अयोध्या विवाद पर सुनवाई आज: सीएम योगी बोले- सबरीमाला की तरह राम मंदिर पर भी जल्द आए फैसला
जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राम मंदिर और अयोध्या चर्चा के केंद्र में आते जा रहे हैं. आज सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि अयोध्या केस की सुनवाई करने वाली बेंच में कौन होगा या चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली नई बेंच ही इसकी सुनवाई करेगी. इसके अलावा आज ही इस बात का फैसला होगा क्या अयोध्या विवाद पर सुनवाई रोजाना होगी या नहीं और इसकी तारीख क्या होगी.

लखनऊ: अयोध्या में विवादित भूमि पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई होगी. इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में अयोध्या में विवादित भूमि को राम लला, निर्मोही अखाड़ा और मूल मुस्लिम वादी के बीच बांटने का आदेश दिया था. हर जगह से इस पर प्रतिक्रिया आ रही है. इन सबके बीच यूपी के सीएम योगी का कहना है कि सबरीमाला की तरह राम मंदिर पर भी जल्द फैसला आए.
बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस एम जोसेफ की बैंच सुनवाई करेगी, जो पूरी तरह से नई बेंच होगी. जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे राम मंदिर और अयोध्या चर्चा के केंद्र में आते जा रहे हैं. अगले कुछ दिनों में ही 5 राज्यों में भी चुनाव होने वाले हैं. एक ओर आरएसएस ने राम मंदिर की बात की है तो दूसरी ओर शिवसेना ने भी पूछ लिया है कि राम मंदिर जुमला तो नहीं था. सुप्रीम कोर्ट में भी अयोध्या विवाद पर 29 अक्टूबर से सुनवाई शुरू होने वाली है. हाल ही में स्वामी परमहंस आमरण अनशन पर भी बैठ गए थे.
क्या है अयोध्या विवाद? अयोध्या में जमीन विवाद सत्तर सालों से चला आ रहा है, अयोध्या विवाद हिंदू मुस्लिम समुदाय के बीच तनाव का बड़ा मुद्दा रहा है. अयोध्या की विवादित जमीन पर राम मंदिर होने की मान्यता है. मान्यता है कि विवादित जमीन पर ही भगवान राम का जन्म हुआ. हिंदुओं का दावा है कि राम मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई.
दावा है कि 1530 में बाबर के सेनापति मीर बाकी ने मंदिर गिराकर मस्जिद बनवाई थी. 90 के दशक में राम मंदिर के मुद्दे पर देश का राजनीतिक माहौल गर्मा गया था. अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को कार सेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया था. अयोध्या में विवादित जमीन पर अभी राम लला की मूर्ति विराजमान है.
अयोध्या विवाद में हाईकोर्ट का फैसला क्या था? अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद आपराधिक केस के साथ साथ जमीन के मालिकाना हक को लेकर भी मुकदमा चला. आठ साल पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एतिहासिक फैसला दिय़ा. हाईकोर्ट ने 2.77 एकड़ विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बराबर बांटने का फैसला दिया.
राम मूर्ति वाला पहला हिस्सा राम लला विराजमान को मिला. राम चबूतरा और सीता रसोई वाला दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को मिला. जमीन का तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को देने का फैसला सुनाया गया. हाईकोर्ट के फैसले को हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. तीनों ही पक्षों ने पूरी विवादित जमीन पर अपना अपना दावा ठोंका.
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