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एक अफवाह और हजारों लोगों का सैलाब, क्यों यूरोप का नया फ्लैशपॉइंट बना स्पेन का स्यूटा?

मोरक्को में बेरोजगारी, आर्थिक तंगी काफी है, ऐसे में इस गलत खबर के फैलते ही बेहतर भविष्य की चाह में हजारों लोग जोखिम उठाने के लिए प्रेरित हो गए.

स्पेन के उत्तरी अफ्रीका में स्थित छोटा सा शहर स्यूटा (Ceuta) इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा में है. हाल ही में हजारों प्रवासियों की अचानक आमद ने पूरे यूरोप को हिला दिया.यह मामला केवल सीमा पार करने वाले एक बड़े मानवीय समूह का नहीं है. बल्कि यह घटना बताती है कि कैसे सोशल मीडिया से फैली एक गलत जानकारी अफरातफरी फैला सकती है. इसके साथ ही इस घटना ने यूरोप की सख्त प्रवासन नीति और राजनीतिक तनाव को भी उजागर कर दिया है. 

आखिर हुआ क्या?

हुआ यूं कि महज कुछ ही घंटों में करीब 72,000 लोग मोरक्को से स्यूटा की सीमा में घुसने की कोशिश करने लगे. लोग जैसे-तैसे वहां पहुंच रहे थे. कोई समुद्र में तैरकर तो कोई मीलो चलकर पहुंचा था.इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहंचने की वजह से अफरातफरी मची और में कम से कम 88 लोगों की मौत हो गई. हालांकि अधिकांश लोग बाद में मोरक्को वापस लौट गए, लेकिन इस घटना ने पूरे यूरोप में प्रवासन को लेकर नई बहस छेड़ दी.


एक अफवाह और हजारों लोगों का सैलाब, क्यों यूरोप का नया फ्लैशपॉइंट बना स्पेन का स्यूटा?

इतनी बड़ी संख्या में लोग क्यों निकले

गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार इसके पीछे कई कारण हैं कि आखिर एक साथ इतने लोग क्यों निकले. दरअसल मुख्य कारण था सोशल मीडिया पर फैली वो अफवाह जिसमें कहा गया कि स्पेन की सीमा खुल गई है और वहां पहुंचने वालों को यूरोप में रहने का मौका मिल जाएगा. यह सब इसलिए हुआ क्योंकि स्पेन की एक अदालत ने एक फैसला सुनाया जिसकी सोशल मीडिया पर गलत व्याख्या की गई और लोगों में भ्रम की स्थिति फैली. कोर्ट के फैसले को तस्करों द्वारा टिक टॉक और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर गलत तरीके से फैलाया गया, जिससे यह अफवाह उड़ी कि स्यूता पहुंचने वाले लोगों को स्पेन में रहने की अनुमति मिल जाएगी.

इसके अलावा एक कारण यह भी है कि मोरक्को में बेरोजगारी, आर्थिक तंगी काफी है, ऐसे में इस गलत खबर के फैलते ही बेहतर भविष्य की चाह में हजारों लोग जोखिम उठाने के लिए प्रेरित हो गए.

यह सब तब हुआ जब 2015 के शरणार्थी संकट के बाद यूरोप ने अपनी सीमाओं को लगातार सख्त किया है. आलोचकों का तर्क है कि इन नीतियों से प्रवासन बंद नहीं हुआ, बल्कि लोग और अधिक खतरनाक रास्ते अपनाने को मजबूर हुए, जिससे मानवीय त्रासदियां बढ़ीं.

मोरक्को क्यों हुआ नाराज? 
क्या मोरक्को ने जानबूझकर सीमा सुरक्षा में ढील दी ये सवाल बार-बार उठ रहा है. इस घटना से ठीक पहले स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने दीर्घकालिक गैस आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए अल्जीरिया का दौरा किया था. अल्जीरिया स्पेन को उसकी प्राकृतिक गैस का एक तिहाई हिस्सा देता है, जिससे मोरक्को नाराज है.

एक और वजह जिससे मोरक्को नाराज है वो ये है कि स्पेनिश पीएम ने अपनी इस यात्रा के दौरान पश्चिमी सहारा पर मोरक्को के दावे का समर्थन नहीं दोहराया. मोरक्को को लगा कि स्पेन अब अल्जीरिया के करीब जा रहा है और उसने इसके जवाब में यह कूटनीतिक कदम उठाया.


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साल 2021 की यादें भी अहम
क्या मोरक्को ने सीमा सुरक्षा में ढील दी? यह सवाल इसलिए भी उठ रहा है क्योंकि ऐसा मोरक्को पहले कर चुका है. मई 2021 में भी स्पेन द्वारा पोलिसारियो फ्रंट के नेता को कोरोना इलाज के लिए शरण देने पर मोरक्को ने बॉर्डर ढीले कर दिए थे, जिससे 8000 लोग स्यूता में घुस आए थे. उस वक्त यह विवाद तब थमा जब स्पेन ने मोरक्को के पक्ष का समर्थन किया था.

क्या इसमें है अमेरिका और इजराइल का एंगल 
आपको बता दें कि हमास के इजरायल पर हमले के बाद जिस तरह से इजरायली सेना ने गाजा में सैन्य कार्यवाही की उसका स्पेन बड़ा आलोचक रहा है. वो मुखरता से शुरुआत से ही सैन्य कार्यवाही को गलत करार दे रहा है. स्पेन ने 2024 में ही फलिस्तीन को देश के रूप में मान्यता दी थी और इजराइली नेतृत्व की आलोचना की थी. इन कारणों से इजरायल स्पेन से नाराज है. 

वहीं अगर अमेरिका की बात करें तो नाटो सदस्य होने के बावजूद स्पेन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियानों का समर्थन करने से इनकार कर दिया था. ऐसे में मोरक्को के साथ मिलकर इजरायल-अमेरिका स्पेन से पुराना हिसाब चुकता करना चाहते हैं. ऐसी बातें भी चल रही है.

राजनीतिक फायदा भी उठाया गया

घटना के तुरंत बाद कई दक्षिणपंथी नेताओं ने इसे "यूरोप पर हमला" या "आक्रमण" बताकर कड़ी सीमा सुरक्षा की मांग शुरू कर दी.  ऐसी घटनाओं का इस्तेमाल अक्सर प्रवासन पर कठोर राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है, जबकि वास्तविक मानवीय संकट पीछे छूट जाता है.

संकल्प ठाकुर पिछले 10 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत न्यूज़ 24 से की, इसके बाद न्यूज़ नेशन में कार्य किया. वर्तमान में वह एबीपी हिंदी डिजिटल में डिप्टी प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं और पिछले सात वर्षों से संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं. उन्हें खेल, अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और चुनावी राजनीति से जुड़ी खबरों की गहरी समझ है. इसके अलावा साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े विषयों पर लेखन उनकी विशेष रुचि और विशेषज्ञता का क्षेत्र है. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी साहित्य में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है.

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