बीएसपी सोशल मीडिया से नहीं, सोशल वर्क और भाईचारे से लड़ेगी लोकसभा चुनाव
बीएसपी को छोड़ कर सभी पार्टियां अपना-अपना फोकस आईटी सेल पर कर रही हैं. लेकिन बीएसपी एक ऐसी पार्टी है जिसने आईटी सेल का गठन नहीं किया और उसकी चर्चा भी नहीं करती है. 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी पार्टिया की नजर बीएसपी पर हैं. बीएसपी का फोकस सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि सोशल वर्क और भाईचारगी पर है.

कानपुर: 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी,कांग्रेस और एसपी ने अपनी आईटी सेल को मजबूत किया है. बीएसपी को छोड़ कर सभी पार्टियां अपना-अपना फोकस आईटी सेल पर कर रही हैं. लेकिन बीएसपी एक ऐसी पार्टी है जिसने आईटी सेल का गठन नहीं किया और उसकी चर्चा भी नहीं करती है. बता दें कि बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने सोशल मीडिया पर पार्टी के फर्जी अकाउंट को लेकर कड़ा रुख अख्तिार किया था. उन्होंने बीएसपी और अपने नाम से चल रहे सभी फेसबुक पेज और ट्विटर अकाउंट को फर्जी बताया था. बीएसपी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी की पूरे देश में न तो कोई अधिकृत वेबसाइट है, और न ही किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट है.
इसके बावजूद भी बीएसपी का वोट प्रतिशत कम नहीं हुआ है, 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सभी पार्टिया की नजर बीएसपी पर हैं. बीएसपी का फोकस सोशल मीडिया पर नहीं बल्कि सोशल वर्क और भाईचारगी पर है.
2019 के लोकसभा सभा चुनाव से एसपी ने आईटी सेल की शुरुआत कानपुर से की. एसपी ने 250 डिजिटल फ़ोर्स को उतारा है जो एसपी के कार्यकाल में हुए विकास कार्यो को सोशल मीडिया के जरिए पहुंचाने का काम करेंगे. बीजेपी को मुंहतोड़ जवाब देना भी शुरू कर दिया है अब एसपी आईटी सेल का विस्तार पूरे यूपी में करने जा रही है. वहीं बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में एक लाख से अधिक आईटी सेल वालींटियरस को मैदान में उतारा है. कांग्रेस भी भी इसमें पीछे नहीं है कांग्रेस का भी आईटी सेल सक्रिय है.
लोकसभा चुनाव की तैयारियों में सभी पार्टिया रणनीति बनाने में जुटी है. लेकिन बीएसपी की चुनावी रणनीति सबसे अलग और गुप्त होती है. इस पार्टी में बोलने का अधिकार सिर्फ बसपा सुप्रीमो मायावती के पास है. बीएसपी के जिलाध्यक्ष, कोऑर्डिनेटर कुछ भी खुल कर नहीं बोलते हैं.
बीएसपी का यह भी आरोप है कि बीजेपी पूंजीपतियों की पार्टी है और सर्व समाज के निचले तबके के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया है. निचले तबकों को सिर्फ अपना वोट बैंक मान कर उनके अधिकारों से खिलवाड़ किया है. आज भी लाखों परिवार गरीबी रेखा के नीचे जी रहे हैं, मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार भरण पोषण कर रहे हैं. उनका गरीबी रेखा से नीचे का राशन कार्ड तक नहीं बना है. ऐसे परिवारों का साथ बीएसपी देगी इन परिवारों के सदस्यों को बीएसपी बड़ी जिम्मेदारी देने जा रही है.
गरीब सर्व समाज के परिवारों को बीएसपी में शामिल किया जाएगा. उनके पार्टी में जिम्मेदारी वाले पद भी दिए जाएंगे, उनका अधिकार दिलाया जाएगा. इसके साथ ही सर्व समाज के निचले तबके के उन युवाओं पर भी नजर है जो लोकसभा चुनाव में पहली बार मतदाता बनेंगे. इस काम के लिए जमीनी स्तर पर कार्य शुरू कर दिया गया है इसमें आईटी सेल की जरूरत नहीं है. कार्यकर्ता गांव-गांव और शहर में ऐसे परिवारों से संपर्क कर रहे हैं. बीएसपी के सभी कार्यकर्ताओं को टारगेट दिया गया है कि एक दिन में लगभग 100 परिवारों से संपर्क करना है.
बीएसपी जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र कुशवाहा के मुताबिक बीएसपी का कोई आईटी सेल नहीं है. इस सम्बन्ध में पार्टी की तरफ से किसी प्रकार का दिशा निर्देश नहीं है. बीएसपी सोशल मीडिया के जरिए नहीं बल्कि गली, गांव, मोहल्लों में जाकर पार्टी की नीतियों से जनता को अवगत कराने पर विश्वास रखती है. हमारा एक-एक कार्यकर्ता जनता से सीधा संवाद करता है.
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