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यूपी: क्या अदिति सिंह का नया ठिकाना हो सकती है बीजेपी?, Y+ सुरक्षा मिलने के बाद अटकलों का बाजार गर्म

रायबरेली सदर से विधायक अदिति सिंह ने भी पार्टी में बागवती सुर छेड़ रखा है.जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के केंद्र सरकार के फैसले का स्वागत करके वह पहले ही अपने बदले हुए सुर का संकेत दे चुकी हैं.

रायबरेली: रायबरेली सदर से कांग्रेस विधायक अदिति सिंह को प्रदेश सरकार ने दी Y+ सुरक्षा दी है. अमेठी में कांग्रेस का किला भेदने के बाद बीजेपी रायबरेली में भी कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ा रही है. पिता अखिलेश सिंह की मृत्यु के बाद अदिति सिंह लगातार कांग्रेस की लाइन से अलग हटकर कदम उठा रही हैं. पहले अनुच्छेद 370 पर केंद्र सरकार के पक्ष में जाना और उसके बाद गांधी जयंती पर विपक्ष के सदन की कार्यवाही के बहिष्कार के बावजूद सदन की कार्यवाही में शामिल होकर अदिति ने बीजेपी में जाने की अटकलों को मजबूती दे दी है.

 इस मामले पर अदिति ने कहा कि वो अपने पिता के सिद्धांतों की राजनीति करती हैं और कांग्रेस को उनपर जो फ़ैसला लेना है वो ले सकती है.

कांग्रेस के बहिष्कार के बाद भी विशेष सत्र में शामिल हुईं अदिति सिंह

कहा जाता है कि अदिति सिंह को राजनीति में लाने का श्रेय प्रियंका गांधी को जाता है. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में योगी सरकार की ओर से 36 घंटे तक चलने वाला विधानसभा सत्र बुलाया गया. बसपा सपा और कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने इसका बहिष्कार किया. इसी दिन प्रियंका गांधी का लखनऊ में पैदल मार्च था. लेकिन अदिति सिंह उसमें नहीं पहुंचीं. पार्टी लाइन को नजरअंदाज करते हुए देर शाम वह विधानसभा के विशेष सत्र में पहुंच गईं.

अदिति सिंह ने पार्टी को झटका देते हुए यूपी विधानसभा के विशेष सत्र में हिस्सा लिया और अपने विचार रखे. कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू ने कहा था कि पार्टी के विधायक सदन का बहिष्कार करेंगे, लेकिन अदिति सिंह ने विधानसभा में भाषण दिया.

अदिति सिंह को मिली वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा 

अदिति को विशेष सत्र में भाग लेने और सत्ता की तरफ से विपक्ष वाला असली साथ देने का इनाम मिला है. उन्हें वाई प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है. कयास लगाए जा रहे हैं कि बीजेपी अदिति सिंह का नया ठिकाना हो सकती है.

अदिति सिंह ने कहा, "मैंने सोचा कि रायबरेली की विधायक होने के नाते विकास के मुद्दे पर और राष्ट्रीय विषय में मुझे भाग लेना चाहिए. जनता ने मुझ पर विश्वास करके सदन में भेजा है. मैंने अपने भाषण में देशहित की बात रखी है. मुझे विकास के लिए चुना गया है."

बीजेपी में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राजनीति संभावनाओं का खेल है, पर अभी ऐसा कुछ भी नहीं है.

राजनीतिक विश्लेषक रतनमणि लाल का कहना है, "अदिति सिंह के पिता के न रहने के बाद उनके राजनीतिक विरोधी अदिति सिंह को कमजोर करने में लग गए. अदिति सिंह कमजोर पड़ रही थीं. उनके पास मजबूती का कोई आधार नहीं था. उनके घर पर उनके पिता की दबंगई का सिस्टम आगे बढ़ाना वाला भी कोई बचा नहीं है. इसके बाद राहुल और सोनिया का करीबी बताया जाना उनके कैरियर को नुकसान पहुंचा रहा था."

कौन हैं अदिति सिंह

2017 के यूपी विधानसभा चुनावों में अदिति सिंह ने 90 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज कराई थी. अदिति के पिता अखिलेश सिंह भी रायबरेली से 5 बार विधायक रह चुके हैं. अदिति की पढ़ाई अमेरिका की ड्यूक यूनिवर्सिटी से हुई है. माना जाता है कि अदिति सिंह, प्रियंका वाड्रा की करीबी हैं. दिल्ली, मसूरी और फिर अमेरिका में पढ़ाई करने के बाद कारपोरेट करियर छोड़ कर राजनीति में आना उनका बड़ा कदम था.

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