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दुनिया के 7 देश जिनकी जनसंख्या में हो रहा बदलाव, कोई ज्यादा तो कोई कम आबादी से परेशान

जहां एक ओर कई देश बढ़ती आबादी से चिंतित है तो वहीं कई देश ऐसे भी जो प्रजनन दर के कम होने से परेशान है. एक अध्ययन के मुताबिक इस सदी के अंत तक कई देशों की जनसंख्या में कमी आ जाएगी.

जनसंख्या विस्फोट पर चर्चा आपने कई बार सुनी होगी. भारत सहित कई देश अपने यहां आबादी कम करने की कोशिशों में जुटे हैं. हालांकि कुछ देश अपने यहां कम हो रही प्रजनन दर से परेशान भी है.  हाल ही में मेडिकल जर्नल लैंसेट में एक अध्ययन में कहा गया कि दुनिया में फर्टिलिटी रेट कम रहा है. हम आपको दुनिया के ऐसे 7 देशों के बारे में बताने जा रहे हैं जहां की जनसंख्या में नाटकीय बदलाव आ रहे हैं.

जापान लैंसेट में छपी रिपोर्ट कहती है कि इस सदी के आखिर तक जापान की जनसंख्या आधी हो जाएगी. बता दें 2017 की जनगणना के अनुसार जापान की जनसंख्या थी 12 करोड़ 80 लाख. अनुमान है कि इस शताब्दी के आखिर तक जनसंख्या पांच करोड़ 30 लाख होगी.

जापान को जनसंख्या के हिसाब से दुनिया का सबसे बुजुर्ग देश माना जाता है. 100 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की संख्या भी सबसे ज्यादा जापान में ही है. जापान में काम करने की क्षमता रखने वालों की संख्या में लगातार घट रही है.

सरकारी अनुमान के अनुसार साल 2040 तक जापान में बुजुर्गों की आबादी 35 फीसदी से ज्यादा हो जाएगी. जापान में प्रजनन दर केवल 1.4 फीसदी है यानी जापान में एक महिला औसतन 1.4 बच्चे को जन्म देती है. किसी भी देश में उसकी मौजूदा जनसंख्या को बरकरार रखने के लिए जरूरी है कि उस देश का प्रजनन दर 2.1 से कम ना हो.

इटली लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक इस सदी के के आखिर तक इटली की जनसंख्या दो करोड़ 80 लाख रह जाएगी. 2017 की इटली की जनसंख्या 6 करोड़ 10 लाख थी.

इटली में भी बुजुर्गों की संख्या काफी है. 2019 के विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार इटली में 65 साल से अधिक उम्र के लोग कुल जनसंख्या के 23 फीसदी हैं.

इटली की सरकार ने 2015 में प्रजनन दर बढ़ाने के लिए एक योजना शुरू की थी. इस योजना के तहत हर जोड़े को एक बच्चा होने पर सरकार की तरफ से 725 पाउंड यानी करीब 69 हजार रुपये मिलते हैं. हालांकि इसका कोई खास फर्क नहीं पड़ा. यूरोपीय संघ में इटली की प्रजनन दर सबसे कम है.

चीन यह अपने में हैरान करने वाली बात है कि दुनिया की सबसे ज्यादा आबादी वाला चीन आज जन्म-दर में हो रही कमी से जूझ रहा है. चीन ने कभी अपने यहां बढ़ती आबादी पर काबू करने के लिए देखते 1979 में हुए 'वन चाइल्ड' की योजना शुरू की थी.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2019 में पिछले 70 सालों में चीन का जन्म दर सबसे निचले स्तर पर आ गया. लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार अगले चार साल में चीन की आबादी एक अरब 40 करोड़ हो जाएगी लेकिन सदी के आखिर तक चीन की आबादी घटकर करीब 73 करोड़ हो जाएगी.

चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, इसलिए चीन में जो कुछ होगा उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. चीन में भी बुजुर्गों की आबादी बढ़ रही है. इस बात की चिंता चीनी सरकार को भी है. सरकार ने साल 2015 में एक बच्चे की नीति बंद कर दी और कपल को दो बच्चे पैदा करने की इजाजत दे दी. सरकार के इस फैसले से जन्म-दर में थोड़ी बढ़ी लेकिन लंबे समय में ये योजना भी बढ़ती बुजुर्ग आबादी को रोकने में पूरी तरह सफल नहीं हो सकी.

ईरान ईरान की आबादी भी सदी के अंत तक कम हो जाने का अनुमान है. ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने पिछले महीने चेतावनी दी थी कि ईरान में सालाना जनसंख्या वृद्धि दर एक फीसदी से भी कम हो गई है. मंत्रालय का कहना है कि अगर इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई तो अगले 30 सालों में ईरान दुनिया से सबसे बुजुर्ग देशों में एक हो जाएगा.

बताया जा रहा है कि ईरान में लोग शादी कम कर रहे हैं और जो शादी-शुदा हैं उनके यहां भी बच्चों के जन्म में कमी देखी जा रही है. माना जा रहा है कि आर्थिक परेशानी के कारण लोग ऐसा कर रहे हैं.

1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद वहां की आबादी बढ़ी लेकिन ईरान ने जल्द ही अपने यहां बहुत ही प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण नीति को लागू कर दिया. ईरान ने पिछले महीने अपनी जनसंख्या बढ़ाने का फैसला किया जिसके तहत सरकारी अस्पतालों और मेडिकल केंद्रों में पुरुषों की नसबंदी नहीं की जाएगी और गर्भनिरोधक दवाएं भी सिर्फ उन्हीं महिलाओं को दी जाएंगी, जिनको स्वास्थ्य कारणों से उन्हें लेना जरूरी होगा.

ब्राजील ब्राजील में भी प्रजनन दर घट रही है. 1960 में ब्राजील में प्रजनन दर 6.3 थी जो हाल के दिनों में घटकर केवल 1.7 रह गई है. लैंसेट की रिपोर्ट बताती है कि ब्राजील की आबादी 2017 में 21 करोड़ थी जो 2100 में घटकर 16 करोड़ के करीब हो जाएगी.

हालांकि ब्राजील में जन्म-दर में लगातार कमी आ रही है लेकिन वहां किशोरों में बढ़ती प्रेगनेंसी एक नई समस्या बन गई है. सरकार ने इस पर काबू पान के लिए एक कैंपेन शुरू किया है, जिसका टैगलाइन है, 'किशोरावस्था पहले, गर्भावस्था बाद में'

भारत भारत साल 2100 तक चीन को पीछे करते हुए दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बन जाएगा. लेकिन लैंसेट के अध्ययन के मुताबिक इस सदी के आखिर तक भारत की आबादी एक अरब 10 करोड़ हो जाएगी. बता दें 2011 की जनगणना के अनुसार भारत की आबादी अभी एक अरब 30 करोड़ है.

एक ओर जहां दूसरे देश अपने यहां प्रजनन दर बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां लोगों से छोटे परिवार रखने की अपील की है.

पीएम मोदी ने पिछले साल के एक भाषण में कहा था, "जनसंख्या विस्फोट भविष्य में हमारे लिए कई तरह की समस्या पैदा करेगा. लेकिन एक ऐसा वर्ग भी है जो बच्चे को इस दुनिया में लाने से पहले नहीं सोचता है कि क्या वो बच्चे के साथ न्याय कर सकते हैं, उसे जो चाहिए क्या वो उसे सबकुछ दे सकते हैं." प्रधानमंत्री के मुताबिक कि इसके लिए समाज में जागरूकता लाने की जरूरत है.

नाइजीरिया लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार इस सदी के आखिर तक नाइजीरिया की आबादी करीब 80 करोड़ हो जाएगी और जनसंख्या के हिसाब से दुनिया का दूसरे सबसे बड़ा देश बन जाएगा.

हालांकि रिपोर्ट यह भी बताती है कि उस वक्त तक नाइजीरिया में काम करने वालों की बड़ी संख्या हो जाएगी और उनकी जीडीपी में भी ऊपर जाएगी. लेकिन बढ़ती जनसंख्या का बोझ देश के आधारभूत ढांचों और सामाजिक ताने-बाने पर पड़ता रहा है. नाइजीरिया के अधिकारी अब इस बारे में खुलकर बोलने लगे हैं. उनका कहना है कि कि जनसंख्या को कम करने के लिए कदम उठाए जाने की जरूरत है.

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