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दिल्ली में MCD चुनाव: बीजेपी से टिकट पाने वाले पसमांदा मुसलमान प्रत्याशियों का क्या है एजेंडा?

दिल्ली नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने भविष्य की रणनीति को ध्यान में रखते हुए पसमांदा मुस्लिम समाज से 4 प्रत्याशियों को टिकट दिया है.

राजधानी में दिल्ली नगर निगम चुनाव को लेकर नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. 14 नवंबर तक सभी राजनीतिक पार्टियों के उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ने के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया. बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने निगम के सभी 250 वार्डो पर अपने उम्मीदवारों के नामों का एलान कर दिया.

लेकिन इसी बीच निगम चुनाव के लिए बीजेपी की ओर से जारी की लिस्ट चर्चा में बनी हुई है क्योंकि पार्टी ने निगम चुनाव के लिए 250 सीटों में से 4 सीटों पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को उतारा है और ये चारों प्रत्याशी पसमांदा मुसलमान हैं और  इनमें से 3 महिला उम्मीदवार भी हैं.

बीजेपी ने निगम चुनाव में मुस्तफाबाद के वार्ड नंबर 243 से शबनम मलिक, चांदनी महल के वार्ड नंबर 76 से इरफान मलिक, कुरैश नगर वेस्ट के वार्ड नंबर 81 से शमीना रजा और चौहान बांगर के वार्ड नंबर 227 से सबा गाजी को उम्मीदवार बनाया है.

बता दें कि बीजेपी पिछले काफी समय से पसमांदा मुसलमानों में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगी हुई है. बीजेपी से जुड़े कई वरिष्ठ नेता पिछले काफी समय से इस समुदाय के लोगों से संपर्क करने में जुटे है.

इसी साल शुरुआत में हैदराबाद में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पसमांदा मुसलमानों का जिक्र किया था जिसमें उन्होंने मुस्लिम समुदाय के इस कमजोर वर्ग के विकास और उन्नति की बात कही थी.

बीजेपी यूपी में पसमांदा मुसलमानों को लेकर सम्मेलन भी कई जिलों में कर रही है. इन सम्मेलनों के जरिए बीजेपी नेता लगातार संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे ही पसमांदा मुसलमानों के सच्चे शुभचिंतक हैं.

बीजेपी का दिल्ली में प्रयोग?
बीजेपी दिल्ली नगर निगम चुनाव में पसमांदाओं को लेकर यह रणनीति आजमाना चाह रही है. जिसके लिए निगम के 250 वार्डों पर 4 पसमांदा मुसलमानों को टिकट बांटे गए हैं. इसको लेकर राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और दिल्ली स्टेट अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रभारी आतिफ रशीद ने एबीपी को बताया कि पार्टी ने निगम चुनाव में 4 मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में उतारें हैं. ये भी पसमांदा समाज से आते हैं, बीजेपी का कदम स्वागत योग्य है.

उनका कहना है कि इससे इस समाज के मुसलमानों में जहां एक तरफ आत्मविश्वास बढ़ेगा तो, वहीं दूसरी तरफ देश के प्रति समर्पण की भावना भी आएगी.  साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पसमांदा मुस्लिम समुदाय की और बढ़ाए जा रहे कदम को ओर बल देगा और जो समुदाय अब तक केवल वोटबैंक के रूप मे इस्तेमाल किया जा रहा था. अब वो बीजेपी सरकार में नेतृत्व करने की भूमिका निभाएगा.

इसके साथ ही निगम चुनाव के लिए नार्थ ईस्ट दिल्ली के चौहान बांगर से बीजेपी उम्मीदवार सबा गाजी ने एबीपी से बात करते हुए कहा कि वो पहली बार चुनाव लड़ रही हैं इससे पहले वो बीजेपी के साथ जुड़कर समाज के लोगों के लिए कई काम करती आईं हैं. उनका कहना है कि पसमांदा समाज के लोगों को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी ही नहीं है. ये लोग पिछड़े हुए हैं.  इस भेदभाव के लिए कहीं ना कहीं ऊंची जाति के मुसलमान जिम्मेदार हैं. सबा कहती हैं कि उनके वार्ड में पसमांदा मुस्लिम समाज की संख्या 3 हजार से ज्यादा हैं और अधिकतर लोग अपने अधिकारों को लेकर जागरुक ही नहीं है. इलाके में साफ-सफाई को लेकर गंभीर समस्या है. 


दिल्ली में MCD चुनाव: बीजेपी से टिकट पाने वाले पसमांदा मुसलमान प्रत्याशियों का क्या है एजेंडा?

इसके साथ ही नार्थ दिल्ली के कुरैश नगर वेस्ट से बीजेपी उम्मीदवार समीना रजा अपनी उम्मीदवारी को लेकर प्रधानमंत्री को धन्यवाद करते हुए कहती हैं कि पसमांदा मुस्लिमों को हमेशा से समाज में हीन भावना से देखा जाता है. वोभी पसमांदा समाज से आती हूं लेकिन बीजेपी ने हमारे समाज को आगे लाने का काम किया है. अपने इलाके की समस्याएं बताते हुए समीना कहती हैं इलाके में बिजली, पानी, गंदगी और सड़कों की खस्ता हालत को लेकर बड़ी समस्या है. 12 वीं तक पढ़ी समीना का कहना है कि वो अगर इस वार्ड में जीतकर आती हैं तो अपने समाज के लोगों के विकास को लेकर काम करेंगी.


दिल्ली में MCD चुनाव: बीजेपी से टिकट पाने वाले पसमांदा मुसलमान प्रत्याशियों का क्या है एजेंडा?

दिल्ली के मुस्तफाबाद से बीजेपी उम्मीदवार शबनम मलिक जो पहली बार चुनाव लड़ रही हैं. 12वीं तक पढ़ी शबनम कहती हैं कि उनके वार्ड में 90 फीसदी तक पसमांदा मुस्लिम आबादी है. लेकिन आज तक यहां जितने भी नेता या पार्षद रहें हैं उन्होंने उनके लिए कोई काम नहीं किया.केवल उन्हें एक वोटबैंक के तौर पर इस्तेमाल किया है. लेकिन बीजेपी ने हमे भरोसा दिलाया है कि वो हमारे समाज के विकास को लेकर काम करेगी.


दिल्ली में MCD चुनाव: बीजेपी से टिकट पाने वाले पसमांदा मुसलमान प्रत्याशियों का क्या है एजेंडा?

अपनी इलाके की मुख्य समस्याएं बताते हुए शबनम कहती हैं कि यहां कोई सामुदायिक भवन, पार्क, डिस्पेंसरी, मोहल्ला क्लीनिक जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं. जिससे लोगों को काफी परेशानी रहती हैं अगर वो जीतकर आती हैं तो वो इसको लेकर काम करेगीं और पसमांदा मुस्लिमों के लिए सामुदायिक भवन और डिस्पेंसरी बनवाने काम करेंगी

पसमांदा मुस्लिमों  के हितों को लेकर दावा कर रही बीजेपी पर निगम चुनाव में केवल 4 मुस्लिम उम्मीदवार उतारे जाने को लेकर भी विपक्ष सवाल उठा रहा है, जिसको लेकर बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज यासिर जिलानी का कहना है कि समाज के पिछड़े वर्ग को लेकर बीजेपी लगातार काम कर रही है. जन धन योजना हो या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना और उज्जवला योजना जैसी योजनाओं के जरिए समाज के इस पिछड़े वर्ग को लाभ पहुंचाने का काम किया गया है. मुस्लिम समाज के पिछड़े वर्ग को आगे ले जाने का काम बीजेपी कर रही है.

उन्होंने बताया कि मुस्लिम समाज में पिछड़े वर्ग की संख्या ज्यादा है जिसके विकास को लेकर बीजेपी ने काम किया है. उन्होंने कहा कि जो लोग ये कहते थे कि बीजेपी मुस्लिम लोगों को टिकट ही नहीं देती हैं ये उन लोगो के मुंह पर तमाचा हैं, वो लोग खुद मुसलमानों के लिए कितना काम कर रहें हैं उसपर बात करें, तुष्टिकरण की राजनीति ना करें.

दिल्ली के चांदनी महल से बीजेपी के पसमांदा मुस्लिम उम्मीदवार इरफान मलिक का कहना है कि वो प्रधानमंत्री जी के सबका साथ, सबका विकास वाले अभियान को लेकर काम करेंगे. क्योंकि बीजेपी ने पसमांदा मुसलमानों के विकास का मुद्दा उठाया है. इरफान मलिक का कहना है कि अगर वो इस वार्ड से जीतकर आते हैं तो वो अपने इस समाज को आगे लेकर जाएंगे. उन्होंने कहा कि हमारे वार्ड में सबसे बड़ी समस्या पानी की है, यहां जल बोर्ड का पानी नहीं आता, बोरिंग के पानी पर लोग निर्भर हैं, जिसके चलते लोगों को कई बिमारियां हो रही हैं. इसके साथ ही इलाके में अच्छे स्कूल और अस्पताल की सुविधा नहीं है. ट्रेफिक की भारी समस्या रहती है.

कौन होते हैं पसमांदा मुसलमान?
पसमांदा शब्द फारसी भाषा से लिया गया है जिसका हिंदी में मतलब होता है, पिछड़ा. मुसलमानों में इस शब्द का इस्तेमाल उन जातियों के लिए किया जाता है जो समाजिक रूप से पिछड़े या अपने कई अधिकारों से वंचित होते हैं.और मुस्लिम समाज में तीन वर्ग होते हैं. जिनमें अशराफ,अजलाफ और अरजाल शामिल हैं.

मुसलमानों की सामाजिक और आर्थिक हैसियत के हिसाब से ये वर्ग बांटे गए हैं.अशराफ मुसलमानों को एक तरह से ऊंची जाति वाला माना जाता है.जो मुस्लिम राजाओं के वंशजों से ताल्लुक रखते हैं.इनके बारे में कहा जाता है कि इनमें वो लोग शामिल हैं जो हिंदुओं की ऊंची जातियों में थे लेकिन बाद में  मुसलमान बन गए.इस वर्ग की मुस्लिम समाज में हमेशा से आर्थिक और सामाजिक हैसियत ज्यादा रही है.इस वर्ग में सैय्यद, शेख, सिद्दीक़ी, मुग़ल और पठान जातियां शामिल हैं.

इसके अलावा मुस्लिम समाज में अजलाफ और अरजाल समुदाय के लोगों को पसमांदा में शामिल किया गया है. यानि की वो लोग जो पीछे छूट गए हैं.मुस्लिम समाज की पसमांदा बिरादरी में कई जातियों शामिल हैं जिनमें क़साई, नाई, तेली, धोभी, मोची, सकके, लुहार, बढ़ई, धुनें, रंगरेज़, गाड़ा, झोझा, राईन, रंगरेज़, बंजारे फकीर, वन ग़ुज्जर, कसगर, नट, डोम, मिरासी शामिल हैं. अंसारी पसमांदा समाज में सबसे ऊंची जाति है.

पसमांदा मुस्लिमों को अपनी पकड़ मजबूत कर रही बीजेपी मुस्लिम समाज के इस वर्ग को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए बीजेपी पिछले कई महीनों से काम कर रही है. पिछले दिनों इस समाज के लोगों से जुड़ने को लेकर कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए. उत्तर प्रदेश में भी बीजेपी ने पसमांदा मुसलमानों के बीच कई सम्मेलन किए. यूपी के रामपुर में पसमांदा मुस्लिमों की काफी ज्यादा संख्या है और बीजेपी की मानना है कि रामपुर में हुए लोकसभा उपचुनाव में पसमांदा समाज का अच्छा समर्थन मिला था. बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की मानें तो मुस्लिम बंजारा समुदाय के लोगों ने बीजेपी को एकतरफा वोट दिया था, जिसके चलते बीजेपी ने आजम खान के गढ़ पर जीत का परचम लहराया.

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