मुंबई-दिल्ली से पढ़ाई, म्यूजिक का शौक... कौन हैं पेटल गहलोत, जिन्होंने UN में पाकिस्तान को जमकर धोया
UNGA में भारत की युवा राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान को आतंकवाद पर कड़ा जवाब देते हुए कहा कि उसकी विदेश नीति का केंद्र अब भी आतंकी संगठन हैं.

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर किया. भारत की युवा राजनयिक और भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी पेटल गहलोत ने राइट टू रिप्लाई का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाषण को झूठ का पुलिंदा बताया. गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति का केंद्र आज भी आतंकवाद और आतंकी संगठन हैं. उन्होंने साफ कहा कि पाकिस्तान के नेता आतंकवादियों का महिमामंडन करते हैं और निर्दोष नागरिकों पर हमलों के लिए भारत पाकिस्तान को जिम्मेदार मानता है.
गहलोत ने ओसामा बिन लादेन को पाकिस्तान में पनाह देने की याद दिलाई और हालिया ऑपरेशन सिंदूर पर शहबाज शरीफ के बयान को विचित्र और झूठा करार दिया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान 9 मई को भारत को धमकी दे रहा था और अगले ही दिन उसकी सेना संघर्षविराम की गुहार कर रही थी. भारत ने स्पष्ट किया कि वह आत्मरक्षा का अधिकार सुरक्षित रखता है और किसी भी हमले का जवाब देगा.
UNGA में पाकिस्तान को सीधा संदेश
पेटल गहलोत ने UNGA में पाकिस्तान को यह सीधा संदेश दिया कि अगर वह वास्तव में शांति चाहता है तो उसे अपने देश में सक्रिय सभी आतंकी संगठनों को बंद करना होगा और भारत के वॉन्टेड आतंकियों को सौंपना होगा. यह भारत की ओर से एक मजबूत कूटनीतिक संदेश था जिसने पाकिस्तान के आतंकवाद पर पर्दा उठाया.
कौन हैं पेटल गहलोत?
नई दिल्ली में जन्मी पेटल गहलोत सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई से राजनीति विज्ञान में ग्रैजुएट हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में एमए कर चुकी हैं. वह 2015 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी हैं. उन्होंने विदेश मंत्रालय में सहायक सचिव के रूप में सेवा दी, पेरिस स्थित भारतीय दूतावास में तृतीय और द्वितीय सचिव रहीं और सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास में काउंसल के रूप में कार्य किया. राजनयिक होने के साथ-साथ पेटल गहलोत कला और संगीत की शौकीन भी हैं. उन्हें गिटार बजाना और गाना पसंद है. अपने खाली समय में वह अक्सर संगीत में खो जाती हैं.
पाकिस्तान को करारा जवाब
पेटल गहलोत का UNGA में यह भाषण केवल पाकिस्तान को करारा जवाब नहीं था, बल्कि यह भी साबित करता है कि भारत की युवा पीढ़ी की कूटनीतिक क्षमता कितनी मजबूत है. उनकी दृढ़ता ने भारत की वैश्विक छवि को और सशक्त किया और यह संदेश दिया कि भारत अब आतंकवाद और झूठे आरोपों के सामने चुप नहीं बैठेगा.
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