सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा में किसानों को अधिक मुआवजा देने से जुड़े भ्रष्टाचार की जांच SIT को सौंपी, यूपी सरकार से ऑथोरिटी में सुधार के लिए कहा
नोएडा ऑथोरिटी के अधिकारियों दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र सिंह पर एक मामले में जमीन अधिग्रहण के 22 साल बाद उसके मालिक को 7 करोड़ से ज्यादा मुआवजा दिलवाने का आरोप था जबकि पहले भी मुआवजा दिया जा चुका था.

नोएडा में किसानों को भूमि का अधिक मुआवजा देने के मामले में अधिकारियों पर सुप्रीम कोर्ट की गाज गिरी है. कोर्ट ने SIT का गठन कर जांच का आदेश दिया है. जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने ऑथोरिटी के कामकाज की समीक्षा के लिए पहले गठित SIT की रिपोर्ट को देखने के बाद यह आदेश दिया. इस रिपोर्ट में जमीन मालिकों और अधिकारियों की मिलीभगत से घोटाले की आशंका जताई गई थी. साथ ही ऑथोरिटी के कामकाज में दूसरी कमियों की भी जानकारी दी गई थी.
इस साल 24 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मुआवजे में गड़बड़ी की जानकारी पर एक SIT बनाई थी. मामला नोएडा ऑथोरिटी के 2 लीगल अधिकारियों दिनेश कुमार सिंह और वीरेंद्र सिंह से जुड़ा था. दोनों पर एक मामले में जमीन अधिग्रहण के 22 साल बाद उसके मालिक को 7 करोड़ से ज्यादा मुआवजा दिलवाने का आरोप था जबकि जमीन मालिक को पहले भी मुआवजा दिया जा चुका था. शुरुआती जांच में दोनों पर अलग-अलग मामलों में सरकारी खजाने को 12 करोड़ रुपए से अधिक नुकसान पहुंचाने का आरोप लगा. सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा ऑथोरिटी के कामकाज में बड़ी गड़बड़ी की आशंका जताते हुए SIT बनाई थी.
अब पहले गठित SIT की रिपोर्ट देखने के बाद कोर्ट ने विस्तृत जांच के लिए नई SIT बनाने को कहा है. कोर्ट ने यह आदेश जारी किए हैं :-
(i) डीजीपी 3 आईपीएस अधिकारियों की SIT बनाएं.
(ii) SIT तुरंत प्राथमिक जांच केस दर्ज करे. जांच में फोरेंसिक एक्सपर्ट और आर्थिक अपराध शाखा की सहायता ली जाए.
(iii) अगर प्राथमिक जांच में संज्ञेय अपराध की पुष्टि होती है तो SIT केस दर्ज करे.
(iv) SIT के प्रमुख कमिश्नर रैंक के अधिकारी हों. वह सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें.
(v) अगर किसी सरकारी कर्मचारी/अधिकारी पर भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत मुकदमा चलाने के लिए अनुमति की जरूरत हो तो SIT के ऐसे अनुरोध पर संबंधित उच्च अधिकारी 2 सप्ताह में फैसला लें
(vi) नोएडा ऑथोरिटी के कामकाज में पारदर्शिता जरूरी है. पहले गठित SIT की रिपोर्ट यूपी के मुख्य सचिव को दी जाए. वह इसे राज्य मंत्रिमंडल के सामने रखें. नोएडा ऑथोरिटी को साफ-सुथरा बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं. एक आईपीएस या CAG से डेप्यूटेशन पर आए अधिकारी को नोएडा ऑथोरिटी में बतौर चीफ विजिलेंस ऑफिसर नियुक्त किया जाए. 4 सप्ताह में नोएडा में सिटीजन एडवाइजरी बोर्ड भी बने.
(vii) नोएडा के किसी भी प्रोजेक्ट को पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) और सुप्रीम कोर्ट की पर्यावरण बेंच की मंजूरी के बिना लागू न किया जाए.
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Source: IOCL























