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'ऐसे चुनाव आयुक्त की जरूरत जिसे कुचला नहीं जा सकता'... जानें सुप्रीम कोर्ट ने टीएन शेषन का क्यों किया जिक्र

Supreme Court ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 में ऐसी नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया प्रदान करने के लिए एक कानून बनाने की परिकल्पना की गई थी, लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसा नहीं किया है.

Supreme Court On T N Seshan: जस्टिस केएम जोसेफ की अध्यक्षता वाली 5 जजों की संवैधानिक बेंच ने चुनाव आयोग के सदस्यों की नियुक्ति की प्रक्रिया में सुधार की सिफारिश करने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई की. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को ऐसे चरित्र का होना चाहिए, जो खुद पर बुलडोजर नहीं चलने देता. इस दौरान संविधान पीठ ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त दिवंगत टी एन शेषन (T N Seshan) का भी जिक्र किया. पीठ ने कहा कि टी एन शेषन जैसा व्यक्ति कभी-कभी होता है.

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति की प्रणाली में सुधार की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जस्टिस केएम जोसेफ, अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, हृषिकेश रॉय और सी टी रविकुमार की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने कहा कि संविधान ने सीईसी और चुनाव आयुक्त के "नाजुक कंधों" पर विशाल शक्तियां डाल रखी हैं. 

जस्टिस जोसेफ ने कहा, "योग्यता के अलावा, जो महत्वपूर्ण है वह यह है कि आपको चरित्र वाले किसी व्यक्ति की आवश्यकता है, कोई ऐसा व्यक्ति जो खुद को बुलडोजर से चलने न दे...ऐसे में सवाल यह है कि इस व्यक्ति की नियुक्ति कौन करेगा? नियुक्ति समिति में मुख्य न्यायाधीश की उपस्थिति होने पर कम से कम दखल देने वाली व्यवस्था होगी. हमें लगता है कि उनकी मौजूदगी से ही संदेश जाएगा कि कोई गड़बड़ नहीं होगी. हमें सबसे अच्छा आदमी चाहिए और इस पर कोई मतभेद नहीं होना चाहिए."

'कई सीईसी रहे हैं, लेकिन...'

पीठ ने कहा, "कई सीईसी रहे हैं, लेकिन टीएन शेषन कभी-कभार ही होते हैं." टीएन शेषन को पूर्व कैबिनेट सचिव पद पर 12 दिसंबर 1990 से 11 दिसंबर 1996 तक के कार्यकाल के लिए पोल पैनल में नियुक्त किया गया था. 10 नवंबर 2019 को उनका निधन हो गया. 

CEC के कार्यकाल पर SC की बड़ी टिप्पणी

SC ने कहा कि हालांकि 'मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (सेवा की शर्तें) अधिनियम, 1991' के तहत CEC का कार्यकाल छह साल का है, लेकिन किसी भी CEC ने 2004 से अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया है. पीठ ने कहा, "सरकार जो कर रही है वह यही है, क्योंकि वह जानती है कि जन्म तिथि, यह सुनिश्चित करता है कि जिसे सीईसी के रूप में नियुक्त किया गया है, उसे अपने पूरे छह साल नहीं मिले हैं… चाहे वह यूपीए (कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार हो या यह सरकार, यह एक प्रवृत्ति रही है."

अदालत ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित संविधान के अनुच्छेद 324 में ऐसी नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया प्रदान करने के लिए एक कानून बनाने की परिकल्पना की गई थी, लेकिन सरकार ने अभी तक ऐसा नहीं किया है. हालांकि, भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि इस मुद्दे पर "संविधान में कोई रिक्तता नहीं है. वर्तमान में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति मंत्रिपरिषद की सलाह पर राष्ट्रपति करते हैं." उन्होंने कहा कि अदालत को इस मुद्दे को इस दृष्टिकोण से देखना चाहिए.

ये भी पढ़ें- 'सभी सरकारों ने चुनाव आयोग की स्वतंत्रता को कर दिया खत्म'- CEC के कार्यकाल पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

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