CM योगी के दौरे से पहले अयोध्या में परमहंस रामचंद्र दास की समाधि पर विवाद
इस विवाद में एक तरफ हैं परमहंस रामचंद्र दास के उत्तराधिकारी और दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास और दूसरी तरफ हैं रामचंद्र दास के शिष्य नारायण मिश्र. रामचंद्र दास के दोनों शिष्यों में समाधिस्थल पर कब्जे के लिए खींचतान मची हुई है.

अयोध्या: यूपी के अयोध्या में परमहंस रामचंद्र दास की जिस समाधि पर आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ श्रद्धांजलि देने आ रहे हैं, उस पर कब्जे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. ये विवाद परमहंस रामचंद्र दास के ही दो शिष्यों के बीच शुरू हो गया है. दोनों पक्ष समाधिस्थल पर अपनी दावेदारी जता रहे हैं.
इस विवाद में एक तरफ हैं परमहंस रामचंद्र दास के उत्तराधिकारी और दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास और दूसरी तरफ हैं रामचंद्र दास के शिष्य नारायण मिश्र.
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रामचंद्र दास के दोनों शिष्यों में समाधिस्थल पर कब्जे के लिए खींचतान मची हुई है. नारायण मिश्र का कहना है कि 26 जुलाई 2003 को परमहंस रामचंद्र दास के निधन के बाद से उनकी समाधि उपेक्षित पड़ी थी. जिस पर उन्होंने 2015 में कमरा बनवाकर पूजा-पाठ शुरू करवाया, लेकिन अब महंत सुरेश दास उन्हें यहां से भगाना चाहते हैं.
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वहीं दिगंबर अखाड़े के मौजूदा महंत सुरेश दास का कहना है कि उनके गुरु परमहंस रामचंद्र दास दिगंबर अखाड़े के महंत थे, लिहाजा उनकी समाधि भी अखाड़े की मिल्कियत है. नारायण मिश्र का उस पर कोई हक नहीं है.
नारायण मिश्र समाधि को अखाड़े की मिल्कियत मानने को तैयार नहीं हैं. इतना ही नहीं, वो सुरेश दास पर जान से मारने की धमकी देने का आरोप भी लगा रहे हैं. लेकिन सुरेश दास पर नारायण मिश्र के दावों और आरोपों को कोई महत्व नहीं देते. उनका कहना है कि दिगंबर अखाड़ा जब चाहेगा नारायण मिश्र को उठाकर बाहर कर देगा.
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