फरार जोड़ा सुरक्षा के लिए पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, CJI बोले- आप ये क्यों भूल जाते हैं कि...
वकील ने कहा कि वह जोड़े को पुलिस से सहायता दिलाने के लिए तिलक मार्ग पुलिस थाने ले गई थीं लेकिन पुलिस ने सुरक्षा देने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की.

एक फरार जोड़े ने सुरक्षा देने का अनुरोध करते हुए शुक्रवार (20 मार्च, 2026) को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की, जिस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि इस राहत के लिए वे दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करें.
दिलचस्प बात यह है कि जिस वकील ने फरार जोड़े की सुरक्षा के लिए याचिका दाखिल की थी उनसे वह सुप्रीम कोर्ट के पार्किंग क्षेत्र में ही मिली थीं. वकील ने कहा कि जोड़ा सोशल मीडिया रील्स से प्रभावित होकर और इस गलत धारणा के साथ सुप्रीम कोर्ट आया था कि वह न्यायालय परिसर में ही शादी कर सकता है और भारत के मुख्य न्यायाधीश उसे तुरंत सुरक्षा प्रदान कर देंगे.
वकील के अनुसार, जोड़े को डर है कि उसे नुकसान पहुंचाया जा सकता है और उनके माता-पिता उन्हें कठोर सजा दे सकते हैं. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने वकील से कहा कि वह इसके लिए हाईकोर्ट का रुख करें.
वकील ने कहा कि वह जोड़े को पुलिस से सहायता दिलाने के लिए तिलक मार्ग पुलिस थाने ले गई थीं लेकिन पुलिस ने सुरक्षा देने के बजाय उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश की. याचिका पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने पूछा कि इस तरह के मामलों में पक्षकार हाईकोर्ट के क्षेत्राधिकार को क्यों दरकिनार कर देते हैं.
मुख्य न्यायाधीश ने पूछा, 'अनुच्छेद 226 के क्षेत्राधिकार के साथ यह पक्षपातपूर्ण व्यवहार क्यों?' साथ ही उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट्स को इस तरह की याचिकाओं के निपटारे का अधिकार है. मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश के रूप में उन्होंने कई ऐसे मामले देखे हैं. उन्होंने कहा कि अगर हाईकोर्ट राहत देने में असफल रहता है, तो पक्षकार सुप्रीम कोर्ट का रुख करने के लिए स्वतंत्र हैं.






















