अंतर्राष्ट्रीय कारणों की वजह से गिरा रुपया, डरने की जरूरत नहीं: सरकार
रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, लेकिन उसका करेंसी बाजार में हस्तक्षेप कारगर नहीं होगा क्योंकि रुपये में गिरावट का कारण ग्लोबल हैं.

नई दिल्लीः डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये पर केंद्र सरकार ने बयान दिया है और कहा है कि अंतर्राष्ट्रीय कारणों की वजह से रुपया गिरा है और इससे डरने की जरूरत नहीं है. आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये के अब तक के निचले स्तर पर पहुंचने के लिये ‘बाहरी कारणों’ को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि जब तक अन्य करेंसी के मुताबिक घरेलू रुपये में गिरावट होती है, इसमें चिंता की कोई बात नहीं है. तुर्की की आर्थिक चिंता से अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया आज कारोबार के दौरान 70.1 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक गिर गया. हालांकि बाद में इसमें सुधार आया और अंत में कल के मुकाबले सुधरकर 69.89 पर बंद हुआ.
गर्ग ने कहा, ‘रुपये में गिरावट का कारण बाहरी कारक हैं इस समय इसको लेकर चिंता की कोई वजह नहीं है.’ उन्होंने कहा कि अगर रुपया 80 रुपये प्रति डॉलर तक चला जाता है और अगर दूसरी करेंसी में भी गिरावट इसी स्तर पर रहती है तो चिंता का कोई कारण नहीं होगा. गर्ग ने कहा कि भारतीय रुपया अभी भी कुछ दूसरी करेंसी की तुलना में बेहतर स्थिति में है.
उन्होंने यह भी कहा कि रिजर्व बैंक के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, लेकिन उसका करेंसी बाजार में हस्तक्षेप कारगर नहीं होगा क्योंकि रुपये में गिरावट का कारण ग्लोबल हैं. तीन अगस्त को खत्म हफ्ते में केंद्रीय बैंक के पास 402.70 अरब डॉलर का मुद्रा भंडार था. यह पिछले सप्ताह से 1.49 अरब डॉलर कम है.
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा कि डॉलर की तुलना में सभी करेंसी कमजोर हुई हैं लेकिन अन्य मुद्राओं की तुलना में रुपये में उतनी गिरावट नहीं आयी है. कुमार ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि रुपया 69 से 70 के बीच स्थिर होना चाहिए क्योंकि अगर आप देश में बांड और शेयर समेत विभिन्न क्षेत्रों में आने वाले निवेश को देखें तो यह स्तर विदेशी निवेश के लिहाज से आकर्षक रहा है.’’
आईसीआईसीआई बैंक के बी प्रसन्ना ने कहा कि तुर्की संकट का सभी उभरते बाजारों पर प्रभाव पड़ा है और रुपये पर भी उसका असर है.
Source: IOCL

























