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यूपी: लापरवाही के मामले में चार जेल कर्मचारियों को जबरन दिया गया रिटायरमेंट
यूपी सरकार इन दिनों बेहद एक्शन मोड में है. जो सरकारी कर्मचारी काम नहीं करते और काम के प्रति लापरवाही दिखाते हैं उनके प्रति सरकार नरमी बरतने के मूड में नहीं दिखती.

प्रयागराज: नौकरी के प्रति लापरवाह रवैया रखने वाले चार जेल कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें जबरन रिटायरमेंट दे दिया गया है. इस कार्रवाई से जेल कर्मियों में हड़कम्प मचा हुआ है. योगी सरकार ने पचास साल की आयु पूरी करने वाले लापरवाह कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने का आदेश दिया था.
आदेश के अनुपालन में डीआईजी जेल प्रयागराज परिक्षेत्र बी.आर.वर्मा की अध्यक्षता में एक स्क्रीनिंग कमेटी गठित की गई थी. जिसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद तीन बंदी रक्षकों और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है.
नैनी जेल में चरवाहा पद पर तैनात विक्रम सिंह, हमीरपुर जेल के हेड वार्डर राम मूरत सिंह और वार्डर रवि शंकर मिश्र को जहां जबरन रिटायर कर दिया गया है. वहीं बांदा जेल में तैनात महिला वार्डर रश्मि सोनकर को भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है.
गौरतलब है कि स्क्रीनिंग कमेटी ने इन कर्मचारियों के सेवाकाल के दौरान मिले दंड और प्रतिकूल प्रविष्टि को समय से पहले रिटायर करने का आधार बनाया है. इसके साथ ही नौकरी के दौरान अधिकारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने और अपने कार्य व जिम्मेदारी के प्रति उदासीन रहने को भी इस कार्रवाई के लिए आधार बनाया गया है.
डीआईजी जेल बी.आर.वर्मा की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय स्क्रीनिंग कमेटी में नैनी के वरिष्ठ जेल अधीक्षक एच.बी.सिंह, जेलर प्रतापगढ़ आर.पी.चौधरी, जेलर बांदा आर.के. सिंह और जेलर महोबा भोलानाथ मिश्रा शामिल थे. डीआईजी जेल के मुताबिक इस बड़ी कार्रवाई के जेल के कर्मचारियों के बीच सख्त संदेश जायेगा.
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