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Explained: तलाक-ए-हसन असंवैधानिक होगा! SC ने उठाए सवाल, इस्लाम में कितनी तरह के होते हैं तलाक?

ABP Explainer: एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इतने सवाल उठाए हैं कि तलाक-ए-बिद्दत की तरह तलाक-ए-हसन पर भी पाबंदी लग सकती है. लेकिन कोई नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी.

'कोई तीसरा पक्ष महिला को उसके पति की ओर से तलाक कैसे सुना सकता है? क्या यह कानूनी है? क्या पति में इतना अहंकार है कि अपनी पत्नी को सीधे तलाक देने का प्रस्ताव भी नहीं रख सकता? अगर समाज में ऐसी भेदभावपूर्ण प्रथाएं हैं, तो कोर्ट को दखल देना होगा.'

19 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत ने यह बयान देते हुए, तलाक-ए-हसन का मामला 5 जजों की बेंच को सौंप दिया. बेनजीर हीना वर्सेज यूनियन ऑफ इंडिया केस ने तलाक का मुद्दा फिर छेड़ दिया. 7 साल पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक पर पाबंदी लगाई थी, और अब तलाक-ए-हसन कटघरे में खड़ा है. ABP एक्सप्लेनर में समझते हैं कि इस्लाम में तलाक कितने होते हैं, तलाक-ए-हसन क्या है और क्या यह भी असंवैधानिक हो सकता है...

सवाल 1- बेनजीर हीना के तलाक की कहानी क्या है?
जवाब- बेनजीर हीना की सुप्रीम कोर्ट में दी याचिका के मुताबिक...

  • 33 साल की बेनजीर हीना गाजियाबाद की रहने वाली स्वतंत्र पत्रकार हैं. उनकी शादी डॉक्टर यूसुफ गनी से हुई थी. लेकिन शादी के बाद दहेज की मांग को लेकर ससुराल वालों ने प्रताड़ित किया. अप्रैल 2022 में गाजियाबाद के विजय नगर पुलिस स्टेशन में उनके पति और ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना और मारपीट की रिपोर्ट दर्ज हुई.
  • बेनजीर के पति ने खुद के बजाय अपने वकी के जरिए स्पीड पोस्ट से तलाक-ए-हसन के नोटिस भिजवाए. पहला नोटिस 19 अप्रैल 2022 को आया, दूसरा 19 मई 2022 और तीसरा 19 जून 2022 के आसपास भेजा. हर नोटिस में एक तलाक का जिक्र था, लेकिन सबसे बड़ी समस्या यह थी कि नोटिस पर पति के खुद के साइन नहीं थे, सिर्फ वकील के थे. पति ने बाद में दूसरी शादी कर ली, लेकिन बेनजीर के पास तलाक का कानूनी सबूत न होने से वे फंस गईं.
  • इस वजह से वह न तो शादीशुदा मानी जा रही थीं और न ही तलाकशुदा. बच्चे का स्कूल एडमिशन नहीं हो पा रहा था क्योंकि सिंगल पैरेंट का प्रूफ नहीं दे पाईं. बच्चे का पासपोर्ट नहीं बन सका. मेहर की रकम और बच्चे का गुजारा भत्ता भी नहीं मिला. पित नते सिर्फ 17 हजार रुपए की एकमुश्त राशि दी.
  • इसके खिलाफ बेनजीर ने 2022 में सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की. इसमें उन्होंने मांग की कि तलाक-ए-हसन को असंवैधानिक घोषित किया जाए क्योंकि यह महिलाओं के साथ भेदभाव करता है और संविधान 14 (समानता), 15 (भेदभाव निषेध), 21 (गरिमा का जीवन) और 25 (धर्म की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है. साथ ही जेंडर और धर्म न्यूट्रल तलाक कानून बनाने की मांग की.

सवाल 2- सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर क्या कहा, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है?
जवाब- सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की तीन सदस्यीय बेंच ने इस केस की सुनवाई की. कोर्ट ने तलाक-ए-हसन की निंदा की. कोर्ट ने सवाल किया कि क्या आधुनिक और सभ्य समाज में ऐसी परंपरा स्वीकार की जा सकती है. इस भेदभावपूर्ण प्रथा का आविष्कार कैसे करते हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कोई तीसरा पक्ष महिला को उसके पति की ओर से तलाक कैसे सुना सकता है? क्या यह कानूनी है? क्या पति में इतना अहंकार है कि अपनी पत्नी को सीधे तलाक देने का प्रस्ताव भी नहीं रख सकता? समुदाय इस तरह की प्रथाओं को बढ़ावा कैसे दे रहा है? अगर समाज में ऐसी भेदभावपूर्ण प्रथाएं हैं, तो कोर्ट को दखल देना होगा.

सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने तलाक को फिर से सुर्खियों में ला दिया. सबसे पहले 1985 में शाहबानो केस, 2017 में तीन तलाक पर प्रतिबंध और अब तलाक-ए-हसन की चर्चा है. बेनजीर ने अपनी याचिका में इस तलाक को बैन करने की मांग की है. 

जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, 'उन्हें शालीनता से यहां आने दें और अब हिना जो चाहती हैं, उन्हें बिना शर्त प्रदान करें. उन्हें अपनी जिंदगी का आनंद लेने और किसी को उनकी जिंदगी बर्बाद करने का अधिकार नहीं है.'

सवाल 3- इस्लाम में तलाक कितनी तरह के होते हैं और उनमें क्या होता है?
जवाब- इस्लाम में शरीअत (हनफी फिक्ह जो भारत-पाकिस्तान में सबसे ज्यादा फॉलो किया जाता है) के मुताबिक पति की तरफ से तलाक मुख्य रूप से तीन तरह के होते हैं. ये तीनों ही जायज हैं लेकिन उनकी पसंदगी और सुन्नत होने का दर्जा अलग-अलग है.

1. तलाक-ए-अहसन

  • यह सबसे अच्छा और सबसे पसंदीदा तरीका है. इसमें औरत पाक (माहवारी से पहले या बाद में) हो और उस तुहर में संभोग न हुआ हो, तो सिर्फ एक राजई तलाक दी जाती है.
  • फिर 1 महीने का इंतजार किया जाता है. अगर इस दौरान पति रुजूअ यानी वापसी कर ले तो निकाह बरकरार रहता है और तलाक रद्द हो जाती है.
  • अगर 1 महीना गुजर जाए और रुजू न हो तो तलाक पक्की हो जाती है, यानी एक बाइन तलाक.

2. तलाक-ए-हसन

  • यह भी पूरी तरह जायज़ और मुस्तहब (पसंदीदा) तरीका है. इसमें हर एक महीने में एक तलाक, तीन महीनों तक दी जाती है. यानी पहला तुहर एक तलाक, दूसरा तुहर दूसरी तलाक और तीसरा तुहर यानी तीन बार तलाक.
  • पहले दो तलाक के बाद भी रुजू का पूरा हक रहता है. लेकिन तीसरी तलका देने के बाद निकाह खत्म हो जाता है.

3. तलाक-ए-बिदअत

  • इस तरीके को इस्लाम में सबसे ज्यादा नापसंदीदा अमल बताया गया है. इसमें एक ही मजलिस में या एक ही लफ्ज में तीन तलाक देना, जैसे 'मैं तुम्हें तीन तलाक देता हूं' या तीन बार 'तलाक-तलाक-तलाक'.
  • एक ही बार में तीन तलाक पड़ जाती हैं और निकाह तुरंत खत्म हो जाता है, जो मुगल्लजा तलाक है. सही हदीस के मुताबिक, पैगम्बर साहब ने इसे गुनाह और लानत वाली बिदअत कहा है.
  • भारत में 2017 से यह आपराधिक अपराध है, यानी तीन तलाक देने पर 3 साल तक की सजा हो सकती है. यह कानूनी रूप से मान्य नहीं है.

वहीं, अगर औरत को तलाक लेनी हो तो वो खुलअ ले सकती है या कजियात में किसी काजी के पास जाकर फस्ख-ए-निकाह कर सकती है. इससे निकाह रद्द हो जाता है.

सवाल 4- क्या तीन तलाक की तरह तलाक-ए-हसन पर भी पाबंदी लग सकती है?
जवाब- एक्सपर्ट्स का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इतने सवाल उठाए हैं कि तलाक-ए-बिद्दत की तरह तलाक-ए-हसन पर भी पाबंदी लग सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, 'क्या 2025 में कोई सभ्य समाज ऐसी प्रथा को मंजूरी दे सकता है? यह महिलाओं की गरिमा का अपमान है.' लेकिन प्रतिबंध के बारे में अभी फैसला करना जल्दबाजी हो सकता है. 2017 में जब सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक घोषित किया था, तब देशभर में विरोध-प्रदर्शन हुए थे और हालात बहुत बिगड़ गए थे. सु्प्रीम कोर्ट ने फिलहाल ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड से भी जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट बेनजीर हीना के मामले में 26 नवंबर को सुनवाई करेगी.

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर (एबीपी लाइव- हिंदी) अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इससे पहले दो अलग-अलग संस्थानों में भी उन्होंने अपनी सेवाएं दी. जहां वे 5 साल से ज्यादा वक्त तक एजुकेशन डेस्क और ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. वे बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को भी लीड कर चुके हैं. ज़ाहिद देश-विदेश, राजनीति, भेदभाव, एंटरटेनमेंट, बिजनेस, एजुकेशन और चुनाव जैसे सभी मुद्दों को हल करने में रूचि रखते हैं.

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