कौन बनेगा यूपी पुलिस का नया डीजीपी?
यूपी पुलिस ने पहले बताया कि 1 जनवरी की दोपहर को ओपी सिंह लखनऊ आ कर डीजीपी का चार्ज ले लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

लखनऊ: यूपी पुलिस पिछले बीस दिनों से बिना अपने बॉस के काम कर रही है. डीजीपी के ना होने से कई बड़े काम रुके पड़े हैं. ओपी सिंह को पुलिस महानिदेशक बनाने का प्रस्ताव योगी सरकार ने प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा था लेकिन अब तक उनका इंतजार ही हो रहा है. 1983 बैच के आईपीएस अधिकारी ओपी सिंह अभी सीआईएसएफ के डीजी हैं. वे इस समय केंद्र की सेवा में हैं. जब तक उन्हें वहां से रिलीव नहीं किया जाता है, वे उत्तर प्रदेश के डीजीपी का चार्ज नहीं ले सकते.
शायद यूपी के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि बिना मुखिया के ही पुलिस काम कर रही है. 31 दिसंबर की देर रात को उच्चस्तरीय कमेटी ने ओपी सिंह को डीजीपी बनाने का फैसला किया था. इस कमेटी में चीफ सेक्रेटरी, सीएम के प्रमुख सचिव और राज्य के प्रमुख गृह सचिव थे. फिर ये प्रस्ताव पीएमओ भेज दिया गया. वैसे नियम कहता है कि ये चिट्ठी केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जानी चाहिए थी. बाद में ये प्रस्ताव वहां भी पहुंच ही गया. लेकिन फैसला तो अब तक नहीं हुआ.
यूपी पुलिस ने पहले बताया कि 1 जनवरी की दोपहर को ओपी सिंह लखनऊ आ कर डीजीपी का चार्ज ले लेंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ. फिर ये जानकारी आयी कि वे दो तारीख को काम शुरू करेंगे. तारीख बदलती गयी. फिर ये कहा गया कि टेकनपुर में ऑल इंडिया डीजीपी कांफ्रेंस ख़त्म होने के बाद ओपी सिंह अपनी कुर्सी संभालेंगे लेकिन ये दावा भी गलत साबित हुआ.
एक सीनियर आईपीएस अफसर ने कांफ्रेंस में ओपी सिंह और पीएम नरेंद्र मोदी के बीच हुई एक दिलचस्प बातचीत बतायी. जब बड़े अफसरों को प्रधानमंत्री से परिचय कराया जा रहा था तो ओपी सिंह की भी बारी आयी. पीएम मोदी ने उनसे हाथ मिलाया, आगे बढ़े और फिर पीछे मुड़ कर ओपी सिंह से बोले " आप गाना अच्छा गाते हैं, आपके गाने सोशल मीडिया पर इन दिनों खूब वायरल हो रहे हैं." पीएम मोदी की इस चुटकी का लोग अलग-अलग मतलब निकाल रहे हैं.
मतलब चाहे जो भी हो लेकिन यूपी को तो मतलब नए डीजीपी से है. अब तो ये सवाल भी उठने लगा है कि कहीं ओपी सिंह का नाम तो नहीं कट गया? शक गहराने लगा है. ओपी सिंह के एक करीबी अधिकारी ने पहले बताया था कि वे खरमास ख़त्म होने के बाद डीजीपी का चार्ज ले लेंगे. ओपी सिंह बिहार के रहने वाले है और वहां कोई नया काम खरमास में नहीं शुरू होता है. अब तो मकर संक्रांति बीते चार दिन हो गए लेकिन ओपी का कोई अता-पता नहीं है.
डीजीपी के लिए ओपी सिंह का नाम दिल्ली कैसे गया? इसकी भी कई कहानियां है. कुछ लोग कहते हैं कि राजनाथ सिंह ने उनका मामला सेट करा दिया. तो एक गुट बताता है कि उन्हें संघ का आशीर्वाद मिल गया है. इतना जरूर है कि ओपी सिंह कभी भी सीएम योगी आदित्यनाथ की पहली पसंद नहीं रहे. वे मुलायम सिंह यादव के करीबी माने जाते रहे हैं. बीएसपी सुप्रीमो मायावती के साथ जब गेस्ट हाऊस काण्ड हुआ था तब ओपी सिंह लखनऊ के एसएसपी थे.
कुछ लोग ये भी दावा कर रहे है कि उन्हें डीजीपी बनाने पर बीएसपी इसे मुद्दा बना सकती है. इससे बचने के लिए शायद अब ओपी सिंह को डीजीपी ना बनाया जाए. लखनऊ में सीएम ऑफिस से लेकर डीजीपी ऑफिस तक इन दिनों हर दिन की शुरुआत बस एक ही सवाल से होता है. कौन होगा नया डीजीपी ? लेकिन जवाब अब तक नहीं मिल पाया है.
Source: IOCL






















