शराबबंदी का पोस्ट करना पड़ा महंगा, बिहार के DGP सोशल मीडिया पर हुए ट्रोल
लोगों के रिएक्शन और कॉमेंट को देखने से स्पष्ट होता है कि भले ही सरकार पूर्ण शराबबंदी को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही हो पर हकीकत कुछ और है. लोग स्पष्ट रूप से अपना ग़ुस्सा दिखा रहे हैं.

पटना: बिहार में 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू है. पूर्ण शराबबंदी लागू हुए लगभग साढ़े तीन साल बीत चुके हैं पर आए दिन छापेमारी में शराब की बड़ी खेप पुलिस को हाथ लगती है. हालांकि शराबबंदी को लेकर नीतीश सरकार अपनी पीठ खुद थपथपा रही है. सीएम नीतीश कुमार इन दिनों जनजीवन हरियाली यात्रा पर हैं. पर्यावरण को लेकर जागरूक करने वाली जनजीवन हरियाली यात्रा के कार्यक्रम में मंगलवार को हिस्सा लेने कैमूर में पहुंचे नीतीश कुमार ने शराबबंदी को लेकर कहा, बिहार के सफल शराबबंदी को देख राजस्थान व अन्य राज्य बिहार आकर सर्वेक्षण कर रहे हैं कि कैसे हमने बिहार में पूर्ण शराबबंदी को सफल बनाया. वहीं दूसरी तरफ़ आम जन में इस सफल शराबबंदी को लेकर खासा रोष व्याप्त है और इसका उदाहरण बिहार डीजीपी के फेसबुक पेज को खंगालने से पता चलता है.
दरअसल, बिहार सरकार पूर्ण शराबबंदी को सफल बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है इसके लिए जो भी आवश्यक कदम है उठाया जा रहा है. इसी वजह से बिहार डीजीपी के सरकारी फेसबुक पेज आईपीएस गुप्तेश्वर पांडेय के नाम पर जो चलाया जा रहा है उससे 16 दिसंबर को तकरीबन डेढ़ बजे शराबबंदी को लेकर एक पोस्ट जारी किया गया है. अबतक उस पोस्ट पर तकरीबन सात हजार लोगों ने रिएक्ट किया है और एक हजार से अधिक लोगों ने कॉमेंट किया है. 338 लोगों ने उसे साझा किया है. लोगों के रिएक्शन और कॉमेंट को देखने से स्पष्ट होता है कि भले ही सरकार पूर्ण शराबबंदी को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही हो पर हकीकत कुछ और है.
यही कारण है कि ये फेसबुक पोस्ट डीजीपी को महंगा पड़ रहा है. लोगों ने इस पोस्ट पर डीजीपी की जमकर खिंचाई की है. लोग स्पष्ट रूप से अपना ग़ुस्सा दिखा रहे हैं. इस संदर्भ में लोग डीजीपी को ही कह रहे हैं कि उन्हें अगर शराब की आवश्यकता है तो वो केवल ब्रांड और जगह बता दें वो उन्हें उपलब्ध करा सकते हैं. एक यूज़र ने तो ये कह दिया कि पूरे बिहार को छोड़ आप केवल राजधानी की बात करे तो यहां पर शराब की होम डिलीवरी होती है.
Source: IOCL
























