Mohan Bhagwat On BJP: 'RSS को BJP के चश्मे से देखना बड़ी भूल, संघ किसी के...', ऐसा क्यों बोले मोहन भागवत?
RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ को BJP के नजरिए से देखना बड़ी भूल है. उन्होंने ये बात भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शुक्रवार (2 जनवरी 2026) को कहा कि संघ को भारतीय जनता पार्टी के नजरिए से समझने की कोशिश करना एक बड़ी भूल होगी. उन्होंने कहा कि RSS एक विशिष्ट संगठन है, जिसकी स्थापना किसी प्रतिक्रिया या विरोध के रूप में नहीं हुई है. भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए भागवत ने संघ की भूमिका, उद्देश्य और उसके बारे में फैलाई जा रही धारणाओं पर विस्तार से बात रखी.
PTI के मुताबिक भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम संघ की शताब्दी से जुड़े आयोजनों का हिस्सा था, जो देशभर में किए जा रहे हैं. इस अवसर पर मोहन भागवत ने कहा कि संघ को किसी एक राजनीतिक दल या उससे जुड़े संगठनों के माध्यम से समझना सही नहीं है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जैसे संघ को BJP से जोड़कर देखना गलत है, वैसे ही उसे किसी अन्य अनुषांगिक संगठन के नजरिए से समझना भी सही नहीं होगा. उन्होंने कहा कि RSS समाज को जोड़ने, अनुशासन और मूल्यों को विकसित करने का कार्य करता है, ताकि देश दोबारा विदेशी अधीनता की स्थिति में न पहुंचे.
संघ को अर्धसैनिक संगठन मानना गलत
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने इस धारणा को भी खारिज किया कि RSS कोई अर्धसैनिक संगठन है. उन्होंने कहा कि संघ में गणवेश, शाखाएं, पदयात्राएं और दंड अभ्यास होते हैं, लेकिन इसका उद्देश्य सैन्य प्रशिक्षण नहीं है. यदि कोई इसे अर्धसैनिक संगठन मानता है, तो यह संघ को समझने में गंभीर भूल होगी.
RSS को लेकर बनाई जा रही गलत धारणाएं
RSS प्रमुख ने कहा कि आज के समय में संघ के बारे में एक गलत नैरेटिव बनाया जा रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे किसी भी संगठन को समझने के लिए सतही जानकारी पर निर्भर न रहें. उनका कहना था कि लोग मूल स्रोतों तक जाने के बजाय अधूरी या गलत जानकारियों पर भरोसा कर लेते हैं, जिससे भ्रम फैलता है.उन्होंने कहा कि संघ के बारे में सही जानकारी उन्हीं को मिलेगी, जो प्रामाणिक स्रोतों से उसे समझने का प्रयास करेंगे. इसी कारण शताब्दी वर्ष के दौरान वे स्वयं देशभर में जाकर संघ की भूमिका और उद्देश्य को स्पष्ट कर रहे हैं.
संघ न विरोध में बना, न किसी से प्रतिस्पर्धा में
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि आम धारणा यह बना दी गई है कि संघ किसी ताकत के विरोध में या प्रतिक्रिया के रूप में खड़ा हुआ था, जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. संघ न तो किसी का विरोध करने के लिए बना है और न ही वह किसी संगठन या विचारधारा से प्रतिस्पर्धा करता है.
स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर
अपने संबोधन में मोहन भागवत ने स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर भी जोर दिया. उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर बनने के लिए आत्मगौरव जरूरी है. देश में बने उत्पादों का उपयोग करने से न केवल स्थानीय रोजगार बढ़ता है, बल्कि राष्ट्रीय आत्मविश्वास भी मजबूत होता है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वदेशी का मतलब दुनिया से व्यापार बंद करना नहीं है. जिन चीजों का उत्पादन देश में नहीं होता, जैसे कुछ दवाइयां, उन्हें आयात किया जा सकता है. लेकिन व्यापार किसी दबाव या डर के तहत नहीं, बल्कि देश के हित में होना चाहिए.
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Source: IOCL





















