चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्यवाही से सुरक्षा देने वाली धारा को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और ECI से मांगा जवाब
Supreme Court: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि इस बात को देखा जाएगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को दिया गया संरक्षण कानूनी दृष्टि से सही है या नहीं.

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट देने वाली धारा को चुनौती पर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है. यह धारा चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक दायित्व निभाते समय किए गए कार्यों के लिए आजीवन कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है. कोर्ट ने केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है.
किस कानून को दी गई है चुनौती?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 को चुनौती दी गई है. इसके तहत मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (ECs) को आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किए गए कार्यों के लिए संरक्षण दिया गया है. इन कार्यों को लेकर उनके खिलाफ कोई भी न्यायिक कार्यवाही नहीं हो सकती.
याचिकाकर्ता की दलील
इस मामले में याचिका एनजीओ लोक प्रहरी ने दाखिल की है. याचिका में कहा गया है कि यह धारा संविधान के अनुच्छेद 14 यानी कानून की नजर में समानता के अधिकार का हनन करती है. अगर चुनाव आयुक्त कोई गलती करे, तो भी इस धारा के चलते उन्हें कानूनी रूप से जवाबदेह ठहरा पाना असंभव है.
कोर्ट में क्या हुआ?
सोमवार, 12 जनवरी को मामला चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच में लगा. एनजीओ की तरफ से उसके सचिव एस एन शुक्ला (पूर्व आईएएस) खुद पेश हुए. शुक्ला ने कहा कि CEC और EC को दी गई सुरक्षा सिर्फ कार्यकाल के दौरान ही नहीं, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी लागू होती है. ऐसी छूट राष्ट्रपति और राज्यपाल जैसे संवैधानिक पदों को भी प्राप्त नहीं है.
संवैधानिक विसंगति को भी बनाया आधार
शुक्ला ने यह भी कहा कि नया कानून संविधान के अनुच्छेद 324(2) के तहत बना है. यह अनुच्छेद चुनाव आयुक्त की नियुक्ति के बारे में है. लेकिन धारा 16 सेवा शर्तों को लेकर है. इसे 324(2) के तहत पारित कानून में शामिल करना गलत है. इस धारा को संसद में बहस से ठीक पहले अचानक जोड़ा गया इसलिए इस पर सदन में ठीक से चर्चा भी नहीं हो पाई.
कोर्ट ने क्या कहा?
जजों ने याचिका को विचार के लिए स्वीकार कर लिया. चीफ जस्टिस ने कहा कि इस बात को देखा जाएगा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को दिया गया संरक्षण कानूनी दृष्टि से सही है या नहीं. याचिकाकर्ता ने धारा 16 पर रोक की मांग की, लेकिन कोर्ट ने इससे मना कर दिया. चीफ जस्टिस ने कहा कि दूसरे पक्ष को सुनने के बाद ही कोई आदेश दिया जाएगा.
Source: IOCL
























