TMC प्रमुख ममता बनर्जी से बगावत पर सांसद काकोली घोष का बड़ा बयान, बोलीं - 'मेरा सिर कटेगा लेकिन...'
टीएमसी की बागी गुट की नेता और लोकसभा सांसद काकोली घोष का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर मौकापरस्ती के लगने वाले आरोपों का जवाब दिया.

पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद से ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. टीएमसी में पड़ी दरार अब खुलकर सामने आ रही है. विधायकों की बगावत के बाद सांसदों के एक गुट के भी एनडीए को समर्थन देने की खबरें हैं. इन सबके बीच टीएमसी की बागी गुट की नेता और लोकसभा सांसद काकोली घोष का एक बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने अपने ऊपर मौकापरस्ती के लगने वाले आरोपों का जवाब दिया.
'मैंने बहुत सह लिया...'
न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत के दौरान घोष ने बताया कि टीएमसी से अलग होने का उनका फैसला पश्चिम बंगाल में पार्टी की मौजूदा स्थिति और गवर्नेंस संबंधी मुद्दों से गहरी असंतुष्टि के कारण है. उन्होंने बंगाल के लिए अपनी दशकों पुरानी जिम्मेदारी और एक स्वतंत्र रास्ते को अपनाने के अपने संकल्प पर जोर दिया और पश्चिम बंगाल में 'कुप्रशासन, अराजकता और बेरोजगारी' को दूरियों की प्रमुख वजह बताया.
अवसरवादिता के आरोपों को किया खारिज
अवसरवादिता के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, 'मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं. मैंने बहुत सह लिया. मैं 2011 में ममता बनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के बाद यहां नहीं आई, मैं यहां 40 वर्षों से संघर्ष कर रही हूं और जैसा कि मैंने कहा ऐसे लोगों के शब्दों का मुझ पर बिल्कुल भी असर नहीं होता.'
#WATCH | Delhi: Lok Sabha MP Kakoli Ghosh says, "Mera sar katega lekin jhukega nahi... Maine bohot seh liya... I did not come here after Mamata Banerjee became Chief Minister in 2011; I have been fighting here for 40 years. And as I said, the words of such people have absolutely… pic.twitter.com/KKmfQlpUFl
— ANI (@ANI) June 9, 2026
'राष्ट्र का मुद्दा हमारे लिए सर्वोपरि'
आंतरिक राजनीतिक अटकलों को दरकिनार करते हुए उन्होंने आगे कहा कि उनका पहला फोकस राष्ट्रीय हितों और देश की सुरक्षा पर है. उन्होंने कहा, 'हम देखेंगे कि आगे क्या होता है. फिलहाल, क्या यह पर्याप्त नहीं है कि हम बंगाल के लिए, देश के लिए और भारत को सुरक्षित रखने के लिए काम करना चाहते हैं? यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है; राष्ट्र का मुद्दा हमारे लिए सर्वोपरि है.'
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'मुझे दरकिनार किया गया'
चुनाव में मिली हार के बाद जिलाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद भी घोष ने अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा, 'मैंने खराब नतीजों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी ली, यह सोचते हुए कि शायद मैंने अपनी भूमिका प्रभावी ढंग से नहीं निभाई और इसलिए मैंने पद छोड़ दिया. इसके बाद भी मुझसे कोई मिलने नहीं आया और न ही किसी ने फोन किया. मुझे बस दरकिनार कर दिया गया.'
टीएमसी की बागी सांसद काकोली घोष ने सोमवार (8 जून) को घोषणा की कि 20 सांसदों के एक गुट ने लोकसभा अध्यक्ष से अलग बैठने की व्यवस्था के लिए औपचारिक रूप से अनुरोध किया है और कहा कि वह राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगी.























