पाकिस्तान उपचुनाव नतीजे: PM बनने के 2 महीनों के भीतर इमरान के पैरों के नीचे से खिसकी जमीन
पाकिस्तान में हुए उपचुनावों में इमरान खान की पार्टी को करारा झटका देते हुए पूर्व पीएम नवाज शरीफ की पार्टी ने 11 लोकसभा सीटें जीत ली हैं.

इस्लामाबाद: पाकिस्तान में हुए उपचुनावों में चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं. इन नतीजों में देश के पूर्व पीएम नवाज शरीफ की पार्टी ने वर्तमान पीएम इमरान खान की पार्टी को करारा झटका देते हुए 11 लोकसभा सीटें जीत ली हैं. नवाज की पुख्ता जीत का अंदाज़ा आप इस बात से लगा सकते हैं कि इमरान ने जो दो सीटें खाली की थीं उनमें से लाहौर की एक सीट नवाज की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज (पीएमएल- एन) ने जीत ली है. इस सीट पर एक और पूर्व पीएम शाहिद खाकान अब्बासी को जीत मिली है. वहीं, इमरान द्वारा खाली की गई बन्नु की एक और सीट पर मुत्ताहिदा मजलिस अमल पार्टी के जाहिद अकरम दुर्रानी को जीत मिली है.
वैसे तो उपचुनाव के इन नतीजों से केंद्र या राज्य सरकारों के स्थायित्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा लेकिन ये नतीजे विपक्षियों पार्टियों में नई जान फूंकने वाले साबित होंगे. जो उपचुनाव हुए वो नेशनल असेंबली (लोकसभा के निचला सदन) की 11 सीटों पर और 24 क्षेत्रीय सीटों पर हुए. परिणाम से साफ है कि इसमें इमरान खान की पीटीआई और मुख्य विपक्षी पार्टी पीएमएल-एन के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली.
पाकिस्तान चुनाव आयोग के मुताबिक नेशनल असेंबली के चुनावों में पीएमएल-एन और पीटीआई दोनों को ही चार-चार सीटें हासिल हुईं. वहीं, पाकिस्तान मुस्लिम लीग क्यू को दो सीटें हासिल हुईं और मुत्ताहिदा मजलिस अमल को एक सीट हासिल हुई. क्षेत्रीय चुनावों में पीटीआई को 11 और पीएमएल- एन को सात सीटें हासिल हुईं और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) को दो और अवामी नेशनल लीग को दो सीटें हासिल हुईं. वहीं, दो सीटें स्वतंत्र उम्मीदवार ने अपने हिस्से कीं.
आपको बता दें कि इमरान खान इसी साल अगस्त महीने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने हैं. सत्ताविरोधी लहर और पूर्व पीएम नवाज के भ्रष्टाचार के आरोपों में जेल जाने जैसी बातों का फायदा उठाकर उनकी पार्टी पाकिस्तान में हुए आम चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. हालांकि, सत्ता पाने के बाद इरमान अपने देश के लिए दर-दर जाकर बेलआउट मांगने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान का विदेशी पूंजी भंडार एक बार फिर समाप्त होने की कगार पर है. ऐसे में उनके पैरों के नीचे से खिसकता जनमत उनकी नई नवेली सरकार के लिए कोई अच्छी खबर नहीं है.
ये भी देखें
व्यक्ति विशेष: #MeToo के आरोपों पर एम जे अकबर
Source: IOCL
























