बिहार: महागठबंधन में बना दो गुट, मांझी ने आरजेडी को अल्टीमेटम देते हुए कर दी ये मांग
आरजेडी तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर चुकी है लेकिन महागठबंधन में इस बात पर सहमति नहीं बन पा रही है. बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं.

पटना: बिहार महागठबंधन में दबाव की राजनीति ने जोर पकड़ लिया है. रविवार को आरएलएसपी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने बैठक कर साफ कहा था कि अभी महागठबंधन में मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं हुआ है. वहीं सोमवार को महागठबंधन के तीन मुख्य घटक के नेताओं की बैठक हुई. हम पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और वीआईपी पार्टी के नेता मुकेश सहनी की बैठक हुई. इन तीनों नेताओं ने एक बार फ़िर माहगठबंधन में को-ऑर्डिनेशन कमिटी की मांग की. बैठक करीब एक घंटे तक चली. बैठक के बाद जीतन राम मांझी ने सीधे कहा कि हमारी बात नहीं मानी जा रही है. ऐसे में निर्णय तो लेना ही होगा.
जीतन राम मांझी ने कहा, "उपेंद्र कुशवाहा, मुकेश सहनी और हम तीनों ये विचार करने के लिए बैठे थे कि अब क्या होगा. जब हम तीनों को-ऑर्डिनेशन कमिटी की मांग कर रहे हैं. कांग्रेस भी इसमे सहमत है तो इसके बाद भी आरजेडी इस पर मौन है. लालू यादव जी जो कहेंगे वही होगा.’’
मांझी ने कहा कि इसी को लेकर बात हो रही थी. अगर लालू यादव से बात करने का मौका मिलता है तो उनसे सारी बातें बताएंगे. इसके बाद भी अगर को-ऑर्डिनेशन कमिटी की बात नहीं बनी तो इस पर सोचेंग कि क्या करना है.
बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के सभी घटक दल एक साथ मिलकर चुनाव लड़े थे लेकिन भारी हार हुई थी. चुनाव नतीजों के बाद से ही महागठबंधन बिखरने लगा था. आरजेडी ने तेजस्वी यादव को बिहार विधान सभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया है. ऐसे में महागठबंधन के भविष्य पर टूट के बादल मंडराने लगे हैं.
वहीं कौंग्रेस पार्टी में भी राज्य सभा का एक सीट नहीं दिए जाने से नाराज है लेकिन बिहार कौंग्रेस किसी तरह का फैसला लेने को स्वतंत्र नहीं है. सब कुछ आलाकमान पर निर्भर करता है. पार्टी नेता यह ज़रूर कह रहे हैं कि माहगठबंधन की बैठक में ही सीएम पद का चेहरा तय हो सकता है. जो आलाकमान कहेगा उसे ही मानेंगे.
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