कानपुर: BSP को उपचुनाव में नहीं मिल रहे है प्रभावशाली चेहरे, ब्राह्मण प्रत्याशी उतारने पर विचार कर रही हैं मायावती
कानपुर बुंदेलखंड की तीन विधानसभा सीटों गोविंद नगर, हमीरपुर और मानिकपुर सीट पर उपचुनाव होने हैं.2017 के विधानसभा चुनाव में कानपुर बुंदेलखंड की 52 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 47 सीटों पर कमल खिलाया था.

कानपुर: उत्तर प्रदेश की 12 विधानसभा सीटों पर होने वाले उप-चुनाव की तैयारियां सभी राजनैतिक दलों शुरू कर दी हैं. सपा-बसपा गठबंधन टूटने के बाद के बसपा प्रमुख ने उपविधानसभा चुनाव अकेले लड़ने का एलान किया है. अब उनके सामने सबसे बड़ी समस्या है प्रभावशाली और चर्चित चेहरों की जिसे प्रत्याशी बनाकर जनता के सामने उतारा जाए. बसपा को प्रभावशाली प्रत्याशी नहीं मिल रहे हैं जिसकी वजह से पार्टी में लगातार मंथन का दौर जारी है. इस बात को लेकर बसपा प्रमुख मायावती खुद भी परेशान हैं.
कानपुर बुंदेलखंड की तीन विधानसभा सीटों गोविंद नगर, हमीरपुर और मानिकपुर सीट पर उपचुनाव होने हैं. ये तीनों विधानसभा सीटें बीजेपी के खाते में थीं. 2017 के विधानसभा चुनाव में कानपुर बुंदेलखंड की 52 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 47 सीटों पर कमल खिलाया था.
अगर कानपुर की गोविंद नगर विधानसभा सीट की बात जाए तो ये ब्राह्मण बाहुल क्षेत्र है. 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सत्यदेव पचौरी इस सीट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की थी. सत्यदेव पचौरी उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री भी थे. 2019 का लोकसभा चुनाव जीत कर सत्यदेव पचौरी कानपुर के सांसद बन गए.
बसपा गोविंद नगर विधानसभा सीट से ब्राह्ममण चेहरा मैदान में उतारना चाहती है. पार्टी कार्यालय में लगातार आवेदन करने वालों का सिलसिला जारी है. इस आवेदन प्रक्रिया में सबसे ज्यादा आवेदक पार्टी के कार्यकर्ता हैं. जिसमें ओबीसी और एससी आवेदकों के नाम सबसे अधिक हैं. सर्वणों के नाम मात्र के ही आवेदन फार्म आए हैं. जिसे लेकर पार्टी के पदाधिकारी चिंतित हैं.
यही स्थिति कानपुर बुंदेलखंड की बाकी विधानसभा सीटों की है. पार्टी के पदाधिकारी चिराग लेकर प्रभावशाली प्रत्याशियों की तलाश कर रहे हैं. लेकिन कोई भी चर्चित चहरा बसपा की टिकट पर किस्मत नहीं आजमाना चाहता है.
बसपा प्रमुख मायावती ने 2 जुलाई को सभी पदाधिकारियों व मंडल प्रभारियों को बुलाया है. इस बैठक में पदाधिकारियों को अपने क्षेत्र की विधानसभा की पूरी डिटेल के साथ के साथ मौजूद रहना है. इसके साथ ही प्रत्याशियों के नामों पर भी चर्चा होनी है.






















