गृह मंत्री अमित शाह से मिले TMC के 3 बागी मुस्लिम सांसद, की ये बड़ी मांग
एनसीपीआई के सांसद अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान ने अमित शाह से मुलाकात के दौरान SIR के बाद हो रही परेशारी और लाउडस्पीकर का मुद्दा उठाया. उन्होंने चिट्ठी भी सौंपी.

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी (टीएमसी) से बगावत करने वाले तीन सांसदों अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान ने गुरुवार (6 अगस्त) को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने SIR और लाउडस्पीकर बैन का मुद्दा उठाया.
अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान उन 20 सांसदों में शामिल हैं, जिन्होंने विधानसभा चुनाव रिजल्ट के बाद टीएमसी में बगावत कर दी थी और एनसीपीआई में शामिल हो गए थे. एनसीपीआई ने एनडीए को समर्थन दिया है. हालांकि एनसीपीआई सांसद के तौर पर स्पीकर से मंजूरी नहीं मिली है.
असहज होने का दावा
हाल ही में कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि अल्पसंख्यक बहुल सीट से जीत कर आए अबू ताहिर खान, यूसुफ पठान और खलीलुर्रहमान एनडीए में असहज हैं और ममता बनर्जी के साथ लौट सकते हैं. हालांकि इन अटकलों को एनसीपीआई के अन्य सांसदों ने खारिज कर दिया. इस बीच अमित शाह से मुलाकात हुई है.
खलीलुर्रहमान ने कहा, ''हमने दो मुद्दों पर बातचीत की. पहला हमने अमित शाह के सामने कहा कि SIR में जो मामले ट्रिबिनल में है उसको लेकर जल्दी समाधान किया जाए.'' उन्होंने कहा, ''दूसरा कोई भी धर्मस्थल हो उस पर लाउडस्पीकर लगा है अगर वो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक है तो उनको बजने देना चाहिए.''
चिट्ठी में क्या लिखा?
तीनों सांसदों ने इन मांगों से जुड़ी चिट्ठी भी अमित शाह को सौंपी. इसमें लिखा है, ''बड़ी संख्या में ऐसे वास्तविक मतदाता हैं जिनके नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं और वे ट्रिब्यूनल के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. इस देरी के कारण पासपोर्ट सत्यापन, भूमि पंजीकरण और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने में कठिनाइयां हो रही हैं.
चिट्ठी में लिखा है, ''मैं मंत्रालय से अनुरोध करता हूं कि सभी लंबित वास्तविक मामलों का तेजी से निपटारा किया जाए और उन्हें इस साल के अंत तक पूरा किया जाए. ट्रिब्यूनल की अतिरिक्त बेंच स्थापित की जाएं। शिकायतों की निगरानी के लिए एक तंत्र (मैकेनिज्म) बनाया जाए. यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रभावित वास्तविक नागरिकों को उनके मामले लंबित रहने के दौरान आवश्यक सार्वजनिक सेवाओं से वंचित न किया जाए.''























