मुजफ्फरनगर: 200 सीसीटीवी, 90 ड्रोन कैमरे की मदद से रखी जा रही है कांवड़ यात्रा मार्ग पर पैनी नजर
हिंदू धर्म में सावन महीना शिव भक्तों के लिए काफी अहम माना जाता है. इसी महीने में भक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं.शिव भक्त इस दौरान लाखों की संख्या में हरिद्वार और गंगोत्री सहित अनेक धामों की यात्रा करते हैं.

मुजफ्फरनगर: उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए तीर्थयात्रा मार्ग पर 200 सीसीटीवी कैमरे और 90 निगरानी ड्रोन लगाए गए हैं इसके अलावा अन्य सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं. पुलिस ने बुधवार को यह जानकारी दी.
एसएसपी अभिषेक यादव के अनुसार, कांवड़-यात्रा को सुरक्षित बनाने के लिए अर्धसैनिक बल और उत्तर प्रदेश प्रांतीय सशस्त्र पुलिस कांस्टेबुलरी (यूपी-पीएसी) की टीमों को तीर्थ यात्रा मार्ग पर तैनात किया गया है.
एसएसपी ने कहा कि तीर्थयात्रियों को डूबने से बचाने के लिए गोताखोरों की एक टीम को भी लगाया गया है.
कांवड़ यात्रा भगवान शिव के भक्तों (कांवड़ियों) की एक वार्षिक तीर्थ यात्रा है, जो श्रावण महीने के दौरान उत्तराखंड के हरिद्वार, गौमुख और गंगोत्री और बिहार के सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर उसे शिवलिंग पर चढ़ाते हैं. इस साल यह यात्रा 17 जुलाई से शुरू हुई है.
बता दें कि पूरे प्रदेश में कांवड़ यात्रा में आठ हजार जवानों को तैनात किया गया है. कांवड़ मार्ग पर हर पांच किलोमीटर के दायरे में यूपी-100 की पीसीआर खड़ी रहेगी. यूपी-100 का रेस्पांस टाइम पूरे प्रदेश में 23 मिनट से घटाकर 14 मिनट किया गया है. कांवड़ यात्रा में यह रेस्पांस टाइम घटाकर 10 मिनट कर दिया गया है."
कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के पुलिस कंट्रोल रूम को उत्तर प्रदेश के कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है, ताकि इन सभी राज्यों की पुलिस में समन्वय रहे. इसके अलावा विशेष तौर पर उत्तराखंड सरकार से भी विस्तार से चर्चा की गई है, क्योंकि लाखों की संख्या में शिवभक्त हरिद्वार और गोमुख जाते हैं.
सरकार ने शिवभक्तों के लिए प्रदेशस्तर पर कांवड़ यात्रा मैनेजमेंट एप तैयार किया है. इस एप में शिवभक्तों के लिए शिविर, एंबुलेंस, पुलिस थाने से लेकर सभी प्रकार की सुविधाओं की जानकारी मौजूद रहेगी.
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