Kumbh Mela 2019: जानिए कुंभ की पौराणिक कहानी, क्यों खास होता है स्नान
Kumbh Mela 2019: ऐसा माना जाता है कि एक बार देवताओं और दानवों ने मिल कर क्षीर सागर के मंथन के लिए विचार किया. इस समुद्र मंथन के लिए भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार लिया.

नई दिल्ली: ऐसा माना जाता है कि एक बार देवताओं और दानवों ने मिल कर क्षीर सागर के मंथन के लिए विचार किया. इस समुद्र मंथन के लिए भगवान विष्णु ने कच्छप अवतार लिया. मंदरांचल पर्वत को मथनी बनाया गया और वासुकी नाग को मथने वाली रस्सी की तरह इस्तेमाल किया गया. इस मंथन से 14 चीजें निकली थीं.
ऐसी मान्यता है कि सबसे पहले कालकूट विष निकला था. इसके बाद कामधेनु, उच्चैश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, रंभा अप्सरा, देवी लक्ष्मी, वारुणि देवी, चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख, भगवान धन्वंतरि और अमृत कलश इस मंथन से निकले.
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक 10 हजार साल तक ये मंथन चला था. जब अमृत कलश निकला तब देवताओं को चिंता हुई कि अगर दानव अमृत पीने से अमर हो गए तो संसार का क्या होगा. इसके बाद देवताओं ने अमृत-कलश को छिपाने का निर्णय लिया.
इसके लिए देवों और दानवों के बीच संघर्ष चला, जिसके दौरान देवताओं के राजा इंद्र का पुत्र जयंत पहले स्वर्ग के आठ स्थानों पर तथा फिर पृथ्वी पर जहां-तहां अमृत कलश को छिपाने के लिए भागता रहा.
पुराणों के अनुसार जयंत ने अमृत कलश को हरिद्वार, प्रयाग, उज्जैन और नासिक की भूमि पर रखा जहां अमृत-कलश की कुछ बूंदें भूमि पर गिरीं और इन स्थानों को निश्चित नक्षत्रीय दश में सदा-सदा के लिए अमरत्व प्रदान करने वाली दैवी ऊर्जा से समृद्ध कर गयीं. इन्हीं स्थानों पर कुंभ मेलों का आयोजन किया जाता है.























