुख और दुख बाइडेन की जिंदगी में साथ-साथ चलते रहे. कामयाबियों के लम्हे आए तो उसके साथ ही उनकी निजी जिंदगी में ऐसे तूफान भी जो मजबूत से मजबूत इरादों वाले व्यक्ति को तोड़ दे. जो बाइडेन जब अमेरिका के उपराष्ट्रपति बने तो उनके बेटे बीउ को ब्रेन कैंसर हो गया. 2015 में जब वो ओवल हाउस के अपने दफ्तर में बैठे रहते थे तो हमेशा ये टीस उनकी जुबान पर चढ़ जाती थी कि पता नहीं ह्वाइट हाउस में कभी जा भी पाएंगे या नहीं. 2015 में ही उनके बेटे बीउ की मौत हो गई.

इससे उपजे शोक में बाइडेन ने 2016 के चुनाव में डेमोक्रेट उम्मीदवार होने के लिए प्रयास ही नहीं किया. इस बीच उनके छोटे बेटे हंटर ने भी नशे की लत पकड़ ली और कोकीन के इस्तेमाल में पकड़े गए. 2015 का साल बाइडेन के लिए इतना बुरा था कि अमेरिका के पॉलिटिकल पंडितों ने बाइडेन को चूका हुआ मान लिया लेकिन उन्होंने हर बार चुनौतियों को अपना गुरु बनाया.

साल 2008 में उन्होंने फिर राष्ट्रपति बनने का प्रयास किया लेकिन तब अपनी पार्टी में ही बराक ओबामा की शख्सियत उनपर भारी पड़ी. ओबामा राष्ट्रपति बन गए लेकिन बाइडेन की ओबामा से दोस्ती और पेशेवर रिश्ते अद्भुत तरीके से बने रहे. 2015 में जब वो राष्ट्रपति की रेस से पीछे हट गए तो पंडितों ने अलविदा लेख लिख दिया. सबको लगा कि अब बाइडेन की बारी खत्म हो गई. लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से सभी को गलत साबित कर दिया.

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