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क्या टिकट की वजह से टूटेगा समाजवादी परिवार ?

नई दिल्ली: यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे पहले समाजवादी परिवार में सियासी उठापटक थमने का नाम नहीं ले रहा. अभी एसपी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने 403 में से 175 कैंडिडेट के नाम फाइनल ही किए थे कि चाचा के नहले पर रविवार रात भतीजे अखिलेश यादव ने दहला चल दिया. अपने समर्थकों के टिकट काटे जाने से नाराज चल रहे अखिलेश ने कल रात 403 उम्मीदवारों की लिस्ट मुलायम को थमा दी. अब नेताजी समझ नहीं पा रहे कि क्या करें और क्या न करें. ऐसे में ये कयास तेज हो गए हैं कि क्या टिकट की वजह से समाजवादी परिवार टूटेगा ? तो हम आपको बता रहे हैं कि मुलायम सिंह के सामने अब क्या विकल्प बचा है?

अब तक 175 उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं शिवपाल यादव

एबीपी न्यूज़ को दिए इंटरव्यू में रविवार को दोपहर को शिवपाल यादव ने जैसे ही अपनी चुनाव चाल चली. चंद घंटे बाद ही अखिलेश यादव ने नहले पर दहला चलते हुए सभी सीटों के लिए उम्मीदवारों की अपनी लिस्ट मुलायम को भेज दी. आपको बता दें कि इससे पहले शिवपाल यादव अब तक 175 उम्मीदवार घोषित कर चुके हैं. इसके जवाब में अखिलेश ने कल 403 नाम तय करके पार्टी अध्यक्ष को भेज दिए.

माना जा रहा है कि अखिलेश ने ये चाल इसलिए चली है क्योंकि शिवपाल अखिलेश समर्थकों के पत्ते साफ कर अपने लोगों को टिकट दे रहे थे. जो कि चुनाव के बाद नेता चुनने में शिवपाल के साथ खड़े हो सकते हैं. लिहाजा अपने भविष्य के खतरे को भांपते हुए अखिलेश ने चाचा के चौके के जवाब में अपना छक्का मार दिया है. मुलायम के लिए बेटे की बात टालना इसलिए आसान नहीं रहने वाला क्योंकि अब झगड़ा बढता है तो लोग नेताजी को ही जिम्मेदार मानेंगे.

मुलायम सिंह के सामने अब क्या विकल्प बचा है?

- अभी मुलायम के सामने रास्ता यही है कि वो भाई और बेटे दोनों को बुलाकर बात करें. - पार्टी से निकाले गए अखिलेश समर्थकों को वापस पार्टी में लाएं. - और अखिलेश के मन के मुताबिक आपराधिक छवि के उम्मीदवारों के टिकट काट दें.

अगर ऐसा नहीं होता है कि तो फिर पार्टी चुनाव से ठीक पहले टूट की ओर भी बढ़ सकती है. हालांकि इतिहास को देखते हुए इस तरह की संभावना में दम नहीं दिख रहा. लेकिन समाजवादी परिवार के इस दंगल पार्ट टू ने पार्टी के समर्थकों को एक बार फिर दोराहे पर खड़ा कर दिया है.

समाजवादी झगड़े के ये पांच किरदार समाजवादी झगड़े के ये पांच किरदार हैं. भतीजे अखिलेश और चाचा शिवपाल में झगड़ा है और मुलायम रेफरी की भूमिका में है. जबकि मुलायम के चचेरे भाई रामगोपाल अखिलेश के साथ हैं तो परिवार से बाहर के सदस्य सांसद अमर सिंह शिवपाल के साथ हैं.

- मुलायम के अलावा पार्टी के चार सांसद भी अखिलेश के खेमे में हैं. - पार्टी के महासचिव आजम खान भी अखिलेश के साथ हैं - पार्टी के 229 में से 195 विधायक अखिलेश के साथ हैं - स्वच्छ छवि और विकास के एजेंडे पर लड़ना चाहते हैं अखिलेश अखिलेश की ताकत अखिलेश अपने विकास मॉडल को लेकर चुनावी मैदान में उतरना चाह रहे हैं लेकिन पार्टी की लाइन इससे जुदा है. आपको हम बताते हैं कि अखिलेश के वो काम जिसको वो पार्टी नेतृत्व और पब्लिक के बीच अपने पक्ष में भुनाना चाह रहे हैं. --लखनऊ मेट्रो - आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे - समाजवादी पेशन योजना - लोहिया ग्रामीण बस सेवा - साइकिल ट्रैक - बड़े शहरों में डायल 100 - लोहिया ग्रामीण आवास - मुफ्त सिंचाई, दवाई और पढ़ाई यही वो मुद्दे हैं जिनके दम पर अखिलेश चाचा पर भारी पड़ना चाहते हैं. लेकिन चाचा को अपने भाई मुलायम और बाहुबलियों पर ज्यादा भरोसा नजर आ रहा है.  सीएम अखिलेश को फूटी आंख न सुहाने वाले मंत्री गायत्री प्रजापति का कद पार्टी में और बढ़ा दिया गया है, जिससे एसपी में टिकट बंटवारे के अलावा एक और टकराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है. खैर जो भी हो लेकिन अब तो यही देखना बाकी है कि क्या टिकट की वजह से समाजवादी परिवार टूटेगा ?
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