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MCD टोल पर सख्त, बेरोजगार मजदूरों के खातों में पैसे और BS4 गाड़ियों को छूट... दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बड़ी बातें

SC on Delhi Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में संशोधन करते हुए दिल्ली-एनसीआर में BS-IV मानकों से नीचे आने वाले पुराने वाहनों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की इजाजत दे दी.

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के गंभीर स्तर पर चिंता जताते हुए बुधवार (17 दिसंबर 2025) को कई दिशा-निर्देश जारी किए. कोर्ट ने एनएचएआई और एमसीडी से कहा कि वे दिल्ली की सीमा पर स्थित नौ टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या स्थानांतरित करने पर विचार करें, ताकि शहर में यातायात भीड़ में कमी लाई जा सके.

सुप्रीम कोर्ट ने वायु प्रदूषण के संकट को हर साल सामने आने वाली समस्या करार दिया और इस खतरे से निपटने के लिए कारगर और व्यावहारिक समाधानों का आह्वान किया. कोर्ट ने 12 अगस्त 2025 के अपने अंतरिम आदेश में संशोधन किया और अधिकारियों को उन पुराने वाहनों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की अनुमति दे दी, जो भारत स्टेज-6 (BS-6) मानकों को पूरा नहीं करते हैं.

हालांकि, कोर्ट ने नर्सरी से कक्षा पांच तक के छात्रों के लिए स्कूल बंद करने के दिल्ली सरकार के निर्देश में दखल देने से इनकार कर दिया. उसने कहा कि सर्दी की छुट्टियां शुरू होने वाली हैं, ऐसे में इस फैसले में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है.

MCD टोल पर सख्त सुप्रीम कोर्ट

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर वाहनों की भीड़ को कम करने की कोशिश के तहत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया कि वे दिल्ली में एंट प्रवेश बिंदुओं पर स्थित नौ टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या स्थानांतरित करने पर विचार करें. इसमें खास तौर पर एमसीडी से एक हफ्ते के भीतर इस संबंध में निर्णय लेने को कहा कि क्या यातायात प्रवाह को सुचारु बनाने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाने के लिए इन टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है.

चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा, 'हमने एनएचएआई से भी इस संभावना पर विचार करने को कहा है कि दिल्ली में एमसीडी के नौ टोल संग्रह बूथों को ऐसी जगहों पर स्थानांतरित किया जाए, जहां एनएचएआई के कर्मचारी तैनात किए जा सकें और उसके द्वारा एकत्र किए गए टोल का एक हिस्सा एमसीडी को अस्थायी नुकसान की भरपाई के लिए दिया जा सके.'

चीफ जस्टिस ने कहा, 'इस बीच एमसीडी को इस मुद्दे पर सहयोग करने और नौ टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से निलंबित करने पर विचार करने का निर्देश दिया जाता है. संबंधित निर्णय एक सप्ताह के भीतर लिया जाए और रिकॉर्ड में पेश किया जाए.'

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि गुरुग्राम सीमा पर स्थित एक टोल संग्रह बूथ सहित एमसीडी की ओर से संचालित टोल संग्रह बूथों के कारण वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों को भारी यातायात जाम की समस्या का सामना करना पड़ रहा है.

'कल आप कनॉट प्लेस में टोल प्लाजा लगाना शुरू कर देंगे'

चीफ जस्टिस ने पूछा, “अधिकारी यह क्यों नहीं कह सकते कि जनवरी तक कोई टोल प्लाजा नहीं होगा? कल आप कनॉट प्लेस में टोल प्लाजा लगाना शुरू कर देंगे, क्योंकि आपको पैसे कमाने हैं?” कोर्ट कहा कि टोल से आय तो उत्पन्न हो सकती है, लेकिन इससे मुकदमेबाजी भी बढ़ती है. उसने सुझाव दिया कि एमसीडी एक ठोस योजना बनाए और कहे कि अगले साल 31 जनवरी तक कोई भी टोल प्लाजा नहीं होगा.

चीफ जस्टिस की बेंच ने इस दलील को खारिज कर दिया कि शहर में यातायात जाम की समस्या नहीं है. कोर्ट ने कहा, 'ये बातें सच हैं. लोग हर दिन इसका सामना कर रहे हैं.'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “हमने स्कूलों को बंद करने और ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का निर्देश देने के अनुरोध के संबंध में वकील की दलीलें सुनी हैं. हमें सूचित किया गया है कि नर्सरी से कक्षा पांच तक के छात्रों के लिए स्कूल अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं और ठंड की छुट्टी जल्द ही शुरू होने वाला है इसलिए, इस मामले में कोर्ट के हस्तक्षेप की कोई जरूरत नहीं है.'

कारगर समाधानों के बारे में सोचना होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने केवल प्रोटोकॉल बनाने के बजाय मौजूदा उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया. चीफ जस्टिस ने कहा, 'इस खतरे के व्यावहारिक और कारगर समाधानों के बारे में सोचना होगा.' उन्होंने कहा कि हालांकि निवारक उपाय मौजूद हैं, लेकिन उनका कार्यान्वयन लगातार कमजोर रहा है.

कोर्ट ने प्रदूषण संबंधी प्रतिबंधों से रोजी-रोटी पर पड़ने वाले प्रभाव को देखते हुए दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वह प्रतिबंधों के कारण बेरोजगार हुए निर्माण श्रमिकों का तत्काल सत्यापन करे और यह सुनिश्चित करे कि वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाए.

मजदूरों के खातों में पैसे ट्रांसफर करने का निर्देश

दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने पीठ को बताया कि लगभग ढाई लाख पंजीकृत निर्माण श्रमिकों में से अब तक लगभग 7,000 का सत्यापन किया जा चुका है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की बेंच को भरोसा दिलाया कि वित्तीय सहायता सीधे मजदूरों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी.

हालांकि, कोर्ट ने इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी के प्रति आगाह करते हुए कहा कि ऐसा नहीं होना चाहिए कि मजदूरों के खातों में ट्रांसफर राशि गायब हो जाए या किसी अन्य खाते में चली जाए. कोर्ट ने दिल्ली सरकार से प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए लागू प्रतिबंधों के कारण बेरोजगार हुए निर्माण श्रमिकों को वैकल्पिक काम उपलब्ध कराने पर भी विचार करने को कहा.

किसानों के पराली जलाने पर क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

चीफ जस्टिस की बेंच ने कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या हर सर्दियों में बढ़ जाती है. कोर्ट ने सीएक्यूएम और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के शहरों के प्रशासन से शहरी परिवहन, यातायात प्रबंधन और किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहन देने जैसे मुद्दों पर विचार करने को कहा. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि टुकड़ों में किए गए उपायों से संकट का समाधान नहीं होगा.

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