पटना सिटी के बालक गृह से फरार हुए तीन बच्चे, पड़ताल में सामने आई दयनीय स्थिति
इस बालगृह की क्षमता कुल 50 बच्चों की है. फिलहाल इसमें 39 बच्चे रह रहे थे, इसमें से तीन भाग गए. एबीपी न्यूज़ ने इस बालगृह की पड़ताल की, जिसमें इसकी दयनीय हालत सामने आई.

पटना: मुजफ्फरपुर बालिका यौन शोषण कांड से नीतीश कुमार की सरकार कोई सबक लेती नहीं दिख रही है. अब पटना सिटी के मोर्चा रोड स्थित बालगृह से बुधवार को तीन बच्चे फरार हो गए. अब एक बार फिर ये सवाल उठ रहा है कि आखिर इन बच्चों की देखभाल में सरकार से कैसे चूक गई. इस बालगृह की क्षमता कुल 50 बच्चों की है. फिलहाल इसमें 39 बच्चे रह रहे थे, इसमें से तीन बच्चे भाग गए.
एबीपी न्यूज़ ने इस बालगृह की पड़ताल की, जिसमें इसकी दयनीय हालत सामने आई. बालगृह की इमारत दो मंजिला है और अभी निर्माणाधीन है. इसके अंदर तीन कमरे मिले जिनमें डबल स्टोरी बेड था. छत की ऊंचाई कम थी. यहां पंखा नहीं था और बाथरूम में कोई वेंटिलेशन नहीं था. एक ही हॉल में लाइब्रेरी, स्टडी सर्किल और ट्रेनिंग सेंटर है. इस हालत पर यहां काम करने वाले कर्मचारियों ने कहा कि 35 हजार के किराए के मकान में इससे ज़्यादा सुविधा और सुरक्षा नहीं मिल सकती है.
पड़ताल में पता चला कि यहां सिर्फ 1200 रुपये प्रति बच्चे खाने के लिए दिए जाते थे. वहीं कपड़ा, पढ़ाई, ट्रेनिंग और खेलकूद के लिए सिर्फ 800 रुपये दिए जाते थे. हॉल के दूसरे छोर पर बाल संरक्षण आयोग के तीन सदस्य बैठे हुए थे. जब उनसे यह पूछा गया कि कमरे में पंखा तक नहीं तो वे इसे बेबसी बताने लगे. यहां के गार्ड के पास ना तो वर्दी थी और ना ही कोई बैज था. यहां की हालात को बताने के लिए ये काफी है.
बता दें कि बिहार की नीतीश सरकार यह फैसला कर चुकी है कि अब राज्य भर के शेल्टर हाउस एनजीओ नहीं बल्कि खुद सरकार चलाएगी. हाल ही में सरकार ने शेल्टर होम चलाने के लिए चयन किए गए 50 एनजीओ का चयन भी रद्द कर दिया था. लेकिन ये घटना सरकार पर सवाल तो खड़े करती ही है.
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