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क्या भारत तक भी पहुंचेगा रेडिएशन... परमाणु युद्ध न हो तब भी तबाह हो सकती है दुनिया? ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम पर एक्सपर्ट का बड़ा खुलासा

एक्सपर्ट रफाएल ग्रोसी ने कहा कि इजरायल के हमले की वजह से न्यूक्लियर प्लांट की ऊपरी सतह को ही नुकसान पहुंचा है, लेकिन हो सकता है कि उस सेंट्रिफ्यूज को नुकसान पहुंचा हो, जो यूरेनियम को प्रोसेस करता है.

ईरान और इजरायल की इस जंग में दोनों ही देशों के शहर-दर-शहर खंडहर में तब्दील होते जा रहे हैं. इजरायल ईरान के परमाणु ठिकानों को बर्बाद करने पर तुला है तो ईरान इसका बदला लेने के लिए इजरायल की राजधानी तेल-अवीव को धुंआ-धुंआ करने पर आमादा है. इस जंग में अभी जो हथियार इस्तेमाल हो रहे हैं, वो पारंपरिक हथियार ही हैं. मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और फाइटर जेट्स. जब तक ये लड़ाई पारंपरिक हथियारों से लड़ी जाएगी, बर्बादी इन्हीं दोनों देशों में होगी, लेकिन खतरा इससे कहीं आगे का है. सबसे बड़ा खतरा ये है कि क्या जंग में परमाणु हथियार भी इस्तेमाल होंगे.

अगर परमाणु हथियार इस्तेमाल हुए तब तो दुनिया की तबाही तय है, लेकिन बिना परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के भी दुनिया बड़ी बर्बादी की ओर बढ़ रही है और उसकी वजह है न्यूक्लियर रेडिएशन, जो इजरायल के हमले के बाद ईरान में फैल सकती है और वहां से इसका असर पूरे मिडिल ईस्ट और फिर पूरी दुनिया पर भी पड़ सकता है. क्या है पूरी कहानी, बताएंगे विस्तार से. 

ईरान से जंग की शुरुआत का फैसला इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू का है.  नेतन्याहू ने ईरान में जितने भी हमले किए हैं, उसका निशाना ईरान के परमाणु संयंत्र हैं, जहां ईरान पिछले कई साल से परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है. इसमें भी ईरान का सबसे बड़ा ठिकाना है नेतांज, जहां पर इजरायल ने बड़ा हमला किया है और उसे पूरी तरह से तबाह-बर्बाद कर दिया है. इसके अलावा एक और परमाणु संयंत्र इस्फहान पर भी इजरायली फाइटर जेट्स ने हमला किया है. इसके बाद से ही पूरी दुनिया इस बात को लेकर चिंतित है कि नेतांज और इस्फहान प्लांट की तबाही की वजह से वहां जो यूरेनियम रखा हुआ है, उससे रेडिएशन न फैल जाए. और अगर ऐसा हुआ तो उस रेडिएशन की जद में सिर्फ ईरान ही नहीं, कम से कम पूरा मिडिल ईस्ट प्रभावित हो सकता है.

दुनियाभर के परमाणु हथियारों के जानकार इस बात की तस्दीक कर चुके हैं कि भले ही ईरान के पास अभी परमाणु हथियार न हों, लेकिन परमाणु हथियार बनाने का साजो-सामान तो ईरान जुटा ही चुका है. ऐसे में अगर ईरान के जुटाए हुए यूरेनियम से कोई रेडिएशन लीक होता है, तो फिर बिना परमाणु हमले के भी उतनी ही तबाही होगी, जितनी तबाही परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से होती है और जिसे जापान के उदाहरण से समझा जा सकता है.

ऐसे में वो बात चाहे यूरोपियन यूनियन की हो या फिर अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे किसी और पश्चिमी देश की, कोई भी सीधे तौर पर ईरान के यूरेनियम के जखीरे पर हथियारों से हमला करना नहीं चाहता है, जो इजरायल कर रहा है. सभी देश यही चाहते हैं ईरान परमाणु हथियार न बनाए और इसके लिए ईरान पर हमला कर उसे नहीं रोका जा सकता, बल्कि इसके लिए इकलौता सहारा डिप्लोमेसी का ही लेना होगा.

अमेरिका यही कर भी रहा था. ट्रंप की अगुवाई में अमेरिका और ईरान फिर से बातचीत की दिशा में आगे बढ़ ही रहे थे कि इजरायल ने हमला कर बातचीत के रास्ते ही बंद कर दिए. ट्रंप ने अपने विदेश मंत्री मार्को रूबियो से कहलवाया भी कि इजरायल के इस हमले में अमेरिका का कोई हाथ नहीं है इसके बावजूद ट्रंप इस बात से इनकार भी नहीं कर रहे हैं कि इजरायल जो कर रहा है, उसमें ट्रंप की सहमति है. वहीं ईरान कह रहा है कि उसका परमाणु हथियार जंग के लिए नहीं है, लेकिन ईरान की बात कोई मानने को तैयार नहीं है.

ऐसे में अब न तो ईरान पीछे हट रहा है और न ही इजरायल. वहीं इजरायली हमले के बाद इमरजेंसी मीटिंग में आईएईए यानी कि International Atomic Energy Agency के  Board of Governors में ये बात सामने आई है कि इजरायल के हमले के बाद भी नतांज और इस्फहान के बाहर रेडिएशन सामान्य है.

रेडिएशन सामान्य होने की रिपोर्ट के बावजूद यूनाइटेड नेशंस न्यूक्लियर वॉचडॉग के मुखिया रफाएल ग्रोसी ने जो कहा है, वो बहुत डरावना है.  उनका कहना है कि इजरायल के हमले की वजह से न्यूक्लियर प्लांट की ऊपरी सतह को ही नुकसान पहुंचा है और इसकी वजह से ही वहां की बिजली कट गई थी, लेकिन इस हमले में हो सकता है कि उस सेंट्रिफ्यूज को नुकसान पहुंचा हो, जो यूरेनियम को प्रोसेस करता है.

सेंट्रिफ्यूज के घूमने के दौरान यूरेनियम हेक्साफ्लुरोइड नाम की गैस रहती है, जो रासायनिक विकिरण की सबसे बड़ी वजह बन सकती है. ये गैस यूरेनियम और फ्लोरिन का मिश्रण होती है, जो भयंकर विस्फोटक है. इसकी वजह से त्वचा जल सकती है और अगर किसी के शरीर के अंदर गैस चली गई तो उसकी मौत हो सकती है.

नतांज प्लांट में बिजली कटौती की वजह से अगर ये गैस लीक हो गई हो तो उसके बारे में कुछ कह नहीं सकते हैं. अब चूंकि ईरान जंग के बीच में है, तो वहां से ठीक-ठीक जानकारी भी सामने नहीं आ पा रही है. इसकी वजह से पूरी दुनिया परेशान है और किसी को कुछ भी साफ-साफ पता नहीं चल पा रहा है कि ईरान के परमाणु संयंत्रों में फिलवक्त हो क्या रहा है. तो जो भी जानकारी हमारे पास आएगी, हम आपको तक पहुंचाएंगे.

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