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एनसीपी चीफ शरद पवार ने अडानी को लेकर जो लिखा, उससे कांग्रेस को हो सकती है बड़ी मुश्किल

शरद पवार के अडानी के समर्थन में दिए हालिया बयान से कांग्रेस पहले ही तिलमिलाई हुई थी. अब शरद की किताब का जिक्र कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गया है, इस किताब में शरद ने गौतम अडानी की तारीफ की है.

कांग्रेस में पार्टी छोड़कर जाने वालों की लाइन लगी है. इसी बीच प्रमुख सहयोगी दल राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के नेता शरद पवार का गौतम अडानी मामले को लेकर रुख कांग्रेस के लिए बड़ी मुश्किल बनता जा रहा है.

महाराष्ट्र में एनसीपी के साथ गठबंधन कर सरकार चला चुकी कांग्रेस के लिए उस समय बड़ी दुविधा नजर आ रही है जब साल 2015 में आई शरद पवार की आत्मकथा ‘लोक माझे सांगाती' के पन्ने अब पलटने शुरू किए जाने लगे हैं. 

अपनी आत्मकथा में एनसीपी नेता शरद पवार की जमकर तारीफ कर चुके हैं. लोकसभा चुनाव में 2024 में उद्योगपति गौतम अडानी और केंद्र सरकार के कथित रिश्तों को मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही कांग्रेस के लिए शरद पवार ही सबसे बड़े रोड़ा नजर आ रहे हैं. 

शरद पवार ने बीते दिनों एक इंटरव्यू में कहा कि एक इंडस्ट्रियल ग्रुप को टारगेट किया गया. पवार ने ये भी कहा कि इस मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच की मांग व्यर्थ है. 

शरद पवार का ये बयान ऐसे समय में आया जब सदन में 19 विपक्षी पार्टियां अडानी मुद्दे को जमकर उठा रही थी. इन तमाम विपक्षी पार्टियों की तरफ से मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए जा रहे थे.  इस समय एनसीपी विपक्ष की एक बड़ी पार्टी है. शरद पार्टी के बड़े नेता हैं. ऐसे में उनके इस बयान ने कई सवाल खड़े कर दिए. 

पुरानी है पवार और अडानी की दोस्ती

पवार की गौतम अडानी से दोस्ती कोई नई नहीं है. ये दोस्ती दो दशक पुरानी है. इसका जिक्र उन्होंने साल 2015 में मराठी भाषा में छपी अपनी आत्मकथा ‘लोक माझे सांगाती’ में भी किया है. शरद ने इस किताब में अडानी की खूब तारीफ की है. शरद पवार के बयान के बात ये किताब सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है. 

शरद ने अडानी को मेहनती साधारण, जमीन से जुड़ा’’ और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में कुछ बड़ा करने की महत्वाकांक्षा रखने वाला व्यक्ति बताया है. पवार ने यह भी लिखा है कि उनके आग्रह पर ही अडानी ने थर्मल ऊर्जा क्षेत्र में कदम रखा.

शरद ने अपनी किताब में अडानी को कैसा बताया  

शरद पवार ने अपनी किताब में अडानी के कोयला क्षेत्र में कदम रखने और अपने (पवार के) ही सुझाव पर कारोबारी के थर्मल एनर्जी क्षेत्र में उतरने की बात कही हैं. पवार उस समय केंद्रीय कृषि मंत्री थे.  

शरद की किताब के मुताबिक अडानी को कोयला क्षेत्र में कदम रखने का सुझाव पवार ने ही दिया था. अडानी ने 3,000 मेगावाट का ताप ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया. किताब में शरद ने याद किया कि कैसे उन्होंने अपने दशकों पुराने राजनीतिक करियर के दौरान महाराष्ट्र में विकास के लिए कई उद्योगपतियों के साथ करीबी ताल्लुकात बढ़ाए. 

एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा कि वह उद्योगपतियों के साथ नियमित संपर्क में रहते थे जो किसी भी दिन दोपहर दो बजे से शाम चार बजे के बीच पहले से समय लिये बगैर उनसे मिल सकते थे.

पवार और अडानी के अनसुने किस्सों का जिक्र

शरद पवार ने अपनी किताब में लिखा कि अडानी ने कैसे हीरा उद्योग में अपनी किस्मत आजमाने की कोशिश से पहले छोटे उद्यमों में हाथ आजमाया. पवार ने लिखा कि गौतम हीरा में अच्छी कमाई कर रहे थे लेकिन गौतम की दिलचस्पी  बुनियादी बिजनेस में थी.  

उस समय अडानी की दोस्ती गुजरात के मुख्यमंत्री चिमनभाई पटेल के साथ अच्छी थी. उन्होंने मुंद्रा में एक बंदरगाह के विकास का एक प्रस्ताव पेश किया था. बंदरगाह पाकिस्तान सीमा के करीब है और यह एक शुष्क जगह है. बकौल पवार अडानी ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अडानी ने चुनौती स्वीकार की.

शरद के बयान से पहले ही तिलमिलाई हुई है कांग्रेस

एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बयान पर पहले ही जम कर विवाद हो चुका है. शरद अपने बयान में एक इंडस्ट्रियल ग्रुप को टारगेट किये जाने को गलत बता चुके हैं. पवार इस मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की जांच की मांग व्यर्थ बताई थी.

कांग्रेस की तरफ से जयराम रमेश ने बयान जारी करते हुए कहा कि एनसीपी का अपना कोई स्टैंड हो सकता है, लेकिन 19 विपक्षी पार्टियां ये मानती हैं कि अडानी मुद्दा गंभीर है.

मैं ये भी साफ करना चाहता हूं कि एनसीपी और दूसरे विपक्षी दल हमारे साथ ही खड़े हैं, हम सभी साथ मिलकर लोकतंत्र को बचाना चाहते हैं और बीजेपी की बंटवारे वाली राजनीति को हराना चाहते हैं. 

जयराम रमेश ने भले ही ये बयान दे दिया हो, लेकिन कांग्रेस ये अच्छे से जानती है कि अडानी मुद्दे को राहुल गांधी ने उठाया है और ये मुद्दा कांग्रेस के काफी करीब है.  

राहुल की सदस्यता जाने के बाद कांग्रेस को लगातार मिल रहा है सिरदर्द

लोकसभा चुनाव के नजदीक आते ही कांग्रेस का सिरदर्द भी बढ़ गया है. एक के बाद एक कई नेता कांग्रेस का साथ छोड़ चुके हैं. इसका ताजा उदाहरण वरिष्ठ नेता एके एंटनी के बेटे अनिल एंटनी के बीजेपी में शामिल होना है. इसके बाद आंध्र प्रदेश के पूर्व सीएम किरण रेड्डी ने भी सत्ताधारी दल की सदस्यता ग्रहण कर ली.  पिछले 9 साल में 23  बड़े नेता कांग्रेस का दामन छोड़ चुके हैं.

इनमें जगदंबिका पाल, हिमंत बिस्वा सरमा, एसएस कृष्ण, शंकर सिंह वाघेला, एनडी तीवारी, कपिल सिब्बल, गुलाम नबी आजाद के अलावा अल्पेश ठाकुर, अजित जोगी और रीता बहुगुणा जोशी, विजय बाहुगुणा, अशोक चौधरी, नारायण राणे का नाम शामिल है. 

शरद पवार की किताब में अडानी का जिक्र कांग्रेस के लिए कितना बड़ा झटका

शरद पवार विपक्षी एकता की अहम कड़ी हैं. महाराष्ट्र में दोनों पार्टियां साथ हैं, ऐसे में कांग्रेस जरूर चाहेगी कि शरद पवार उनके साथ आएं. एक तरफ जहां राहुल गांधी अयोग्य ठहराए जा चुके हैं, उन्हें सहयोगी पार्टियों की जरूरत हैं. ऐसे समय में पवार का हालिया बयान और उनकी किताब ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. महाराष्ट्र में अटकलें शुरू हो गई हैं कि एनसीपी प्रमुख आगे क्या करने वाले हैं.

भले ही शरद ने ये किताब 2015 में लिखी है लेकिन अभी उनके बयान के बाद इस किताब में जिस तरह से अडानी का जिक्र किया गया है, उससे सियासी गलियारे में ये अटकलें भी लगने लगी हैं क्या ये बीजेपी और एनसीपी के एक साथ आने का पूर्व संकेत है. 

1999 में भी शरद पवार की तरफ से ऐसी ही एक टिप्पणी आई थी. उस दौरान कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी बना रहे थे. एनसीपी ने 1999 में कांग्रेस के खिलाफ राज्य चुनाव लड़ा था, लेकिन उसी साल उसने कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया था. उसके बाद वह 15 साल तक उतार-चढ़ाव के दौर में कांग्रेस के साथ साझेदार बने रहे. पवार केंद्र में कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में एक वरिष्ठ मंत्री थे. 

2014 में मोदी लहर आई, केंद्र में बीजेपी की सरकार बनने के बाद कुछ महीनों बाद एनसीपी ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया. इसमें दोनों पार्टियां अन्य दो मुख्य मोर्चों, शिवसेना और बीजेपी की तरह अलग-अलग चुनाव लड़ रही थी. इस चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी लेकिन बहुमत से 22 सीटें दूर थी.

शरद पवार ने फिर सबको चौंकाया और बीजेपी को बाहर से समर्थन देने का ऐलान कर दिया. एक तरह से कह लें तो पवार की वजह से ही देवेंद्र फडणवीस को सबसे महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला.

पांच साल बाद 2019 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी के बहुमत से बाहर हो गयी और पवार ने बीजेपी की सहयोगी शिवसेना को लुभाना शुरू कर दिया. उस समय उद्धव ठाकरे की मुख्यमंत्री बनने की इच्छा को बीजेपी ने ठुकरा दिया था. वजह पवार ही थे, जिन्होंने एमवीए सरकार बनाने के लिए शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के साथ गठबंधन किया था. इसके बाद भी कई नाटकीय घटनाक्रम हुए. जिसमें सुबह-सुबह देवेंद्र फडणवीस के साथ शरद पवार के भतीजे अजित पवार का शपथ लेना भी शामिल है.

 दिलचस्प बात यह है कि पवार ने कभी सोनिया गांधी की जगह कांग्रेस छोड़ दी थी. लेकिन अपने हित के लिए बाद में पवार सोनिया गांधी को नेता मान लिया.

1999 में सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस छोड़ दी थी. शरद ने तारिक अनवर और पीए संगमा के साथ के साथ मिलकर अपनी पार्टी राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी बना ली थी. हालांकि उसी साल शरद ने कांग्रेस की मदद से महाराष्ट्र में अपनी सरकार भी बनाई थी. 1978 में शरद पवार इंदिरा गांधी से भी बगावत कर चुके हैं तब शरद की उम्र 27 साल थी. 

 

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