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चीन से तनातनी के बीच भारत-उज़्बेकिस्तान की सेनाएं कर रहीं साझा युद्धभ्यास, ऑपरेशनल ट्रेनिंग भी शुरू

हाल के सालों में भारत ने मध्य-एशिया के देशों से अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाएं हैं. इसी कड़ी में उज़्बेकिस्तान की सेना से डस्टलिक युद्धभ्यास शामिल है. दोनों देश शंघाई कॉपरेशन ऑर्गेनाईजेश (एससीओ) के सदस्य हैं और आतंकवाद से लड़ने की प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं.

चौबटिया: एलएसी पर चीन से चल रही तनातनी के बीच भारत और उज़्बेकिस्तान की सेनाएं उत्तराखंड के चौबटिया (रानीखेत) में चल रही साझा युद्धभ्यास, ‘डस्टलिक’ में अब दोनों देशों की सेनाओं की ऑपरेशनल-ट्रेनिंग शुरू हो गई है (10-19 मार्च). डस्टलिक एक्सरसाइज में भारतीय सेना की तरफ से 'बहादुरों के बहादुर' पलटन, 13 कुमाऊं (रेजांगला बटालियन) हिस्सा ले रही है. इस एक्सरसाइज की कवरेज के लिए एबीपी न्यूज की टीम भी चौबटिया में मौजूद है.

इस सालाना ‘डस्टलिक’ (उज्बेक भाषा में दोस्ती) युद्धभ्यास में दोनो देशों के 45-45 सैनिक हिस्सा ले रहे हैं. रानीखेत के चौबटिया में दोनों देशों की टुकड़ियां इस दौरान काउंटर-टेरेरिस्ट ऑपरेशन्स के युद्ध-कौशल और दक्षता को एक दूसरे से साझा कर रही हैं. पहली डस्टलिक एक्सरसाइज वर्ष 2019 में उज़्बेकिस्तान की राजधानी, ताशकंद में हुई थी. इस दौरान दोनों देशों के सैनिक, फायरिंग, हेलीकॉप्टर सिलेथेरिंग, कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन (कासो) और रूम इंटरवेंशन ड्रिल कर रही हैं.

भारत और उज्बेक सैनिक, हाल ही में अमेरिका से ली गई सिग-सोर राइफल का इस युद्धभ्यास में इस्तेमाल कर रहे हैं. भारत ने हाल ही में अमेरिका से 1.44 लाख सिग-सोर राइफल ली थीं.

दस दिनों तक चलने वाले इस युद्धभ्यास के दौरान दोनों देशों की सेनाएं यूएन (संयुक्त राष्ट्र) के चार्टर के तहत पर्वतीय क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी परिवेश में काउंटर-टेररिज्म और काउंटर-इनसर्जेंसी ऑपरेशन ड्रिल में हिस्सा ले रही हैं. इसके लिए चौबटिया के एक काल्पनिक गांव में दोनों देशों ने वहां छिपे आतंकियों के लिए कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन किया. इस‌ दौरान टेक्नोलोजी का इस्तेमाल करते हुए ड्रोन और रोवर (व्हीकल ड्रोन) का इस्तेमाल किया गया. जंगल में छिपे आतंकियों को न्यूट्रेलाइज़ करने की ड्रिल भी की गई. दोनों देशों के सैनिकों ने एक ऊंचे मचान से हेलीकॉप्टर सिलेथेरिंग की ड्रिल की.

डस्टलिक युद्धभ्यास के दौरान भारतीय सेना पहली बार ज़ेन स्मार्ट टारगेट सिस्टम इस्तेमाल कर रही है. इस सिस्टम से फायरिंग रेंज में कट-आउट पर निशाना लगाया जाता है. इन कट-आउट पर सेंसर लगे हैं, जिससे ये पता चल जाता है कि निशाना कहां लगा है और कितने सही टारगेट पर लगे हैं. गन के करीब लगे एक मॉनिटर पर पूरी जानकारी डिस्प्ले हो जाती है. खुद सैनिक को जाकर कटआउट को चेक करने की जरूरत नहीं पड़ती. पिछले साल लखनऊ में डिफेंस एक्सपो के दौरान पीएम मोदी ने इसी सिस्टम के जरिए निशाना लगाया था, जिसकी तस्वीर और वीडियो काफी वायरल हुई थी.

कुमाऊं रेजीमेंट के कमांडिंग ऑफिसर (सीओ) कर्नल अमित मलिक के मुताबिक, इस साझा युद्धभ्यास से दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक संबंधों को मजबूत होने में तो मदद मिलेगी ही, साथ ही ये दोनों देशों के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संकल्प को भी दर्शाता है.

डस्टलिक युद्धभ्यास की वैलीडेशन-एक्सरसाइज 17-18 मार्च को होगी जब एक हफ्ते की ट्रेनिंग को दोनों देशों की टुकड़ियां वास्तविक ऑपरेशन्स की चुनौतियों का सामना करने की ड्रिल करेंगे. उस दौरान उज़्बेकिस्तान के उप-रक्षा मंत्री भी चौबटिया में मौजूद रहेंगे.

आपको बता दें कि हाल के सालों में भारत ने मध्य-एशिया के देशों से अपने संबंध मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाएं हैं. इसी कड़ी में उज़्बेकिस्तान की सेना से डस्टलिक युद्धभ्यास शामिल है. दोनों देश शंघाई कॉपरेशन ऑर्गेनाईजेश (एससीओ) के सदस्य हैं और आतंकवाद से लड़ने की प्रतिबद्धता जाहिर कर चुके हैं.

चीन के मध्य-एशिया में बढ़ते कदमों को रोकने के लिए भी भारत मध्य-एशियाई देशों से अपने संबंध मजबूत करने में जुटा है. क्योंकि चीन का बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) प्रोजेक्ट मध्य एशिया के उन देशों से ही गुजरता है, जहां से प्राचीन सिल्क-रूट निकलता था. इन देशों में उज़्बेकिस्तान भी शामिल है. चीन ने उज़्बेकिस्तान तक रेल सेवा शुरू करने का भी प्रस्ताव दिया है.

आपको बता दें कि वर्ष 1991 में सोवियत संघ से अलग होने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल था, जिसने सबसे पहले उज़्बेकिस्तान को स्वतंत्र देश की मान्यता दी थी. हालांकि, भारत और उज़्बेकिस्तान के संबंध प्राचीन काल से हैं. माना जाता है कि महाभारत के युद्ध में कौरवों की तरफ से जिन शक-राज्य के सैनिकों ने हिस्सा लिया था, वे उज्बेक-मूल के थे. बाद में मुगल-राज्य की स्थापना करने वाला बाबर भी उज़्बेकिस्तान के समरकंद का रहने वाला था. बाबर, समरकंद के फरगना के एक कबीले का सरदार था और 16वीं सदी में अफगानिस्तान के रास्ते भारत आया था.

जब उत्तराखंड के चौबटिया में भारत और उज़्बेकिस्तान की सेनाएं साझा युद्धभ्यास करने में जुटी हैं तो, एक और मध्य-एशियाई देश, तुर्कमेनिस्तान के स्पेशल फोर्स के कमांडोज़ भी हिमाचल प्रदेश के नाहन में भारतीय सेना के स्पेशल फोर्सेज़ के ट्रेनिंग स्कूल में पैरा-जंप का अभ्यास कर रहे हैं.

डस्टलिक एक्सरसाइज में भारतीय सेना की तरफ से 'बहादुरों के बहादुर' पलटन, 13 कुमाऊं शामिल है, जिसे रेजांगला-बटालियन के नाम से भी जाना जाता है. 1962 के युद्ध में पूर्वी लद्दाख में हुई रेजांगला लड़ाई के दौरान इसी 13 कुमाऊं के 114 सैनिकों ने चीन के 1300 सैनिकों का सामना किया था. गोलियां खत्म होने के बाद इन अहीर सैनिकों ने चीन के सैनिकों को पहाड़ों से टकरा-टकराकर मार गिराया था. 13 कुमाऊं के मेजर शैतान सिंह का शव जब युद्ध मैदान में मिला था तो उनकी उंगलियां अपनी गन के ट्रिगर पर थीं. बाद में उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया था. इस‌ लड़ाई के बाद ही लता मंगेशकर ने 'ऐ मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी' गाना गाया था, जिसे सुनकर जवाहर लाल नेहरू की आंखें भर आई थीं.

हाल ही में जब चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में टकराव हुआ तो कुमाऊं रेजीमेंट ने खुद रेजांगला (रेचिन ला दर्रे) पर तैनात होने का आग्रह किया और रेजीमेंट को वहीं तैनात किया गया जहां, चीनी सेना से एलएसी पर आई बॉल टू आई बॉल तनातनी चल रही थी.

नीरज राजपूत देश के जाने-माने डिफेंस-जर्नलिस्ट और वॉर-लेखक हैं. पत्रकारिता में करीब ढाई दशक का अनुभव रखते हैं और प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल मीडिया तीनों में गहरी पकड़ है.

वर्तमान में वे ABP नेटवर्क से जुड़े हैं, जहाँ युद्ध, रक्षा, नेशनल सिक्योरिटी और जियो-पॉलिटिक्स से संबंधित विषयों को कवर करते हैं. ABP लाइव पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम ‘गेम-चेंजर’ के प्रस्तुतकर्ता भी हैं.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर उन्होंने पहली हिंदी पुस्तक "ऑपरेशन Z लाइव" लिखी, जो बेस्टसेलर सूची में भी शामिल हुई और पाठकों द्वारा खूब सराही गई.

रिपोर्टिंग का दायरा
- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन से लेकर आतंकवाद प्रभावित जम्मू-कश्मीर और चीन सीमा पर तिब्बत के पठार तक
- पाकिस्तान के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयर-स्ट्राइक से लेकर पनडुब्बी के जरिए समुद्र के भीतर तक
- ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनके एक्सक्लूसिव खुलासे और सटीक विश्लेषणों की व्यापक सराहना हुई
- यूक्रेन-रूस युद्ध क्षेत्र में मारियुपोल, डोनेत्स्क और लुहांस्क जैसे एक्टिव वॉर-जोन से रिपोर्टिंग. इसी अनुभव पर आधारित उनकी पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई
- दुनिया की सबसे संवेदनशील सीमाओं में से एक उत्तर-दक्षिण कोरिया की DMZ
- ⁠अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य अड्डों में से एक JBLM, और शीत युद्ध के दौरान "गैर-मौजूद" माने जाने वाले रूसी सैन्य अड्डों से भी ग्राउंड रिपोर्टिंग. 
- ⁠वे उन चुनिंदा रक्षा जुड़े पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने भारत के पहले स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर LCH-प्रचंड के कॉकपिट में उड़ान भरी है. इसके अलावा फ्रांस में राफेल लड़ाकू विमान निर्माण सुविधा से भी उन्होंने विशेष रिपोर्टिंग की.

भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित प्रतिष्ठित 'Defence Correspondent Course' के Alumni हैं.

पूर्व कार्य अनुभव
- STAR NEWS में लगभग 6 वर्षों तक चीफ रिपोर्टर (क्राइम) के तौर पर कार्य किया और लोकप्रिय क्राइम शो 'सनसनी' से जुड़े रहे
- पत्रकारिता की शुरुआत अंग्रेजी दैनिक नेशनल हेराल्ड से की
- इसके बाद B.A.G. Films के साथ जुड़कर STAR NEWS के लिए क्राइम शो बनाए
- SAHARA TV में भी लगभग 2 वर्षों तक कार्यरत रहे

रक्षा और सुरक्षा के मामलों पर उनकी पकड़, ग्राउंड-जीरो रिपोर्टिंग और गहन विश्लेषण उन्हें देश के सबसे भरोसेमंद डिफेंस जर्नलिस्ट्स में स्थापित करती है.

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