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Explained: बादल, आंधी, तूफान... लेकिन बारिश क्यों नहीं? जून में 42% कम गिरा पानी, कितने गंभीर होंगे नतीजे?

Monsoon 2026: 42% बारिश की कमी सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है. इसके पीछे करोड़ों किसानों की चिंता, शहरों में पानी की किल्लत, बिजली की कटौती, बढ़ती महंगाई और सुस्त होती अर्थव्यवस्था है.

इस बार मानसून ने देश में दस्तक तो 4 जून को दे दी, लेकिन उसके बाद ऐसा लग रहा है मानो वह कहीं ठिठक गया हो. बादल छा रहे हैं, गरज भी रहे हैं, लेकिन बरस नहीं रहे. देशभर में जून महीने की सामान्य बारिश 72.2 मिलीमीटर होती है, लेकिन इस बार 4 से 18 जून के बीच सिर्फ 42.1 मिलीमीटर बारिश हुई है यानी 42 फीसदी की कमी. सबसे बुरा हाल मध्य भारत का है, जहां बारिश की कमी 62 से 65 फीसदी तक पहुंच गई है. गुजरात में तो हालात और भी खराब हैं. वहां 91 फीसदी की भारी कमी दर्ज की गई है. महाराष्ट्र में 79 फीसदी, झारखंड में 66 फीसदी और छत्तीसगढ़ में 65 फीसदी बारिश कम हुई है. सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है. बादल तो हैं, गरज भी है, लेकिन बारिश क्यों नहीं हो रही...

क्यों गरज रहे हैं बादल, लेकिन बरस नहीं रहे?

आमतौर पर जून के मध्य तक मानसून पूरे देश में फैल जाता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो पाया. भारतीय मौसम विभाग (IMD) इसकी 5 बड़ी वजहें बताता है:

1.अल नीनो: सबसे बड़ा दुश्मन

प्रशांत महासागर में समुद्र का पानी गर्म हो रहा है, जिसे आसान भाषा में अल नीनो कहते हैं. अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने 11 जून को इसकी पुष्टि कर दी थी. अल नीनो मानसून को कमजोर करता है, जिससे हवाओं की दिशा बदल जाती है और नमी कम आती है. ये बारिश की कमी का सबसे बड़ा कारण है. IMD ने भी 2026 के मानसून को 'सामान्य से कम' (लॉन्ग पीरियड एवरेज का करीब 90%) रहने का अनुमान लगाया है.

2. सोमाली जेट कमजोर: नमी का 'पाइप' बंद

सोमाली जेट हवाओं का एक तेज बहाव है, जो अफ्रीका के पूर्वी तट से अरब सागर तक नमी पहुंचाता है. ये मानसून का ईंजन है. लेकिन इस बार पछुआ जेट स्ट्रीम सामान्य से कहीं ज्यादा दक्षिण की ओर खिसक गई है. इससे पूर्वी जेट स्ट्रीम दब गई है, जो बादलों के निर्माण और गरज-चमक के लिए जरूरी है. नतीजतन, हवा में नमी तो है, लेकिन बादल बन ही नहीं पा रहे.

3. अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों शाखाएं कमजोर

मानसून की दो शाखाएं होती हैं- अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा. इस बार दोनों ही कमजोर हैं. अरब सागर शाखा कमजोर और बिखरी हुई है. पश्चिमी तट पर बड़े पैमाने पर बादलों का झुंड बन ही नहीं पा रहा. वहीं, बंगाल की खाड़ी शाखा में यह सिर्फ छिटपुट गरज-चमक पैदा कर रही है, लेकिन झमाझमा बारिश नहीं ला पा रही.

4. शुष्क हवा की घुसपैठ

उत्तर और उत्तर-पश्चिम से सूखी हवा देश के अंदर आ रही है. इस शुष्क हवा ने बादलों को बनने से रोक दिया है. बादल बनेंगे तभी जब नमी होगी, लेकिन सूखी हवा नमी को अंदर नहीं आने दे रही. गुजरात के ऊपर तो बड़े हिस्सों में बिल्कुल भी बादल नजर नहीं आ रहे.

5. पश्चिमी विक्षोभ का दखल

पश्चिमी विक्षोभ ने बादलों को उत्तर भारत और हिमालय के पास ही रोककर रखा है. बादल वहीं जमा हैं, जबकि मध्य भारत और पश्चिमी तट पर बादल ही नहीं हैं. INSAT-3DR सैटेलाइट की 18 जून की तस्वीर में सबसे घने बादल पश्चिमी हिमालय और उससे जुड़े उत्तरी इलाकों में दिख रहे हैं. जबकि मध्य भारत, महाराष्ट्र, गुजरात और ज्यादातर मानसून कोर जोन में बादल नहीं हैं.

बारिश की कहां-कहां और कितनी कमी है?

18 जून 2026 तक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक:

राज्य/इलाके स्थिति
मध्य भारत 62-65% कमी
गुजरात 91% कमी
महाराष्ट्र 79% कमी
झारखंड 66% कमी
छत्तीसगढ़ 65% कमी
पूर्वोत्तर लगभग 40% कमी
दक्षिण भारत सिर्फ 4% कमी
उत्तर-पश्चिम 13% ज्यादा बारिश

मुंबई इस साल अपने 11 जून की सामान्य तारीख के बावजूद अब तक सूखा है. पिछले एक दशक में ये सबसे सूखा जून हो सकता है.

कम बारिश का क्या असर होगा?

बारिश की इस कमी का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं है. यह खेती, पानी और महंगाई तक जाएगा:

  • खेती पर संकट: मानसून देश की 75% बारिश लाता है. खरीफ फसलों (धान, कपास, सोयाबीन) की बुआई के लिए जून की बारिश बेहद जरूरी है. लेकिन कम बरसात की वजह से किसानों को बुआई रोकनी पड़ रही है.
  • पानी की किल्लत: नदियों, जलाशयों और तालाबों का स्तर गिर रहा है. मुंबई में 12 साल बाद पानी की कटौती शुरू कर दी गई है.
  • महंगाई का डर: अगर फसलें खराब हुईं तो खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ जाएंगे. फूड इन्फ्लेशन का खतरा: कम उत्पादन से सब्जियों, दालों और तिलहन की सप्लाई बाधित होगी. एक्सपर्ट्स का कहना है कि फूड इन्फ्लेशन 5% के स्तर पर पहुंच सकता है. ठीक वैसे ही जैसे 2015 के मजबूत अल नीनो साल में हुआ था.
  • हाइड्रो पावर पर संकट: बारिश कम होने से नदियों का जलस्तर घटता है और हाइड्रो पावर पर गहरा असर पड़ता है. केरल में KSEB के जलाशयों में स्टोरेज 21 फीसदी पर आ गया है. केरल सरकार ने 17 से 30 जून तक रात 6 से 12 बजे तक बिजली कटौती लागू कर दी है. राज्य में 14 फीसदी बारिश की कमी है और अगर सूखा जारी रहा तो बांध सूख सकते हैं. इसके अलावा पूरे देश में बिजली की मांग बढ़ी है. गर्मी और एसी के बढ़ते इस्तेमाल ने देश की बिजली की पीक डिमांड को 270 GW के पार पहुंचा दिया है. जब हाइड्रो पावर कम होगी, तो कोयला और गैस पर निर्भरता बढ़ेगी, जिससे बिजली महंगी हो सकती है.

आखिर कब होगी बारिश?

अच्छी खबर ये है कि मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, हालात बदलने के संकेत मिल रहे हैं:

  • 20 जून 2026 से: अरब सागर के ऊपर नमी बढ़ने लगेगी. सोमाली जेट मजबूत हो सकती है.
  • 22-23 जून 2026: बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की उम्मीद है. ये मानसून को आगे बढ़ाने के लिए काफी है.
  • 23 जून 2026: पश्चिमी तट (महाराष्ट्र, गुजरात) पर मानसून आगे बढ़ सकता है.
  • 25 जून के आसपास: मुंबई में मानसून पहुंच सकता है.

हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इतनी बड़ी कमी को पूरा करना मुश्किल होगा. जून की कमी 40-45 फीसदी तक जा सकती है.

क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

IMD के डायरेक्टर डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा, 'फिलहाल अरब सागर के ऊपर नमी कमजोर है, 23 जून से पश्चिमी तरफ प्रगति की उम्मीद है.'

वहीं, वेदर एक्सपर्ट नवदीप दाहिया का कहना है, '23 जून से पहले सुधार की कोई उम्मीद नहीं है. आने वाले दिनों में सुपर अल नीनो बनने की भी आशंका है, जो 2026 के मानसून को और कमजोर कर सकता है.'

ज़ाहिद अहमद इस वक्त ABP न्यूज़ में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. टेलीविजन और डिजिटल जर्नलिज्म की दुनिया में उन्हें करीब 9 साल का तजुर्बा है. इससे पहले वे 3 बड़े मीडिया संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभा चुके हैं. वे ओरिजिनल सेक्शन की एक्सप्लेनर टीम में सीनियर सब एडिटर रहे. ज़ाहिद आउटपुट डेस्क, बुलेटिन प्रोड्यूसिंग और बॉलीवुड सेक्शन को बतौर असिस्टेंट प्रोड्यूसर लीड भी कर चुके हैं. देश-विदेश, सियासत, कारोबार, एजुकेशन, एंटरटेनमेंट, चुनाव और समाजी मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ है. आसान लहजे में असरदार और भरोसेमंद एक्सप्लेनर पेश करना उनकी पहचान है.

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