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इमरजेंसी पर राहुल गांधी के बयान ने कांग्रेस के दाग को और गहरा किया!

मौजूदा युवा पीढ़ी ने न तो इमरजेंसी का काल देखा और न ही उन्हें यह मालूम है कि तब क्या-क्या हुआ था.लेकिन राहुल का यह बयान आने के बाद उनके मन में उत्सुकता जाग गई है.वे अब गूगल पर सर्च कर रहे हैं कि आखिर इमरजेंसी क्यों लगाई गई थी और तब देश के हालात क्या थे.

नई दिल्लीः करीब छियालीस बरस बाद इमरजेंसी लगाने को गलती मानकर राहुल गांधी ने भले ही कांग्रेस के दाग को धोने की कोशिश की है लेकिन सही मायने में पांच राज्यों के चुनाव से ऐन पहले उनके इस बयान ने पार्टी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. शीर्ष नेतृत्व को लेकर नेताओं की नाराजगी और आपसी खींचतान में उलझी पार्टी के लिये यह बयान उबाल लेकर आया है जिसे ठंडा होने में काफी वक़्त लगेगा. यह कहना गलत नहीं होगा कि उनके इस बयान ने कांग्रेस का दाग मिटाने जी जगह उसे और हरा व गहरा कर दिया है.

निश्चित तौर पर 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल को देश की राजनीति के एक काले अध्याय के तौर पर जाना जाता है और याद किया जाता है. यह सही है कि 1980 में दोबारा केंद्र की सत्ता में आने के बाद इंदिरा गांधी ने इसे एक बड़ी भूल और गलती बताया था.

बाद के सालों में कांग्रेस ने इमरजेंसी शब्द से ही किनारा करना शुरु कर दिया था. किसी भी चुनाव के दौरान इससे संबंधित सवालों का जवाब अक्सर पार्टी नेता यह कहते हुए टाल जाते थे कि वह अब एक इतिहास की बात हो चुकी है और कांग्रेस हमेशा भविष्य की राजनीति करने में यकीन रखती है. मतलब यह कि तब पार्टी के तकरीबन सभी दिग्गज़ नेता भी इसे गलती मानते थे लेकिन इस घटना को दोहराने से इसलिये गुरेज़ किया करते थे कि पार्टी को इसका बड़ा खामियाजा उठाना पड़ेगा.

जाहिर है कि इतिहास के इस अध्याय को पढ़ने के बाद वे भी यही नतीजा निकालेंगे कि यह एक गलती थी और तब उनके दिलो दिमाग में इसे लागू करनी वाली पार्टी के प्रति नफरत की भावना आना स्वाभाविक है और यही बात कांग्रेस के लिये नुकसानदायक साबित होने वाली है.

राहुल के नजदीकी नेताओं का तर्क है कि चुनावों से पहले उनका यह बयान पार्टी के लिये गेम चेंजर साबित हो सकता है. इसलिये कि उन्होंने देश के मौजूदा माहौल की तुलना इमरजेंसी से करते हुए यह कहा है कि भले ही उसे लागू करना गलती थी, लेकिन तब भी ऐसे हालात नहीं थे, जो अब मोदी सरकार ने कर दिये हैं.

तकरीबन सभी लोकतांत्रिक व संवैधानिक संस्थाओं की स्वयत्तता को खत्म कर दिया है.लिहाज़ा राहुल ने देश के युवाओं को टारगेट करते हुए ही यह बात कही है. लेकिन राहुल यह बयान देते वक्त शायद भूल गये कि दूसरों के घर पर पत्थर फेंकने के लिये अपने घर की अलमारी में रखे कंकालों का इस्तेमाल नहीं किया जाता.

आपातकाल पर राहुल गांधी के बयान पर बीजेपी का पलटवार, कहा- किस-किस गलती के लिए मांगेंगे माफी 

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