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पतियों को पत्नियों के प्रकोप से बचाने वाले आश्रम का चौंकाने वाला सच!

नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर एक बेहद चौंकाने वाला मैसेज वायरल हो रहा है. इस मैसेज के जरिए दावा किया जा रहा है कि देश में पत्नी के सताए पतियों के लिए एक आश्रम बनाया गया है. आश्रम के बोर्ड की तस्वीर भी वायरल हो रही है. एबीपी न्यूज़ ने वायरल हो रही इस खबर की पड़ताल की है.

पत्नियों पर पति के जुल्म की कहानी इस देश में आम है. पत्नियों पर पतियों का जुल्म हो सकता है आपके लिए सामान्य घटना हो. लेकिन पति पर जुल्म हों और उन्हें आश्रम में शरण लेनी पड़े ये सुनने में अजीब लगता है क्योंकि हमारे देश में ये आम बात नहीं है.

एनसीआरबी यानि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक साल 2014 में पति की क्रूरता की शिकार पत्नियों के 1 लाख 22 हजार 877 मामले सामने आए जो पिछले साल यानि 2013 की तुलना में साढ़े तीन फीसदी ज्यादा थे. आपराधिक आंकड़े इकट्टा करने वाली आधिकारिक एनसीआबी की वेबसाइट पर हमें कहीं भी पतियों पर पत्नियों की क्रूरता के कोई आंकड़े नहीं मिले. अब आप समझ सकते हैं कि सरकार और समाज दोनों इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेते हैं.

कहानी असाधारण है और इस कहानी को वजन देने के लिए सबूत के तौर पर पेश किया जा रहा है एक बोर्ड जो पत्नी पीड़ित आश्रम का पता बताया रहा है. सोशल मीडिया पर ये बोर्ड पहुंचा तो सुर्खियां बन गया. चर्चा शुरू हो गई किसी ने मजाक कहा तो किसी ने इसे गंभीरता से लिया.

इस मैसेज को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं, ''ग्रुप में जितने भी पत्नी पीड़ित पति हैं अब इनके लिए एडमिन ने आश्रम खोल दिया है. अब और पत्नियों का जुल्म सहने की जरूरत नहीं है चले आओ घबराओ नहीं.''

इसका सच जानने के लिए एबीपी न्यूज़ ने इसकी सिलसिलेवार तरीके से पड़ताल की. सबसे पहले हमने बोर्ड की तस्वीर से ही पता लिया बोर्ड में सबसे ऊपर लिखा है, ''पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम पुरुषों को न्याय और हक दिलाने के लिए लड़ने वाला एकमात्र संगठन. गेट नंबर 121, करोड़ी शरनापुर, बॉम्बे हाइवे, राज माता होटल, औरंगाबाद महाराष्ट्र.''

औरंगाबाद के महाराष्ट्र में कोई पतियों के लिए पत्नी पीड़ित आश्रम है या नहीं ये जानने के लिए एबीपी न्यूज ने औरंगाबाद में पड़ताल की. जानकारी के मुताबिक ये जगह औरंगाबाद से शिरडी जाने के रास्ते में है.

इस जगह पर पहुंचने पर एबीपी न्यूज़ की टीम को बोर्ड दिखाई दिया जिसकी तलाश थी. ठीक वही बोर्ड जिस पर लिखा था पत्नी पीड़ित पुरुष आश्रम. बोर्ड पर इशारा अंदर की तरफ जाने का था. हमारी गाड़ी बताए हुए रास्ते की तरफ बढ़ी तो हमें एक छोटा सा आश्रम दिखाई दिया.

इस जगह के अंदर का नजारा हैरान करने वाला था. यहां कुछ पुरुष साथ मिलकर चूल्हे पर खाना बना रहे थे. बिना बेलन के हाथ वाली रोटी बना रहे थे, कोई सब्जी काट रहा था तो कोई आटा माड़ रहा था.

आश्रम में हर काम हो रहा था लेकिन यहां सिर्फ पुरुष थे. हमने यहां मौजूद पुरूषों से बात की. इस आश्रम में रहने वाले शेख एजाज ने बताया कि उनकी पत्नी उन्हें शादी के तीन महीने बाद ही छोड़कर चली गई थी और इन पर घरेलू हिंसा का आरोप भी है. आपको बता दें कि शेख एजाज देख नहीं सकते.

शेख एजाज जैसी ही कहानी आश्रम में मौजूद राहुल नाम के युवक ने सुनाई. राहुल ने लव मैरिज की थी लेकिन शादी टूट गई. राहुल के मुताबिक उन पर पत्नी ने केस कर दिए हैं और उनकी नौकरी तक चली गई है. ऐसे कई लोग हमें यहां मिले. एबीपी न्यूज इन लोगों के इनकी पत्नियों पर लगाए आरोपों की पुष्टि नहीं करता.

हमारी पड़ताल का मकसद इस आश्रम की कहानी जानना था. इसलिए हमने पत्नी पीड़ित संगठन के अध्यक्ष भारत फुलारे से बात की. भारत फुलारे ने हमें इस आश्रम को बनाने के पीछे की वजह बताई.

भारत फुलारे के मुताबिक, "पुरुषों को अत्याचार से बचाना है. देश में जो भी कानून हैं सारे कानून महिलाओं के लिए हैं. पुरुषों को घर से निकाला जा रहा है. हमने इस आश्रम के जरिए ऐसे लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया. हम उन्हें ट्रेनिंग देते हैं.''

इस संगठन के 450 सदस्य हैं और 9 लोग इस आश्रम में रहते हैं जिनके पास रहने के लिए कोई ठिकाना नहीं है. ये आश्रम ज्यादा पुराना नहीं है दो महीने पहले यानि 19 नवंबर को ही पिछले साल ये आश्रम बना है.

इस आश्रम में जो पुरुष आते हैं उनकी दिनचर्या तय है. सबसे पहले सुबह योगा की क्लास होती है. उसके बाद सब लोग मिलकर नाश्ता तैयार करते हैं और नाश्ता करने के बाद उन्हें सिखाया जाता है कि अपनी कानूनी लड़ाई कैसे लड़नी है? रोजगार के लिए पुरुषों को कई तरह का काम भी सिखाया जाता है.

इस कहानी में बोर्ड पर लोगो के तौर पर कौआ की फोटो लगी हुई थी. जब हम पड़ताल के लिए आश्रम पहुंचे तो वहां भी कौए की तस्वीर दिखाई दी. हमने ये जानना चाहा कि आखिर कौए की तस्वीर यहां क्यों है?

पड़ताल में पता चला कि इसके पीछे एक कहानी है. मादा कौवा अंडा देने के बाद चली जाती है. अंडे से बच्चे पैदा होने से लेकर उनके उड़ने तक सारी जिम्मेदारी नर कौवा ही संभालता है.

संगठन के लोगों के मुताबिक इन पुरुषों की हालत भी कौवे जैसी ही है इसलिए आश्रम में कौवे की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है. एबीपी न्यूज की पड़ताल में पत्नी पीड़ित पतियों के आश्रम वाला दावा सच साबित हुआ है.

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