'अरुणाचल प्रदेश में चीन की गहरी रुचि', अमेरिकी रिपोर्ट में इसको लेकर क्या-क्या कहा गया?
अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत और चीन में फिर से तनाव उभरता दिख रहा है. अमेरिकी पेंटागन की हालिया रिपोर्ट में इसे लेकर चौंकाने वाले दावे किए गए हैं.

भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी (अंतर्राष्ट्रीय नियंत्रण रेखा) पर भले ही सीमा विवाद को समाप्त कर दिया हो, लेकिन आने वाले सालों में एक और विवाद की आशंका बनी हुई है. अमेरिकी पेंटागन की हालिया रिपोर्ट के अनुसार चीन ने ताइवान के साथ-साथ अरुणाचल प्रदेश पर भी अपना दावा जताया है और इसे अपने मुख्य हितों में शामिल बताया है.
पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि पूर्वोत्तर का ये राज्य नई दिल्ली-बीजिंग संबंधों में एक प्रमुख तनाव का केंद्र बन सकता है. अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि अरुणाचल प्रदेश, ताइवान और दक्षिण चीन सागर चीन के लिए बहुत मायने रखते हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि देश को फिर से महान बनाने के लिए चीन का लक्ष्य लड़ने और जीतने में सक्षम विश्व स्तरीय सैन्य शक्ति का निर्माण करना है. भारत ने हमेशा यह कहा है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न अंग था है और हमेशा रहेगा.
अरुणाचल को लेकर फिर से तनाव उभरा
पिछले साल भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी (अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण रेखा) को लेकर सैनिकों की वापसी के मकसद से एक समझौता किया था. हालांकि, कई महीनों की शांति के बाद हाल ही में अरुणाचल प्रदेश को लेकर तनाव फिर से उभर आया है. पिछले महीने लंदन से जापान जा रही भारतीय नागरिक प्रेमा थोंगडोक को शंघाई में ठहराव के दौरान 18 घंटे तक हिरासत में रखा गया.
अरुणाचल में जन्मी महिला को चीन ने लिया था हिरासत में
थोंगडोक ने बताया था कि चीनी अधिकारियों ने दावा किया कि उनका पासपोर्ट अमान्य था क्योंकि उसमें उनके जन्मस्थान के रूप में अरुणाचल प्रदेश लिखा था. आखिरकार ब्रिटेन में रहने वाली एक दोस्त के जरिए शंघाई स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क करने के बाद वो अपनी यात्रा फिर से शुरू करने में कामयाब रहीं.
इसी सप्ताह की शुरुआत में एक भारतीय यूट्यूबर को चीन में हिरासत में लिया गया, क्योंकि उसने थोंगडोक के समर्थन में बनाए गए अपने वीडियो में अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न अंग बताया था.
मैकमोहन रेखा नहीं मानता चीन
बीजिंग अरुणाचल प्रदेश को चीन का हिस्सा मानता है और इस क्षेत्र को दक्षिणी तिब्बत या ज़ांगनान कहता है. ऐसा इसलिए क्योंकि चीन 1914 में अंग्रेजों द्वारा खींची गई मैकमोहन रेखा को स्वीकार नहीं करता है. बता दें कि इस सीमा को लेकर ब्रिटेन और तत्कालीन स्वतंत्र तिब्बत के बीच सहमति बनी थी.
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Source: IOCL





















