Suvendu Adhikari: भवानीपुर या नंदीग्राम, शुभेंदु अधिकारी ने कौन-सी सीट छोड़ी? बंगाल CM ने खुद कर दिया ऐलान
शुभेंदु अधिकारी ने 2021 के चुनावों में बीजेपी की टिकट पर नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था, उनकी पार्टी को राज्य में बहुमत तो मिला था, लेकिन वह खुद चुनाव हार गई थीं.

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा चुनावों में नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों पर जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें एक सीट खाली करनी थी. उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ दी है, वह भवानीपुर सीट से ही विधायक रहेंगे. उन्होंने विधानसभा में भवानीपुर विधायक के रूप में शपथ ली है. बता दें कि इस सीट पर उन्होंने बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हराया था.
दोनों सीटों से जीतने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि मैं 10 दिनों के भीतर एक सीट छोड़ दूंगा. हालांकि उन्होंने कहा था कि कौन सी सीट मुझे रखनी है, इसका निर्णय पार्टी करेगी. मेरी अपनी राय जरूर होगी, जिसे मैं नेतृत्व के सामने रखूंगा.
नंदीग्राम सीट पर कितने वोटों से जीते थे शुभेंदु?
शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम सीट पर टीएमसी के पबित्र कर को हराया था. बीजेपी कैंडिडेट अधिकारी को इस सीट पर 127301 वोट मिले थे, जबकि टीएमसी कैंडिडेट पबित्र कर को 117636 वोट मिले थे. वहीं तीसरे नंबर पर सीपीआई के संती गोपाल गिरी थे, जिन्हें करीब तीन हजार वोट मिले थे. जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार शेख जरितुल हुसैन 5वें नंबर पर थे और उन्हें सिर्फ 794 वोट मिले थे.
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भवानीपुर में शुभेंदु को कितने वोट मिले थे?
शुभेंदु अधिकारी ने 2021 के चुनावों में बीजेपी की टिकट पर नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था, उनकी पार्टी को राज्य में बहुमत तो मिला था, लेकिन वह खुद चुनाव हार गई थीं, जिसके बाद भवानीपुर सीट को खाली कराया गया और ममता बनर्जी यहां से चुनाव जीतकर विधायक बनीं थीं. 2026 में एक बार फिर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को चुनाव में पटखनी दे दी. इस चुनाव में शुभेंदु को 73917 वोट मिले थे, जबकि ममता बनर्जी को 58812 वोट मिले. शुभेंदु ने ममता को भवानीपुर में 15105 वोटों से हराया.
नंदीग्राम सीट कितनी महत्वपूर्ण?
बंगाल की नंदीग्राम सीट ममता बनर्जी का गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछला चुनाव हारने के बाद ममता ने इस सीट की ओर मुड़कर नहीं देखा. इस सीट को शुभेंदु अधिकारी भी अपना गढ़ मानते हैं. ये उनके राजनीतिक करियर का केंद्र रहा है. साल 2007 में भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन को उन्होंने लीड किया था.
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