यूपी:कौशांबी बौद्ध स्थल को विकसित करने तैयारी में योगी सरकार, 100 करोड़ रुपये का है प्रस्ताव
कौशांबी में बौद्ध स्थल के विकास के लिए शासन के पास 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है. कौशांबी प्रयागराज से करीब 50-60 किलोमीटर की दूरी पर कौशांबी एक छोटी सी जगह है.

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश के बौद्ध सर्किट के अंतर्गत आने वाले बौद्ध स्थलों को विकसित करने की तैयारी की है जिससे देश विदेश से इस प्रदेश में आने वाले पर्यटकों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होने का अनुमान है. प्रयागराज मंडल के पर्यटन विभाग के उप निदेशक दिनेश कुमार ने बताया कि प्रदेश के छह बौद्ध स्थलों- संकिसा (फर्रुखाबाद), कौशांबी, सारनाथ (वाराणसी), कुशीनगर और कपिलवस्तु (सिद्धार्थ नगर) को पर्यटन के दृष्टिकोण से विकसित करने का मास्टर प्लान तैयार कर लिया गया है.
उन्होंने बताया कि प्रयागराज मंडल में आने वाले कौशांबी में बौद्ध स्थल के विकास के लिए शासन के पास 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा जा रहा है. कौशांबी के सभी तीन स्थल- अशोक स्तंभ के खंडहर, घोसिताराम विहार और किले के अवशेष एक दूसरे से महज डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर हैं. इन्हें बेहतर ढंग से विकसित किया जाएगा.
उन्होंने बताया कि पर्यटकों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के लिए वर्तमान में सड़क पर कोई साइनेज नहीं है. इसके अलावा, इन तीनों स्थानों पर वाहनों की पार्किंग के लिए कोई स्थान निर्धारित नहीं है. साथ ही सीधे कौशांबी जाने के लिए इस समय परिवहन निगम की कोई बस नहीं है. यह केवल मंझनपुर तक उपलब्ध है जो कौशांबी से करीब 24 किलोमीटर दूर है.
कौशांबी के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए दिनेश कुमार ने बताया कि प्रयागराज से करीब 50-60 किलोमीटर की दूरी पर कौशांबी एक छोटी सी जगह है. महात्मा बुद्ध के समय जो 16 महाजनपद थे, उसमें वत्स प्रांत की राजधानी कौशांबी हुआ करती थी.
उन्होंने बताया कि महाभारत के बाद जब हस्तिनापुर गंगा में बह गई तो वहां के अंतिम शासक निकाक्षु ने अपनी राजधानी हस्तिनापुर से कौशांबी स्थानांतरित की थी. कौशांबी के सबसे प्रतापी शासक सम्राट उदयन के समय में महात्मा बुद्ध ने कौशांबी में तीन बार प्रवास किया था.
कुमार ने बताया कि सम्राट उदयन के समय बहुत ही धनवान व्यापारी घोसिताराम ने एक बौद्ध विहार का निर्माण कराया और उन्होंने महात्मा बुद्ध को कौशांबी आने का निमंत्रण दिया. बुद्ध ने अलग अलग वर्षों में तीन चतुर्मास कौशांबी में बिताए.
उन्होंने कहा कि आज वहां उजाड़ विराना है. वहां केवल राजधानी के भग्नावशेष हैं. सम्राट उदयन का किला जो यमुना नदी के किनारे था, उसके अवशेष दिखाई देते हैं. उत्खनन में वहां एक शयनचित्ती मिली है, अलग अलग प्रकार के सिक्के मिले हैं. ये सभी उस काल की एक वैभवशाली राजधानी की कहानी बयां करते हैं.
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