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US में घिरे ट्रंप, अब्राहम लिंकन की जंग में लंबी तैनाती पर उठे सवाल

ईरान जंग के दौरान करीब 8 महीने से मिडिल-ईस्ट सैन्य अभियान में लिंकन युद्धपोत मदद कर रहा है, इस पर 5 हजार नाविक तैनात हैं. क्रू के लिए रहने की खराब स्थितियों और आराम न मिलने की खबरें सामने आ रही हैं.

यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध में वॉर शिप अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती के फैसले पर सवाल खड़े हो रहे हैं. डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने अमेरिकी प्रेसिडेंट को लताड़ लगाई है. समुद्र में साढ़े आठ महीने से ज्यादा समय बिताने के बाद क्रू के लिए रहने की खराब स्थितियों और आराम न मिलने की खबरें सामने आ रही हैं. यूएस-ईरान जंग के दौरान करीब 8 महीने से मिडिल-ईस्ट सैन्य अभियान में लिंकन युद्धपोत मदद कर रहा है, इस पर 5 हजार नाविक तैनात हैं.

कनेक्टिकट के डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और कार्यवाहक नौसेना सचिव हंग काओ को लिखे एक पत्र में जहाज पर बताई गई समस्याओं की एक सूची का जिक्र किया. उन्होंने समस्याओं के बारे में लिखा, 'बुनियादी सामान की कमी, पानी के दूषित होने, प्लंबिंग की दिक्कतों, बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य, डेक की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और डाक सेवा में रुकावट की व्यापक खबरें आई हैं.'

रिचर्ड ब्लूमेंथल ने उठाए सवाल 

उन्होंने आगे लिखा, 'इन रुकावटों की वजह से जहाज तक भेजे गए कई 'केयर पैकेज' महीनों तक रास्ते में ही खो गए.' इनमें से कई समस्याओं की रिपोर्ट पहले 'नेवी टाइम्स' और 'स्टार्स एंड स्ट्राइप्स' ने दी थी. ब्लूमेंथल ने कहा कि ट्रम्प प्रशासन ने वेनेजुएला के खिलाफ दबाव बनाने के अभियान और ईरान के साथ युद्ध के दौरान एयरक्राफ्ट कैरियर को सामान्य से कहीं ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रखा था.

 डेमोक्रेट सीनेटर ने ट्रंप पर साधा निशाना

एरिजोना के डेमोक्रेट सीनेटर रूबेन गैलेगो ने बुधवार (12 अगस्त) को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि वह सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लिए 'लिंकन' के दौरे की मांग कर रहे हैं. मरीन के तौर पर युद्ध में हिस्सा ले चुके गैलेगो ने कहा, 'डोनाल्ड ट्रम्प के उलट मैंने सक्रिय ड्यूटी देखी है. जिस तरह से वह इस गैर-कानूनी युद्ध को अंजाम देते हुए हमारे सर्विस मेंबर्स के साथ व्यवहार कर रहे हैं, वह न सिर्फ घिनौना है, बल्कि खतरनाक भी है.'

एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, नौसेना 'लिंकन' की जगह मिडिल-ईस्ट में एयरक्राफ्ट कैरियर 'जॉर्ज वाशिंगटन' भेज रही है. इस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर यह जानकारी दी, क्योंकि उन्हें जहाज के शेड्यूल के बारे में सार्वजनिक रूप से बात करने की इजाजत नहीं थी. युद्ध के शुरुआती दौर में लिंकन को खुद ईरान के हमलों का सामना करना पड़ा था.

ईरानी पोर्ट पर US नाकेबंदी में लिंकन ने की मदद

हेगसेथ ने 8 अप्रैल को पेंटागन में पत्रकारों से कहा, 'ईरान ने हमारे एयरक्राफ्ट कैरियर पर सैकड़ों मिसाइलें और वन-वे अटैक ड्रोन दागे. उन सभी हमलों को 'एबे लिंकन' से मीलों दूर ही आसानी से मार गिराया गया.' लिंकन ने ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी को लागू करने में भी मदद की है. यह नाकेबंदी शुरू में 13 अप्रैल से जून के मध्य में युद्धविराम समझौते की घोषणा तक चली और फिर 15 जुलाई को दोबारा शुरू हुई.

पहली नाकेबंदी के दौरान, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसकी सेनाओं ने गोलीबारी और मिसाइल हमलों के ज़रिए नौ "नियम न मानने वाले" जहाजों को बेकार कर दिया और 135 जहाजों का रास्ता बदल दिया, जिन्होंने आखिरकार नाकेबंदी के आदेश का पालन किया. दूसरी नाकेबंदी में, कॉमर्शियल जहाजों पर अमेरिकी हमले कम हुए हैं. 9 अगस्त को हालिया अपडेट में सेंट्रल कमांड ने कहा कि नाकेबंदी फिर से शुरू होने के बाद से उसने 55 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला है.

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लिंकन की जगह कौन लेगा?

लिंकन की जगह लेने वाला जहाज कब आएगा, यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन युद्धपोतों की आवाजाही पर बात करने के लिए नाम न बताने की शर्त पर जानकारी देने वाले एक दूसरे अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, 'जॉर्ज वाशिंगटन' हाल ही में मलक्का स्ट्रेट (इंडोनेशियाई जलक्षेत्र में प्रशांत महासागर का एक प्रमुख पारगमन मार्ग) से पश्चिम की ओर बढ़ा है. 

उधर, एडमिरल फ्रैंकन ने कहा कि नेवी के पास एयरक्राफ्ट कैरियर की सीमित संख्या है और उन्हें अक्सर उनके तय कार्यकाल से कई महीने ज़्यादा समय तक तैनात रहना पड़ता है, जिससे भविष्य में युद्ध अभियानों के लिए उनकी उपलब्धता सीमित हो जाएगी. उन्होंने कहा, 'मैं आपको गारंटी देता हूं कि ट्रम्प प्रशासन के पहले दो साल निश्चित रूप से ट्रम्प प्रशासन के अगले दो सालों को प्रभावित करेंगे.'

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नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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