बांग्लादेश में वोटिंग से 48 घंटे पहले एक और हिंदू की हत्या, 62 साल के कारोबारी को दुकान में घुसकर मार डाला
Bangladesh Hindu Murder: हमलावर ने हिंदु शख्स की हत्या कर उसके दुकान का शटर बंद कर दिया और मौके से फरार हो गया. पीड़ित परिवार के अनुसार बदमाशों ने कई लाख बांग्लादेशी टका भी लूटा.

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को चुनाव होने वाले हैं, लेकिन उससे पहले हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में कोई कमी नहीं आई है. बांग्लादेश में आम चुनाव से 48 घंटे पहले मैमनसिंह जिले के त्रिशाल उपजिला में एक और हिंदू कारोबारी की हत्या कर दी गई. मृतक की पहचान 62 साल के सुशेन चंद्र सरकार के तौर पर हुई है, जो त्रिशाल में एमएस. भाई-भाई एंटरप्राइजेज नाम का बिजनेस चलाते थे. मृतक के परिवार ने आरोप लगाया कि बदमाश कई लाख बांग्लादेशी टका भी लूट कर ले गए.
दुकान का शटर बंद कर हिंदू कारोबारी को मार डाला
बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट आईटीवी ने पीड़ित के परिवार और पुलिस के हवाले से बताया, 'बदमाशों ने उपजिले के बोगर बाजार चौराहे पर सरकार को एक धारदार हथियार से काटकर मार डाला और दुकान का शटर बंद करके उसे अंदर छोड़ दिया. बाद में परिवार वालों ने उसे खून से लथपथ हालत में देखा और उसे मैमनसिंह मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल ले गए, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
मृतक के बेटे सुजान सरकार ने बताया, 'हमारे साथ किसी की कोई दुश्मनी नहीं थी. मेरे पिता को बेरहमी से मारने के बाद बदमाश दुकान से कई लाख टका लूट लिए. हमारा चावल का बिजनेस लंबे समय से चल रहा था. हम इन हत्यारों के लिए कड़ी सजा की मांग करते हैं.'
खून से लथपथ पाए गए हिंदू कारोबारी: पुलिस
पुलिस ने कहा, 'बदमाशों ने रात करीब 11 बजे उन्हें (सुशेन चंद्र सरकार) एक धारदार हथियार से हमला कर मार डाला और फिर दुकान का शटर बंद कर दिया. परिवार वालों ने तलाशी के दौरान शटर खोला और उन्हें खून से लथपथ पाया. बाद में, सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके का मुआयना किया. इस बारे में कानूनी कार्रवाई की जा रही है.'
बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को चुनाव होने वाले हैं, लेकिन उससे पहले हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में कोई कमी नहीं आई है. बांग्लादेश में आम चुनाव से 48 घंटे पहले एक और हिंदू व्यापारी की हत्या कर दी गई. बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के सत्ता पर काबिज होने के साथ ही हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा बढ़ी है, जिससे दुनिया भर के लोगों और कई मानवाधिकार संगठनों में गुस्सा है.
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