Explained: सुपर अल नीनो के बावजूद भारत में 95% बादल क्यों, क्या MP-UP में अलर्ट के साथ हुई मानसून की मरम्मत?
Monsoon Update: अल नीनो एक बड़ी जलवायु घटना है, जो महीनों के पैमाने पर मानसून पर असर डालती है. बादल और बारिश क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों पर निर्भर करते हैं, जो कुछ दिनों के लिए एक्टिव होती हैं.

जुलाई 2026 में भारत के मौसम ने सारे अंदाजों को उलट दिया है. एक तरफ प्रशांत महासागर में 'गॉडजिला' या 'सुपर अल नीनो' एक्टिव है, जो आमतौर पर भारत में सूखा और कम बारिश लाता है. इसके बावजूद, ISRO और IMD के सैटेलाइट इमेज में देश के 95% हिस्से पर घने बादल छाए हुए हैं. मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, हिमाचल, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है. आखिर सुपर अल नीनो के दौरान इतने बादल और बारिश क्यों हो रही है...
मौसम के बदले मिजाज की 3 बड़ी वजहें हैं...
पहली वजह: अल नीनो बनाम क्षेत्रीय मौसम
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, अल नीनो एक बड़ी जलवायु घटना है, जो महीनों के पैमाने पर मानसून पर असर डालती है. बादल और बारिश क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों पर निर्भर करते हैं, जो कुछ दिनों के लिए एक्टिव होती हैं.
सुपर अल नीनो में नीनो 3.4 क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान +2.0 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा हो जाता है. यह वॉकर सर्कुलेशन को बदल देता है. इससे गर्म पानी पूर्व की ओर खिसक जाता है और शुष्क हवा भारत पर हावी हो जाती है. यही वजह है कि IMD ने 2026 के मानसून को सामान्य का सिर्फ 90-92% रहने का अनुमान लगाया था. जून में 20% से ज्यादा बारिश की कमी आई. लेकिन जुलाई के तीसरे हफ्ते में क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों ने अल नीनो के सूखे प्रभाव को अस्थायी रूप से काबू कर लिया.
दूसरी वजह: चक्रवाती परिसंचरण और मानसून ट्रफ
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के मुताबिक, कई अपर-एयर साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव हैं. हरियाणा, पूर्वोत्तर मध्य प्रदेश और दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर. साथ ही बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बन गया है. ये सभी सिस्टम मानसून ट्रफ के जरिए जुड़े हुए हैं, जो इंडो-गंगेटिक मैदानों पर अपनी सामान्य स्थिति में लौट आया है.
यह पूरा तंत्र दोनों समुद्रों अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींचकर पूरे भारत में बादल बना रहा है. मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, ये चक्रवाती परिसंचरण 'नमी के पंप' की तरह काम कर रहे हैं.
तीसरी वजह: गर्मी, पश्चिमी विक्षोभ और IOD
इससे पहले देश के कई हिस्सों में तीव्र गर्मी पड़ी, जिससे हीट डोम बने. तापमान के अंतर ने उथले लेकिन तीव्र निम्न दबाव क्षेत्र बनाए. ये वायुमंडलीय वैक्यूम की तरह काम कर रहे हैं, जो अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींच रहे हैं. यह नमी तेजी से ऊपर उठकर मध्य, उत्तरी और पश्चिमी भारत में संवहनी बादल बना रही है.
इसके अलावा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस उत्तराखंड, हिमाचल, पंजाब और हरियाणा में नमी-युक्त मानसूनी हवाओं के साथ टकरा रहे हैं. इस टक्कर से भारी बारिश हो रही है. हिंद महासागर द्विध्रुव (IOD) फिलहाल तटस्थ चरण में है, इसलिए वह न तो मदद कर रहा है और न ही रोक रहा है.
देशभर के राज्यों में कितनी बारिश हो रही है?
IMD के 22 जुलाई 2022 के बुलेटिन के मुताबिक:
| राज्य | बारिश (24 घंटे में) |
| पश्चिम बंगाल | आलिपुरद्वार के चेपन में सबसे ज्यादा बारिश. कोलकाता में 3 सेंटीमीटर बारिश भारी बारिश का अलर्ट. 22-24 जुलाई तक दक्षिण बंगाल के कई जिलों में भारी बारिश की संभावना. |
| हिमाचल प्रदेश | धर्मशाला, रेणुका, बिलासपुर सादर में 50 मिमी (5 सेंटीमीटर) बारिश के साथ ऑरेंज अलर्ट. 7 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी. 22-27 जुलाई तक लगातार बारिश का अनुमान. |
| उत्तराखंड | उत्तराखंड में येलो अलर्ट. उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भारी बारिश की चेतावनी. |
| गुजरात | वलसाड में 10 घंटे में 243 मिमी (24.3 सेंटीमीटर) बारिश रेड अलर्ट. नवसारी और वलसाड में अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी. |
| मध्य प्रदेश | मकसूदनगढ़ में 17 सेंटीमीटर (170 मिमी) बारिश ऑरेंज अलर्ट. शिवपुरी, गुना, सागर, दिंडोरी में 100-200 मिमी (4-8 इंच) बारिश की संभावना. |
| उत्तर प्रदेश | चुर्क में 33.2 मिमी, कानपुर में 22 मिमी, झांसी में 19.2 मिमी व्यापक बारिश का अलर्ट. 23 जुलाई को पूर्वी यूपी में भारी बारिश. |
असम में 22 जुलाई 2026 तक राज्य के 11 जिलों में बाढ़, 6.53 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित, 24 घंटे में 10 से ज्यादा लोगों की मौत और 939 गांव पर असर हुआ है. कुल मिलाकर 40 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
जम्मू-कश्मीर में पुंछ, राजौरी और डोडा में 23 लोगों की मौत, अमरनाथ और वैष्णो देवी यात्रा रुक गई है. 26 जुलाई तक स्कूल बंद कर दिए गए हैं. तवी नदी उफान पर है और फ्लैश फ्लड का अलर्ट जारी कर दिया गया है.
तो क्या यह मान लें कि मानसून ठीक हो गया?
मौसम एक्सपर्ट्स का कहना है कि 95% बादलों का मतलब मानसून के ठीक हो जाने से नहीं है. बारिश की कमी पूरे मानसून सीजन (जून-सितंबर) के हिसाब से मापी जाती है, न कि कुछ दिनों के हिसाब से. कुछ दिनों की भारी बारिश हफ्तों की कमी को पूरा नहीं कर सकती है.
अल नीनो अभी भी एक्टिव है और 2027 की शुरुआत तक रहेगा. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है, 'अल नीनो और मानसून एक ही घड़ी पर काम नहीं करते.' जुलाई का यह हफ्ता भले ही बादलों और बारिश से भरा हो, लेकिन पूरे सीजन का नजरिया अभी भी सूखे का है. IMD का कहना है कि जुलाई का महीना 94% से कम बारिश के साथ खत्म हो सकता है. 22 जुलाई 2026 तक देश में 21-23% की कमी बनी हुई है.
असली बात यह है कि अल नीनो सीजन का पैटर्न तय करता है, हर हफ्ते का मौसम नहीं. इस हफ्ते क्षेत्रीय सिस्टम ज्यादा मजबूत निकले, इसलिए बादल छाए और बारिश हुई. लेकिन जैसे ही ये सिस्टम कमजोर होंगे, अल नीनो का सूखा असर वापस आ सकता है.
मौसम की असल तस्वीर क्या कहती है?
सुपर अल नीनो के बावजूद 95% बादल इसलिए हैं, क्योंकि क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों ने अल नीनो के सूखे प्रभाव को काबू कर लिया है. हालांकि, यह हमेशा की राहत नहीं है. IMD ने पहले ही 2026 का मानसून सामान्य से कम (90-92%) रहने का अनुमान लगाया है. जून में 20% से ज्यादा की कमी आ चुकी है. असम में 40 से ज्यादा मौतें और जम्मू-कश्मीर में 23 मौतें भयंकर बारिश का संकेत हैं.
























