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Explained: चीन के लिए क्यों सिरदर्द बनी हैं नैंसी पोलेसी, जानें किस बात का है डर

Nancy Pelosi Taiwan Visit: अमेरिका की वरिष्ठ राजनयिक नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा पर आखिर चीन को क्यों परेशानी हो रही है, आखिर ड्रैगन को नैंसी से क्यों दिक्कत हैं, आइये जानते हैं विस्तार में.

China problem with Nancy Pelosi: अमेरिकी संसद की स्पीकर नैंसी पेलोसी (Nancy Pelosi) की ताइवान (Taiwan) यात्रा से पहले ही चीन ने अमेरिका (America) से कह दिया था कि वह आग से न खेले. चीन की चेतावनी को नजर अंदाज करते हुए नैंसी पेलोसी ताइवान पहुंच गईं. ताइवान को लेकर अमेरिकी रुख से चीन बुरी तरह बौखलाया हुआ है. बुधवार की सुबह चीन में अमेरिकी राजदूत (US Ambassador) को बुलाकर फिर से चेताया गया कि नैंसी पेलोसी आग से खेल रही हैं और अमेरिका को इसका खामियाजा जरूर भुगतना चाहिए.

वहीं, पेलोसी के ताइवान में कदम रखते ही चीन द्वीपीय देश के चारों ओर समंदर और आसमान में युद्धाभ्यास (PLA War Drill) के लिए सेना को उतार दिया. कहा जा रहा है कि इस युद्धाभ्यास (Chinese Army War Exercise) की वजह से नैंसी पेलोसी के विमान को दक्षिण कोरिया (South Korea) के लिए उड़ान भरने में दिक्कत आ सकती है. आखिर चीन को नैंसी पेलोसी से इतनी दिक्कत क्यों है, आइये जानते हैं.

पेलोसी से पहले करीब 25 वर्षों में किसी भी अमेरिकी राजनयिक ने ताइवान की उच्च स्तरीय यात्रा नहीं की है. नैंसी पेलोसी अमेरिका में एक वरिष्ठ राजनेता हैं और वर्षों से कई मोर्चों पर चीन की आलोचना करती आ रही हैं. अमेरिका ने 1970 से वन चाइना पॉलिसी को मान्यता दे रखी है, जिसके तहत ताइवान चीन का हिस्सा माना जाता है लेकिन पीठ पीछे वह इस द्वीपीय देश के साथ अनौपचारिक संबंध और रणनीति रखता है. चीन को लगता है कि वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक की ताइवान में उपस्थिति अमेरिकी की ओर से द्वीपीय देश की स्वतंत्रता के लिए किसी प्रकार की मदद को इंगित करती है. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियांह ने पेलोसी की यात्रा से पहले कहा था कि अगर वह ताइवान जाएंगी तो चीन दृढ़ और कड़े कदम उठाएगा. उन्होंने कहा था, ''नैंसी पेलोसी का ताइवान जाना "चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को गंभीर रूप से कमजोर करेगा, इससे चीन-अमेरिका संबंधों की बुनियाद पर गहरा असर पड़ेगा और ताइवान के स्वतंत्रता बलों को गंभीर रूप से गलत संकेत भेजेगा.''

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पेलोसी से चीन को क्या दिक्कत है?

नैंसी पेलोसी मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए चीन की लगातार आलोचना करती रही हैं. वह पिछले लगभग तीन दशकों से मानवाधिकारों की वकालत करती आई हैं. स्पीकर पेलोसी की वेबसाइट पर एक सेक्शन हैं, जिसका नाम 'ए पावरफुर वॉयस फॉर ह्यूमन राइट्स इन चाइना' है. इसमें चीन की कम्युनिस्ट पार्टी मानवाधिकारों को कुचलने वाला करार दिया गया है. 

1991 में पेलोसी और अन्य नेताओं ने चीन की यात्रा कर वहां प्रदर्शन किया था. त्यानआनमेन चौक पर दो वर्षों तक हिंसा के विरोध में उन्होंने एक बैनर दिखाया था, जिसमें लिखा, ''चीन में लोकतंत्र के लिए मारे गए लोगों के लिए प्रदर्शन.'' 2002 में चीन के उपराष्ट्रपति हू जिंताओ जब अमेरिका आए तो नैंसी पेलोसी ने कांग्रेस के सदस्यों की ओर से मानवाधिकारों को लेकर उन्हें चार पत्र सौंपने चाहे, जिन्हें लेने से उन्होंने इनकार कर दिया था. 2009 में पेलोसी चीन गईं और अपने हाथ से उन्होंने राष्ट्रपति हू को राजनीति बंदियों की रिहाई मांगने वाला पत्र दिया था. 

चीन ने जब विश्व व्यापार संगठन में शामिल होने के लिए याचिका दायर की तो अमेरिकी कानून के मुताबिक, उसके स्पष्ट समर्थन पर ही  ऐसा हो सकता था. उस समय अमेरिकी कानून का नेतृत्व नैंसी पेलोसी ने किया था. नैंसी पेलोसी ने तिब्बत का मुद्दा भी उठाया था. 

2007 में दलाई लामा के साथ दशकों पुराना दोस्ती के चलते उन्होंने धर्मगुरु को कांग्रेस का स्वर्ण पदक दिया था और उनकी वेबसाइट ने आजादी का लड़ाई में दलाई लामा के नेतृ्त्व को नमन किया था. नवंबर 2015 में नैंसी पेलोसी ने तिब्बत में अमेरिकी कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था और तिब्बती छात्रों और नेताओं से मुलाकात कर तिब्बती स्वायत्तता, वहां की भाषा, संस्कृति और धर्म के संरक्षण की वकालत की थी. इन्हीं वजहों से चीन को पेलोसी से हमेशा दिक्कत रहती है.

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