अपराध पर लगाम के लिए WhatsApp ग्रुप बनाएगी बिहार पुलिस, आम लोग भी बन सकते हैं सदस्य
चिंता की बात ये है कि व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से असमाजिक तत्व समाज में भ्रामक वीडियो, तस्वीरें या सूचनाओं को वायरल कर देते हैं.

पटना: अब अपराध पर लगाम लगाने के लिए बिहार पुलिस ने व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का फैसला किया है. इसके जरिए बढ़ती आपराधिक घटनाओं से निपटने के लिए स्मार्ट पुलिसिंग करने के लिए नए कदम उठाए जाएंगे. इंटरनेट से साइबर क्राइम बढ़ता जा रहा है और पुलिस को इसके लिए स्मार्ट बनने की ज़रूरत है. इस ग्रुप में आम जनता को भी जोड़ा जाएगा.
इस ग्रुप में कैसे जुड़ सकते हैं?
इसके लिए एसपी के कार्यालय में आवेदन देना होगा. इसमें विस्तृत जानकारी देनी होगी. पहचान प्रमाणित होने के बाद जोड़ा जाएगा. इच्छुक आवेदक स्थानीय नागरिक, चिकित्सक, शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता, वकील, सेवानिवृत सरकारी सेवक, विधान मंडल के सदस्य, मुखिया, सरपंच, छात्र संगठन प्रतिनिधि, महिला संगठन प्रतिनिधि आदि हो सकते हैं. इस अभियान में साइबर सेनानी का नारा होगा 'हम सुरक्षित जन सुरक्षित, बिहार सुरक्षित, साइबर जगत सुरक्षित.'
पुलिस को क्यों ज़रूरत पड़ी?
बिहार की आबादी करीब 10 करोड़ है. स्मार्टफोन और इंटरनेट का चलन लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इसके दुरुपयोग के भी किस्से हर रोज सुनने को मिलते हैं. चिंता की बात ये है कि व्हाट्सएप या सोशल मीडिया के माध्यम से असमाजिक तत्व समाज में भ्रामक वीडियो, तस्वीरें या सूचनाओं को वायरल कर देते हैं. इससे समाज में गंभीर स्थिति पैदा हो जाती है.
कैसे काम करेगा ये ग्रुप?महती योजना के तहत बिहार पुलिस ने थाना, अनुमंडल, जिला स्तर पर व्हाट्सएप के माध्यम से 'साइबर सेनानी समूह' बनाने का फैसला लिया है. जिसमें संबंधित थानाध्यक्ष कम से कम 100 स्थानीय लोगों को सदस्य के रूप में चयन करेंगे. इस समूह में अनुमंडल के एसडीपीओ भी सदस्य होंगे. अनुमंडल स्तर पर यह समूह सम्बंधित एसडीपीओ बनाएंगे जिसमें उस अनुमंडल के कम से कम 200 स्थानीय सदस्यों का चयन होगा.
इस अनुमंडलीय स्तरीय 'साइबर सेनानी समूह' में जिला पुलिस अधीक्षक को भी जोड़ा जाएगा. जिला स्तरीय समूह संबंधित वरीय पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक बनाएंगे. जिला स्तरीय समूह में अन्य व्यक्तियों के साथ क्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षक भी सदस्य होंगे.
कौन कौन होंगे या ग्रुप के एडमिन और मेंबर
इस साइबर सेनानी समूहों में जिम्मेवार नागरिक सदस्य होंगे. जो सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित नकारात्मक और भ्रामक संदेशों का खंडन करेंगे. इन समूहों के प्रत्येक सदस्य को 'साइबर सेनानी' के नाम से जाना जाएगा. इस तरह राज्य के 1075 थानों, 225 ओपी, 115 अनुमंडलों, 44 जिलों में साइबर सेनानी पुलिस के साथ मिलकर साइबर जगत को उपयोगी और सुरक्षित बनाने में योगदान देंगे.






















