पिछले 13 सालों में पांच पार्टियों से राजनीति कर चुके हैं उपेंद्र कुशवाहा
कल एनडीए के भोज में उपेंद्र कुशवाहा नहीं पहुंचे तो आज तेजस्वी यादव ने उन्हें साथ आने का ऑफर दे दिया. पहले भी कई मौके पर लालू परिवार से उपेंद्र कुशवाहा हमदर्दी जता चुके हैं.

नई दिल्ली: उपेंद्र कुशवाहा बिहार की राजनीति के अविश्वसनीय चेहरा हैं. पिछले तेरह साल में वह पांच पार्टियों से राजनीति कर चुके हैं. कभी वे नीतीश कुमार के बेहद भरोसेमंद थे. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में उपेंद्र कुशवाहा पहली बार सांसद चुने गए और पहली बार में ही मंत्री बन गए. 2014 में उपेंद्र कुशवाहा को बीजेपी ने अपने साथ इसलिए लिया क्योंकि तब नीतीश कुमार बीजेपी से अलग हो चुके थे.
कल एनडीए के डिनर में उपेंद्र कुशवाहा नहीं पहुंचे तो आज तेजस्वी यादव ने उन्हें साथ आने का ऑफर दे दिया. पहले भी कई मौके पर लालू परिवार से उपेंद्र कुशवाहा हमदर्दी जता चुके हैं. एक समय में उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कुमार के दायां हाथ हुआ करते थे. लेकिन अब उन्हें पसंद नहीं हैं.
कहा जाता है कि उपेंद्र कुशवाहा की पूछ नीतीश कुमार के यहां ललन सिंह की वजह से कम हुई थी. अब ललन सिंह नीतीश की कोर कैबिनेट के सदस्य हैं. कुशवाहा जाति के छह फीसदी वोट पर उपेंद्र कुशवाहा खुद को नेता मानते हैं उस कुशवाहा जाति ने 2015 के चुनाव में उन्हें नकार दिया था. 22 सीटों पर लड़ने के बाद पार्टी दो सीट पर जीत पाई थी.
- पेशे से राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर कुशवाहा 1985 में राजनीति में आए.
- लेकिन बिहार की राजनीति में पहली बार पहचान 2000 के बाद बनी.
- 2000 में पहली बार वैशाली के जन्दाहा से विधायक बने.
- झारखंड बंटने के बाद जब बिहार में समता पार्टी विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी बनी तो नीतीश कुमार ने इन्हें नेता विपक्ष का पद दिलाया.
- लेकिन 2005 में कुशवाहा विधानसभा का चुनाव नहीं जीत पाए.
कहा जाता है कि चुनाव हारने के बाद भी तब उपेंद्र कुशवाहा नीतीश कैबिनेट में बड़ा पद चाहते थे. लेकिन नीतीश कुमार ने इन्हें मंत्री बनाने की बजाए संगठन में बिहार प्रदेश का प्रधान महासचिव बना दिया. यहीं से दोनों की दूरी बढ़ने लगी.
समता पार्टी छोड़कर उपेंद्र कुशवाहा एनसीपी में गए. वहां मन नहीं लगा तो लोकतांत्रिक समता दल का गठन किया. 2010 के चुनाव के बाद फिर से नीतीश कुमार के पास लौटे. नीतीश कुमार ने राज्यसभा भेजा लेकिन वहां से इस्तीफा देकर 2013 में आएएसएसपी बना ली.
Source: IOCL

























