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ट्रंप का 'डबल गेम': एक तरफ शांति की बात, दूसरी तरफ ईरान पर बमबारी, जानें जंग के 26वें दिन का अपडेट

Iran US War: ईरान ने अमेरिका की 15 शर्तों को खारिज करते हुए ट्र्ंप के सामने अपनी 5 शर्तें रख दी. तेहरान ने कहा है कि वो अपनी मर्जी से युद्ध तभी समाप्त करेगा, जब उसकी ये शर्तें पूरी होंगी.

मिडिल ईस्ट की जंग में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप फंसते नजर आ रहे हैं.  पुतिन और नेतन्याहू के बाद अब ईरानी सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई भी अब अमेरिकी राष्ट्रपति की रग-रग से वाकिफ हो चुके हैं, यहीं कारण है कि उन्होंने ट्रंप के डील को नकार दिया. युद्ध रोकने के लिए अमेरिका ने शर्तों के साथ बातचीत की पेशकश की, लेकिन इससे बम और बारूद बरसाने का ऑपरेशन कमजोर नहीं पड़ा है. इज़रायल हमले कर रहा है तो ईरान भी उसका जवाब दे रहा है. भीषण होते युद्ध से दुनिया में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है, लेकिन भारत सरकार ने देश से कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है, तेल-गैस की कोई कमी नहीं है.

ट्रंप नहीं हम करेंगे जंग का अंत: ईरान

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष माइक जॉनसन का कहना है कि अमेरिका 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' खत्म करने वाला है. जॉनसन ने कहा है कि हम जल्द ही ऑपरेशन को खत्म कर रहे हैं. हालांकि उन्होंने टाइम लाइन का जिक्र नहीं किया है. इससे पहले अमेरिका की 15 शर्तों को ईरान ने खारिज कर दिया है. इसके बदले ईरान ने अपनी 5 शर्तें रख दी हैं. ईरानी मीडिया के मुताबिक तेहरान ने कह दिया है कि वो अपनी मर्जी से युद्ध तभी समाप्त करेगा, जब उसकी ये शर्तें पूरी होंगी. ईरान ने साफ कह दिया है कि वो अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को युद्ध की समाप्ति का समय तय करने की अनुमति नहीं देगा.

ईरान की युद्ध खत्म करने की 5 शर्तें

1. दुश्मन की आक्रामकता और हत्याओं को पूरी तरह रोका जाए.

2. पक्की गारंटी दी जाए कि ईरान पर फिर से युद्ध नहीं थोपा जाएगा.

3. युद्ध के नुकसान का मुआवजा मिले.

4. हर मोर्चे पर युद्ध खत्म किया जाए.

5. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान के अधिकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिले.

15-सूत्रीय युद्धविराम की शर्तों को ईरान ने खारिज किया

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने ईरान को 15-सूत्रीय युद्धविराम योजना की पेशकश की है, जिसमें सभी परमाणु सविधाओं को खत्म करना, यूरेनियम स्टॉक बाहर भेजने, परमाणु हथियार कभी नहीं बनाने, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का जिक्र है. हालांकि ईरान ने ये सभी 15 शर्तें खारिज कर दी हैं.

वैसे ट्रंप के दावों पर यकीन करें तो ईरान किसी भी कीमत पर ये युद्ध खत्म करना चाहता है. हालांकि ट्रंप के दावों के उलट ईरान में ऐसी कोई बेसब्री नहीं दिखती, बल्कि ईरान आराम से अपनी मिसाइलों का पिटारा खोल रहा है. इजरायल और गल्फ में अमेरिकी अड्डों पर अब भी पूरी ताकत से हमले कर रहा है. ईरान का रवैया बताता है कि न उसे बातचीत की जल्दी है ना ही युद्धविराम की.

ईरान को ट्रंप पर भरोसा नहीं

ट्रंप किससे और कहां बातचीत कर रहे हैं उसके बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं, लेकिन रोज वो इस बातचीत का अपडेट देते हैं और एक नया शिगूफा छोड़कर अपनी जीत का एलान कर देते हैं. दूसरी तरफ ईरान साफ-साफ कह रहा है कि उसे ट्र्ंप पर भरोसा नहीं है. ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जोल्फगारी ने कहा, 'ट्रंप का बातचीत का दावा झूठा है. ट्रंप डील का ख्याली पुलाव पका रहे हैं...पकाने दो...हम लड़ाई लड़ेंगे. जिस रणनीतिक ताकत की अमेरिका बात करता था वो नाकामयाब रही है. जो खुद को सुपर पावर कहता है अगर उसके बस में होता तो वो अब तक इस मुश्किल से निकल चुका होता. अपनी हार को समझौते का नाम मत दीजिए.'

क्यों अमेरिका पर भरोसा नहीं कर रहा ईरान?

मतलब साफ है कि ईरान को ट्रंप के वादों पर भरोसा नहीं है और इसके पीछे कई वजहें हैं. जून 2025 में ट्रंप ने ईरान को बातचीत का न्योता देकर उसके परमाणु ठिकानों पर अटैक कर दिया. 28 फरवरी को ईरान पर हमला करने से पहले ट्रंप की टीम ईरान से दो दौर की बातचीत कर चुकी थी. 25 फरवरी को अमेरिका-ईरान की जिनेवा में बैठक खत्म हुई थी, जिसमें तय हुआ था कि अगले दौर की बातचीत होगी, लेकिन अमेरिका ने 3 दिन बाद ही हमला कर दिया.

मिडिल ईस्ट में सेना बढ़ाने की तैयारी कर रहा यूएस

दूसरी वजह है मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैनिकों की बढ़ती तैनाती. हजारों पैदल सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजा जा रहा है. पेंटागन ने 5 हजार मरीन्स वाली दो मरीन यूनिट्स को भी तैनात कर रहा है. कई फाइटर जेट स्क्वाड्रन को भी वॉर ग्राउंड पर भेजा जा रहा है. अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा, 'हम बमों से समझौता करते हैं. आपके पास विकल्प है कि हम तेहरान के ऊपर बम गिराएं जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा.' पीट हेगसेथ की इस धमकी में ट्रंप की रजामंदी है. जाहिर है ट्रंप ताकत के जोर पर ईरान को झुकाना चाहते हैं. बम के जोर पर बातचीत करना चाहते हैं और यही वजह है कि ईरान को ट्रंप का न्योता छलावा लग रहा है.

डबल क्रॉस कर रहे ट्रंप?

ऐसे में सवाल है कि ट्रंप क्यों सवालों में हैं? ट्रंप की बात पर भरोसा ना करने की पुख्ता वजह हैं. मीडिया में कहा जा रहा है कि ट्रंप डबल क्रॉस कर रहे हैं और ये डबल क्रॉस के आरोप हवा में नहीं हैं. ट्रंप के डबल क्रॉस को लेकर 4 थ्योरी सामने आ रही हैं.

- डबल क्रॉस को पुख्ता करने वाली पहली थ्योरी तो यही है कि बातचीत के दावे के बीच हमले जारी हैं. बम अब भी बरस रहे हैं.

- दूसरी डबल क्रॉस थ्योरी ये है कि युद्धविराम का संदेश ट्रंप ने दे तो दिया, लेकिन समंदर से लेकर जमीन तक अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति बढ़ा रहा है. सैनिकों का मूवमेंट कम नहीं होने दिया है.

- तीसरी थ्योरी उस सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर है जिसमें ट्रंप ने हमले नहीं करने का जिक्र किया और तेल के भाव इंटरनेशनल मार्केट में गिर गये. बाजार चढ़ा, लेकिन इस पोस्ट से महज 15 मिनट पहले एक ऑयल डील सवालों में है.

- चौथी थ्योरी ये कही जा रही है कि ट्रंप ने जिस पाकिस्तान को मिडिएटर चुना था असल में वो पाकिस्तान, ईरान के दुश्मन सऊदी का सैन्य सहयोगी है. कई रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया था कि सऊदी प्रिंस के कहने पर ही अमेरिका ने ईरान पर हमले किये थे.

ट्रंप युद्धविराम के सारे फॉर्मूले अपने हिसाब से पेश कर रहे हैं जबकि बातचीत और समझौते के लिये दोनों पक्षों का राजी होना जरूरी होता है. यहां ईरान ट्रंप के हर हां का जवाब ना में दे रहा है.

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